वो ‘शपथ’… जिसके बाद अमित शाह ने तय कर दिया बिहार में बीजेपी का चेहरा

पटना: का सोमवार को पटना में जबरदस्त स्वागत ने सत्ताधारी खेमे में हलचल तो मचाई ही। साथ ही बीजेपी के धुरंधर नेता भी चौंक उठे। यह भले केंद्रीय नेतृत्व के मुंह से निकली बात नहीं है, फिर भी एक कहावत है ‘मॉर्निंग शोज द डे।’ जिस तरह से सम्राट चौधरी का स्वागत किया गया वो किसी मुख्यमंत्री उम्मीदवार से कम नेता का नहीं लग रहा था। सम्राट चौधरी तो भाजपा की मुख्य धारा में उसी दिन से आ गए थे जब उनकी आक्रमकता खबर की दहलीज पर दस्तक देते लगती थी। जिस दिन सम्राट चौधरी ने शपथ ली कि वो अपनी पगड़ी उसी दिन उतारेंगे, जिस दिन राज्य की सत्ता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उखाड़ फेंकेंगे। इस बड़ी शपथ ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को अपनी ओर आकर्षित किया और अब सम्राट को एक बड़ी जिम्मेदारी देने की ओर भाजपा कदम बढ़ा रही है।क्यों बनेंगे बिहार के ‘सम्राट’?दरअसल , सम्राट चौधरी के ग्रैंड स्वागत से स्वतः आगामी सीएम उम्मीदवार की ध्वनि उभरने लगी। अब जिस नेता के स्वागत में दो केंद्रीय मंत्री, कई सांसद,कई पूर्व अध्यक्ष के साथ विधायकों और एमएलसी की फौज लगी हो उसका आभामंडल तो बड़ा होना ही है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, अश्वनी चौबे, पूर्व अध्यक्ष संजय जायसवाल, राधामोहन सिंह, भीखू दलसानिया, रवि शंकर प्रसाद, मंगल पांडे जैसे नेता जिसके स्वागत में हों, उसे निश्चित रूप से बड़ा काम सौंपा गया होगा।स्वागत पर आया अमित शाह का फरमान- चर्चाराजनीतिक गलियारों की बात करें तो चर्चा यह है कि सम्राट चौधरी के स्वागत को ले कर प्रदेश भाजपा नेताओं के पास का फरमान आया था। यही वजह है कि तमाम आंतरिक मतभेद के बावजूद यह भाजपा का अब तक का सबसे बड़ा शो हुआ, जिसमें लगभग सभी जाति के कद्दावर नेताओं ने शिरकत की। यह संदेश भी सम्राट चौधरी के कद को बड़ा करने का कारण बना। राजनीतिक विरासत भी एक कारणदरअसल ,सम्राट चौधरी के इस बड़े कद के कई कारण हैं । एक वक्त में कुशवाहा राजनीति की विरासत सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी संभाला करते थे। इनकी माता भी विधायक रही हैं। ये खुद लालू प्रसाद ,नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी के कार्यकाल में मंत्री भी रहे थे। इस कारण से भी भाजपा में कद को बढ़ावा मिला। वैसे भी जिसके पक्ष में अमित शाह हों, उसका कद तो बढ़ना था। बिहार पिछड़ी जाति की राजनीति का गढ़ रहा है। पिछड़ी जाति में यादव के बाद कुशवाहा का वोट बैंक सबसे बड़ा है। पहले लव कुश की राजनीति की विरासत जगदेव प्रसाद ,शकुनी चौधरी, तुलसीदास मेहता के हाथों में थी। 2005 के बाद लव कुश की विरासत के ध्वज वाहक नीतीश कुमार बने। भाजपा की उम्मीद है कि सम्राट चौधरी अपने प्रयास से लव कुश की बागडोर संभालें। अब इस मुहिम में वे कितना सफल होंगे यह तो लोकसभा चुनाव 2024 में तय होगा। फिलहाल चौधरी तो भाजपा के सम्राट बना ही दिए गए हैं।