केके पाठक की कमेटी का फैसला मंजूर नहीं, सक्षमता परीक्षा पर आर-पार के मूड में नियोजित शिक्षक, जानें पूरी बात

पटना: सक्षमता परीक्षा () पर केके पाठक (KK Pathak IAS)की अध्यक्षता वाली कमेटी का फैसला आने के बाद नियोजित शिक्षकों में आक्रोश है। शिक्षक संगठन भी नाराज हैं। पटना में सभी शिक्षक संघों की बैठक हो रही है। जिसमें बड़ा फैसला लिया जाएगा। केके पाठक की अध्यक्षता में गठित कमेटी की पहली बैठक में फैसला लिया गया कि तीन बार परीक्षा में असफल रहने वाले शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी जाएगी। इस फैसले से शिक्षकों में आक्रोश है। नियोजित शिक्षक बिहार सरकार और शिक्षा विभाग के व्यवहार से कितने आहत हैं। ये हम आपको बताएंगे। हम आपको ये भी बताएंगे कि शिक्षकों के मन में क्या चल रहा है। हम इस पर ही चर्चा करेंगे कि शिक्षक सक्षमता परीक्षा के बहिष्कार () को लेकर क्या सोंच रहे हैं। उससे पहले आपको शिक्षक नियोजन और सेवा शर्त मार्गदर्शिका-2006 में वर्णित कुछ बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं। आपको बताना चाहते हैं कि सरकार पहले नियोजित शिक्षकों से क्या कह चुकी है। 60 साल में सेवानिवृत्ति की उम्र शिक्षक नियोजन और सेवा शर्त मार्गदर्शिका में स्पष्ट लिखा गया है कि सेवानिवृत्ति की उम्र क्या होगी। इसमें बताया गया है कि नियोजित शिक्षक एवं अनुदेशक 60 (साठ) वर्ष की आयु पूर्ण होने की तिथि को सेवानिवृत्त होंगे। उसके अलावा ट्रेनिंग को लेकर भी बातें स्पष्ट लिखी गई हैं। जिसमें राज्य सरकार द्वारा अप्रशिक्षित शिक्षकों को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (N.C.T.E.) द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी। सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कस वाले शिक्षकों को परीक्षाफल प्रकाशन की तिथि से प्रशिक्षित शिक्षक का नियत वेतन देय होगा। उसके अलावा- नियुक्ति के समय मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षणरत अभ्यर्थियों का नियोजन इकाई के द्वारा प्रशिक्षण पूर्ण करने हेतु अवैतनिक अनुमति दी जाएगी। साथ हो ऐसो अनुपस्थित अवधि को सेवाकाल में टूट नहीं मानी जाएगी। मार्गदर्शिका में स्थानांतरण को लेकर भी स्पष्ट लिखा हुआ है। सामान्यतः पंचायत एवं प्रखंड प्रारंभिक शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जायेगा। उन्हें अपनी सेवा काल में तीन वर्षों के बाद अपने नियोजन इकाई में हो अधिकतम दो स्थानान्तरण लेने को सुविधा होगी।शिक्षक सेवा शर्त नियमावली आगे मार्गदर्शिका में ये कहा गया है कि शिक्षकों को दो स्थानान्तरण के बीच कम-से-कम 5 वर्षों का अन्तराल आवश्यक होगा। स्थानान्तरण अपनी ही शिक्षक को श्रेणी (ग्रेड) में किया जा सकेगा। अनुदेशकों को यह सुविधा देय नहीं होगी। यदि किसी विद्यालय के एक रिक्त पद हेतु एक से अधिक स्थानान्तरण के आवेदन प्राप्त होते हैं, तो सेवा अवधि के आधार पर वरीयतम शिक्षक को प्राथमिकता दी जायेगी। स्थानान्तरण का प्रस्ताव सदस्य सचिव के द्वारा तैयार किया जायेगा तथा नियोजन समिति के अध्यक्ष के अनुमोदन के बाद स्थानांतरण आदेश सदस्य सचिव के हस्ताक्षर से निर्गत किया जाएगा। तो ये स्पष्ट निर्देश शिक्षक नियोजन और सेवा शर्त मार्गदर्शिका में दी गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए एक मामूली परीक्षा ली जाएगी। दूसरी ओर परीक्षा मामूली नहीं ली जा रही है। वो परीक्षा बीपीएससी स्तर से भी ऊपर की लग रही है। शिक्षकों का कहना है कि जब ऐसा ही कुछ करना था, तो ये नाटक क्यों। कई शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें नौकरी से निकालने की साजिश रची जा रही है।