तनकर खड़ा हुआ भालू और टाइगरों को दौड़ा लिया, जंगल का हैरान करने वाला वीडियो

नई दिल्ली: राजस्थान का रणथंभौर नेशनल पार्क, जोन नंबर तीन। पहाड़ी से निकलती पगडंडी आगे खुली जगह पर बने पानी के गड्ढे (एनीकट) तक जाती है। सूरज ठीक सिर के ऊपर था। आस-पास झाड़ियां सूखी हैं मतलब बारिश हुए लंबा समय बीत गया है। कृष्णा बाघिन के दोनों बच्चे अब इतने बड़े हो चुके हैं कि वे मां से अलग रह सकें। वे अक्सर इसी पगडंडी से गुजरते थे। यहां आसानी से शिकार मिल जाता है। सांभर और चीतल रोज इसी गड्ढे में पानी पीने आते थे। किशोरावस्था के जोश से भरे हुए दोनों भाई आज भी इसी उम्मीद में पगडंडी से गुजर रहे थे। एक भाई आगे, एक पीछे। इन्हें भनक भी नहीं थी कि आज इनका सारा जोश ठंडा पड़ने वाला है। सांभर-चीतल के अलावा कोई तीसरी भी आज पगंडडी पर आ गया। वह भी उसी रास्ते पानी पीकर लौट रहा था। अचानक आगे वाले भाई को कुछ आवाज सुनाई दी। वह साइड होकर सामने से आ रहे जानवर की ताक में बैठ गया। यह कोई सांभर या चीतल नहीं, बल्कि भालू था।

कृष्णा के बच्चों का पहले भी भालू से सामना हुआ था, लेकिन भिड़ंत नहीं हुई थी। टाइगर को लगा कि थोड़ा सा डराएंगे और यह भालू उल्टे पांव भाग जाएगा। यह सोच टाइगर सामने आया और एक जोरदार दहाड़ लगाई। लेकिन पासा उल्टा पड़ गया। डरना तो दूर उल्टे भालू ने खुद टाइगर पर धावा बोल दिया। वह सामने से तेजी से आवाज करता आ रहा था। टाइगर को कुछ समझ नहीं आया। एक पल में ही उसका जोश ठंडा पड़ा और दूसरे ही पल वह पीछे हटता दिखाई दिया। तब तक पीछे आ रहा बाघिन कृष्णा का दूसरा बच्चा समझ चुका था कि गड़बड़ हो हुई है। वह हमले की मुद्रा में बैठ गया। भालू ने जब देखा कि दो टाइगर हैं, तो उसने अपना नया पैंतरा चला। वह दो पैरों पर खड़ा होकर विशालकाय शरीर दिखाता हुआ गरजा। वास्तव में इंसानों की तरह जानवरों में भी परसेप्शन से भी जंग लड़ी जाती है। भालू का रौब देखकर दोनों भाई डर गए। अब उनके पास पीछे हटने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

रणथंभौर नेशनल पार्क के बीट गार्ड मोहन सिंह बताते हैं कि टाइगर भालू को खाता नहीं हैं, लेकिन मार जरूर देता है। टाइगर भालू के बच्चों को भी मार देता है इसीलिए टाइगर और भालू एक दूसरे के दुश्मन होते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच 10-15 मिनट तक खूब लड़ाई होती है। हालांकि, टाइगर भालू के मुंह कम ही लगता है। वह अधिकतर इससे किनारा कर लेता है। अपने लंबे बालों के चलते भालू जल्दी घायल नहीं होता। भालू के ढाई से तीन इंच के लंबे नाखून होते हैं, जो किसी भी जमीन को खोद देते हैं। टाइगर इन नाखूनों के चलते भी भालू से लड़ाई मोल नहीं लेता।

मोहन सिंह ने बताया कि कृष्णा के बच्चों को अपनी मां से अलग हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था। इसलिए उनमें भालू से लड़ने का कॉन्फिडेंस नहीं था। उन्हें नहीं पता था कि वे जीत पाएंगे या नहीं। इसलिए वे इतनी आसानी से पीछे हट गए।