लंपी स्किन डिजीज का खतरा नहीं हो रहा कम, इस जिले में बड़ी संख्या में पशु हुए बीमार

महाराष्ट्र में लंपी स्किन डिजीज का खतरा कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है. राज्य के मराठवाड़ा में भी तेज़ी मवेशियों में यह रोग फैल रहा है. इस बीच, प्रशासन ने जानकारी दी है कि नांदेड़ जिले के छह तालुकों में लंपी रोग से पशु संक्रमित पाए गए हैं. जिले के धर्माबाद, बिलोली, माहूर, लोहा, भोकर और हिमायतनगर तालुका के 9 गांवों को इस रोग से प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है. इसके बाद अब प्रभावित गांवों के पांच किलोमीटर के दायरे में टीकाकरण किया जाएगा. इसके चलते अब जिला प्रशासन ने सक्त नियम लागू कर दिए है.
कलेक्टर ने जारी किये आदेश
कलेक्टर द्वारा दिये गये आदेश के अनुसार रोग फैलने के स्थान से 5 किलोमीटर रेडियस एरिया को अलर्ट एरिया घोषित कर दिया गया है. इस क्षेत्र के गांवों में प्रभावित पशुओं को छोड़कर अन्य पशुओं का निवारक टीकाकरण किया जाना जरूरी कर दिया गया है. जिले के कलेक्टर ने आदेश दिया है कि पशुपालकों को प्रभावित गांवों में पीने के पानी और पशुओं के चरने की अलग से व्यवस्था होगी. जिला कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रोग प्रभावित क्षेत्रों में गाय-भैंस को अलग-अलग रखा जाए, और संक्रमित व रोगग्रस्त पशुओं को अलग-अलग रखा जाए. साथ ही संक्रमित पशुओं की मृत्यु होने पर शवों का निस्तारण किया जाए.
प्रशासन हुई सख्त
इसके साथ ही कलेक्टर ने स्थानीय प्रशासनिक निकायों को अहम निर्देश दिए हैं. जिसमें रोग फैलाने वाले मच्छरों, मक्खियों, गोचिद आदि को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में रोगाणुहीन घोल की सफाई एवं छिड़काव, ढेलेदार त्वचा रोगों के प्रकोप और प्रसार को रोकने के लिए सभी ग्राम पंचायतों, नगर परिषदों, नगर पंचायतों और नांदेड़ जिले के नगर निगमों को अपने क्षेत्र में आवारा पशुओं की नियमित निगरानी करनी करनी होगी. इसके अलावा बाढ़ के दौरान पशुओं की देखभाल करने की भी बात कही गई है. कलेक्टर ने कानून के अनुसार कार्य नहीं करने वाले तथा कानून के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न करने वाले चरवाहों, व्यक्तियों, संगठन के प्रतिनिधियों के खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये हैं.
खुद से किया इलाज तो होगी कानूनी कार्रवाई
सभी निजी लाइसेंसधारियों-पशुपालन के लिए सरकारी पशु चिकित्सा संस्थान को गांठदार त्वचा रोगों की रिपोर्ट करना अनिवार्य है. लंपी रोग का उपचार पशुधन विकास अधिकारी या उसके निर्देशानुसार करना होगा. यदि निजी चिकित्सक लंपी स्किन डीजज रोगों का अपने तरीके यानी परस्पर उपचार करते हैं तो उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कलेक्टर अभिजीत राउत ने भी आदेश में स्पष्ट किया है कि नांदेड़ जिले के सभी पशु चिकित्सा संस्थान वरिष्ठों के साथ चर्चा करें और इस रोगों के इलाज के लिए आवश्यक सभी दवाएं उपलब्ध कराएं.
एग्रीकल्चर न्यूज,सरकारी कृषि योजनाएं,क्रॉप स्पेशल,एग्री पॉलिसी,खेती-किसानी की सक्सेस स्टोरीकी ताजा खबरें पढ़ें औरTV9 Hindi Agricultureपेज को फॉलो करें.