शिक्षकों की अपनी मांग शिक्षकों ने बताया कि प्रावधान ये होना चाहिए कि उन्हें राज्य कर्मी बनना हो वे शिक्षक परीक्षा में शामिल हो, अन्यथा पूर्व की भांति सेवा बने रह सकते है। केके पाठक की ओर से गठित समिति को ये सोचना चाहिए कि 2003 से ही सेवा दे रहे शिक्षकों को एक परीक्षा के आधार पर आप कैसे हटा सकते हैं। शिक्षकों ने कहा कि स्थानांतरण में तीन जिला का ऑप्शन हटाया जाए। ऐच्छिक स्थानांतरण को लागू किया जाए। उसके अलावा सीबीटी (कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट) को हटाकर ऑनलाइन तरीके से परीक्षा ली जाए। नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म किया जाए। परीक्षा लिये जाने से पहले नियोजित शिक्षक-शिक्षिकाओं के वेतन संरचना को सार्वजनिक किया जाए। उपरोक्त बातें शिक्षकों ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि परीक्षा का विस्तृत सिलेबस उपलब्ध कराया जाए। परीक्षा की तिथि को इंटर और मैट्रिक की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन समाप्त होने के महीने भर बाद निर्धारित किया जाए। परीक्षा के लिए 1100 रुपये शुल्क को हटाकर उसे बिल्कुल निःशुल्क किया जाए।एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत नियोजित शिक्षकों ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में बताया कि सक्षमता निकालने के बाद क्या गारंटी है कि फिर कोई परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी। जब दक्षता परीक्षा ली गई तब ये कहा गया कि सभी लोग पढ़ने में दक्ष हैं। सारे शिक्षक निश्चिंत हो गए कि अब उन्हें कोई परीक्षा नहीं देनी होगी। लेकिन पुनः सक्षमता और आगे फिर कही कोई परीक्षा आयोजित न हो इसकी क्या गारंटी है। नियोजित शिक्षकों ने ये भी कहा कि किसी भी विभाग में अगर प्रमोशन या वेतन वृद्धि के लिए परीक्षा होती है तो उसमें फेल होने पर क्या बर्खास्तगी होती है? इसका जवाब कौन देगा। ये कौन लोग हैं, जो शिक्षकों की सेवा समाप्ति की बात कर रहे हैं। ऐसा बिल्कुल भी नहीं चलेगा। शिक्षकों ने कहा कि नियमावली 2006 के तहत 60 साल के लिए सभी नियोजित शिक्षकों का नियोजन किया गया है। अगर शिक्षक परीक्षा देना नहीं चाहता है तो भी उसे हटाने का पावर किसी को नहीं होना चाहिए। इस मामले को लेकर वे हाईकोर्ट तक जा सकते हैं।आर-पार के मूड में शिक्षक शिक्षकों ने कहा कि केके पाठक के आने के बाद उनके साथ भी कई तरह की ज्यादती हो रही है। उनसे समान काम और समान वेतन की बात छीन ली गई। उनकी छुट्टी काट दी गई। कार्य अवधि को जबरदस्ती बढ़ा दिया गया। बोलने और लिखने से रोक दिया गया। शिक्षकों के सारे लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन लिया गया। बात-बात पर वेतन रोक दिया जाता है। पहले भी कई परीक्षा देने के बाद भी हमारी परीक्षा ली जा रही है। अब हमें जबरन दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि नियोजित शिक्षकों की नौकरी समाप्त करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। बस सरकार से अनुमोदन मिलने की देरी है। शिक्षकों ने पूरी तरह प्लान बना लिया है कि वे सक्षमता परीक्षा का बॉयकॉट करेंगे। शिक्षकों ने ऐसी परीक्षा देने से खुद को अलग करने की प्लानिंग तैयार कर ली है। केके पाठक की कमेटी का फैसला आने के बाद से शिक्षकों में आक्रोश है। उनका कहना है कि ये बिल्कुल भी मानवीय नहीं है। नियोजित शिक्षक अपनी 17 से लेकर 23 साल तक सेवा दे चुके हैं। उसके बाद उनके साथ ऐसा किया जा रहा है। ये बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियोजित शिक्षक आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हो गए हैं। शिक्षा विभाग उनकी बातों को नहीं सुनता है, तो वे सक्षमता परीक्षा नहीं देंगे।