छोटी-मोटी गलती नहीं है ठीक से देखे बिना कुछ भी गटकने की आदत, ये खबर पढ़ लीजिए

फरीदाबाद: अगर आप अक्सर बाहर की चीजें बिना जांच-परखे खाते हैं और किसी भी बर्तन का इस्तेमाल खाने या पीने में करते हैं तो यह खबर आपको सावधान करने के लिए है। खासकर शहर से कोसों दूर पिकनिक पर जाने वालों के लिए। फरीदाबाद की एक 12 साल की बच्ची अपने परिवार के साथ पिकनिक पर जाती है। वहां काफी मौज-मस्ती करती है। बाहर का खाना-पीना भी खूब करती है। उसने कोल्ड ड्रिंक्स पी, खाना खाया। यहां तक तो ठीक था लेकिन वह जैसे ही घर पहुंची, उसे बॉडी पेन के साथ हल्का बुखार आने लगा। परिवार वाले अभी इसी ऊहापोह में थे कि बच्ची को ठंड लगी होगी या थकावट होगी कि उसे खून की उल्टियां होने लगीं। सभी घबरा गए और आनन-फानन में उसे अस्पताल लेकर गए। तब तक बच्ची की हालत काफी बिगड़ चुकी थी। डॉक्टर ने जांच में पाया कि उसके ब्रेन में कई जगह सूजन है और वह लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण का शिकार हो चुकी है। डॉक्टर ने बताया कि यह संक्रमण बाहर की चीजें खाने से हुआ है। लिहाजा बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया गया। 15 दिन बाद हालत में सुधार हुई तो उसे जनरल वॉर्ड में शिफ्ट किया गया। बच्ची के परिजनों ने बताया कि पिकनिक पर वे खाना अपने साथ लेकर गए थे। वहां उनकी बेटी ने का एक कैन लिया था। कैन को बिना साफ किए ही पिया उसके कुछ दिन बाद से ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी।किस वजह से होता है संक्रमणएकॉर्ड हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट संदीप घोष ने बताया कि हमने जब बच्ची का एमआरआई किया तो सामने आया कि उसके ब्रेन में कई जगह सूजन है। इसकी वजह जानने के लिए जांच कराई तो का पता लगा। एकॉर्ड अस्पताल के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट चेयरमैन डॉ. रोहित गुप्ता ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो जानवरों के मूत्र और मल के जरिये फैलता है। यह मिट्टी, पानी और साग-सब्जी को दूषित करता है। इस इंफेक्शन के लिए जिम्मेदार बैक्टीरिया को लेप्टोस्पाइरा कहा जाता है। यह इंफेक्शन चूहों, कुत्तों, घोड़ों, सूअरों या गायों सहित लावारिस या घरेलू जानवरों के जरिए फैल सकता है। हो सकता है कि इस बच्ची ने भी कुछ ऐसा खाया या पी लिया हो।कोरोना से ज्यादा खतरनाकएकॉर्ड हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मेघा ने बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस बैक्टीरिया कोरोना वायरस से भी खतरनाक है। कोरोना की चपेट में आने वालों की मृत्यु दर एक से डेढ़ फीसदी है, जबकि लेप्टोस्पायरोसिस की तीन से 10 फीसदी है। यह संक्रमण चूहे की वजह से फैलता है। चूहे ने कहीं टॉइलट किया है और उस जगह के संपर्क में आपकी कटी स्किन आ गई तो लेप्टोस्पायरोसिस होने की आशंका रहती है। यह बैक्टीरिया छह महीने तक पानी में जीवित रह सकता है। जुलाई से अक्टूबर के बीच इसका इंफेक्शन ज्यादा होता है। अगर संक्रमण गंभीर हो जाता है तो शरीर के कई हिस्सों पर बुरा असर पड़ सकता है। जैसे किडनी या लिवर का फेल हो जाना, हार्ट फेल, दिमाग में सूजन आना और रेस्पिरेटरी फेल्योर।क्या हैं लक्षणइसके लक्षणों में बुखार, शरीर, पीठ और पैरों में तेज दर्द, आंख में लाली, पेट में दर्द, खांसी, खांसी के साथ खून आना, सर्दी के साथ बुखार (जो 104 डिग्री से अधिक हो सकता है) और शरीर में लाल चकत्ते शामिल हैं। लक्षण दिखने पर मरीज का ब्लड टेस्ट किया जाता है। कम समय में बीमारी का पता लगाने के लिए एलाइजा टेस्ट किया जाता है।इन इन्फेक्शन से खुद को कैसे बचाएं-जिस तालाब में जानवर जाते हैं, वहां नहाने से बचें-चूहे घर में हैं तो सावधानी बरतें-बाहर से लाए गए प्लास्टिक के पैकेट को साफ करके इस्तेमाल करें-मॉनसून के दौरान स्विमिंग, वॉटर स्कीइंग, सीलिंग से बचें-घर के पालतू जानवरों की साफ-सफाई पर भी ध्यान दें