कहानी Raisina Hills की, जहां 300 परिवारों को बेघर कर बना था Viceroy House, बाद में कैसे कहलाया राष्ट्रपति भवन

भारत का 76वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति की भावना को बढ़ाने वाला है। इस दिन पूरे देश में तिरंगा गर्व के साथ लहराता है। तिरंगा हमारे लिए आन-बान-शान है। दिल्ली की रायसीना हिल्स पर भी तिरंगा हमारे देश की समृद्ध विरासत को बतलाता है। आइए आज हम आपको रायसीना हिल के बारे में पूरी जानकारी देते हैं। रायसीना हिल्स नई दिल्ली का वह क्षेत्र हैं जहां राष्ट्रपति भवन सहित सबसे महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें हैं। इसी रायसीना हिल्स के एक हिस्से में राष्ट्रपति भवन है। पूरी नई दिल्ली को डिजाइन करने की जिम्मेदारी ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर पर आई। 1931 में उद्घाटन किए गए इस परिसर में राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, उत्तर और दक्षिण ब्लॉक, कर्तव्यपथ, रिकॉर्ड कार्यालय और प्रतिष्ठित इंडिया गेट स्मारक शामिल थे। इसे भी पढ़ें: Independence Day: प्रधानमंत्री की तस्वीर और नारों के प्रिंट वाली पतंगों से गुलज़ार रहेगा आसमानइसे हिल्स इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जमीन से 18 मीटर ऊपर पहाड़ी पर बसा हुआ है। यहां से पूरे शहर और अन्य प्रमुख स्मारकों का दृश्य दिखाई देता था। क्षेत्र से बहुत दूर बहने वाली नदी की धारा ने इसे अंग्रेजों के लिए अपनी आधिकारिक राजधानी स्थापित करने के लिए आदर्श स्थान बना दिया। इसके चारों और आपको हरियाली देखने को मिलेगी। नई दिल्ली शहर के निर्माण की परियोजना के दौरान, 300 परिवारों को स्थानांतरित किया गया और 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत उनसे भूमि का अधिग्रहण किया गया। मूल रूप से यह क्षेत्र 150 गांवों से संबंधित था, जिसमें लगभग 17,00 एकड़ भूमि शामिल थी, जिसमें ज्यादातर किसान रहते थे। उनके जमीन को कोलकाता से दिल्ली में राजधानी स्थानांतरित करने के लिए अधिग्रहित किया गया था। इसे भी पढ़ें: Prime Minister Independence Day Speech | मेक इन इंडिया पर केंद्रित होगा पीएम मोदी का स्वतंत्रता दिवस का भाषण, अपनी सरकार की गिनाएंगे उपलब्धियांहालांकि, भूमि अधिग्रहण आसान नहीं था। उनमें से कुछ ने बस अपनी जमीनें सौंप दीं, दूसरों ने मुआवजे की मांग की और एक लंबी लड़ाई के बाद, ब्रिटिश सरकार को अंततः ग्रामीणों को यहां से हटाने में कामयाबी मिली। और तब जाकर सरकार के महल का निर्माण शुरू किया गया। जिन गांवों को यहां से हटाया गया उनमें रायसीना, मालचा, कुशक, पेलंजी, दसगराह, तालकटोरा और मोतीबाग उनमें मुख्य थे। मूल रूप से रायसीना गांव के नाम से जाना जाने वाला यह गांव बाद में ब्रिटिश शासन की मुख्य भूमि रायसीना हिल्स बन गया। रायसीना पर ‘वॉयसरॉय हाउस’ बनाने का फैसला किया गया था। यह 23 जनवरी 1931 में बनकर तैयार हुआ जिसमें ‘वॉयसरॉय ऑफ इंडिया’ लॉर्ड इरविन रहने आए। साल 1947 तक इसे ‘वॉयसरॉय हाउस’ कहा जाता था। बाद में यह राष्ट्रपति भवन कहलाया। वहीं, पूरे इलाके को आज लुटियंस के नाम से जाना जाता है।