उधार के विमानों से बना दी देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, आज दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में है नाम

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी विमान कंपनी इंडिगो (Indigo) को आजकल कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना कर रही है। दिल्ली एयरपोर्ट पर एयरलाइन के एक पायलट के साथ मारपीट हुई और फिर मुंबई एयरपोर्ट पर कुछ यात्रियों के विमान के बगल में बैठकर खाना खाने का वीडियो भी सामने आया है। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन (BCAS) ने मुंबई वाले मामले में नियमों का उल्लंघन करने और यात्रियों को सुविधाएं नहीं देने पर इंडिगो से जवाब मांगा है। कुछ दिन पहले एक महिला पैसेंजर ने इंडिगो के विमान में परोसे गए सैंडविच में कीड़ा होने की शिकायत की थी। इस मामले में FSSAI ने कंपनी को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। भारत में एयरलाइन सेक्टर का इतिहास बड़ा खराब रहा है। सुब्रत सहारा, विजय माल्या और नरेश गोयल जैसे कई दिग्गज इसमें हाथ जला चुके हैं। स्पाइसजेट (Spicejet) भी मुश्किलों में घिरी है और गो फर्स्ट (GoFirst) का ऑपरेशन बंद है। क्या इंडिगो इन मुश्किलों से निकल पाएगी? एक नजर इंडिगो के अब तक के सफर पर…इंडिगो की शुरुआत साल 2006 में राहुल भाटिया ने राकेश गंगवाल के साथ मिलकर की थी। आज यह देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। भारतीय बाजार में इसकी हिस्सेदारी करीब 52 फीसदी है। राहुल भाटिया दिल्ली के रहने वाले हैं जबकि उनके दोस्त राकेश गंगवाल अमेरिका में रहते हैं। गंगवाल कई बड़ी एयरवेज कंपनियों में काम कर चुके थे और उन्हें इस सेक्टर का काफी अच्छा नॉलेज था। भाटिया ने ही गंगवाल के सामने एयरलाइन शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। इस तरह इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन की शुरुआत 2004 में हुई। उस समय देश की एविएशन इंडस्ट्री भारी नुकसान से जूझ रही थी। इसके बावजूद दोनों ने इस सेक्टर में उतरने की ठानी। कैसे हुई शुरुआतसाल 2004 में ही उन्हें एयरलाइन शुरू करने का लाइसेंस भी मिल गया। लेकिन कंपनी 2006 तक अपनी सेवाए शुरू नहीं पाई क्योंकि उसके पास विमान नहीं थे। गंगवाल ने अपनी जान-पहचान के चलते कंपनी को एयरबस से उधारी पर 100 विमान दिलाए। आखिरकार चार अगस्त 2006 से कंपनी ने अपनी उड़ान शुरू की। जब इंडिगो ने अपना सफर शुरू किया तो एविएशन इंडस्ट्री मुश्किल दौर से गुजर रही थी। कई दिग्गज एयरलाइन के बीच अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। ऐसे में कंपनी ने सबसे पहले कंपनी ने उन लोगों को अपना कस्टमर बेस बनाया जो हवाई सफर तो करना चाहते थे लेकिन उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। इससे इंडिगो के अधिक से अधिक टिकट बिके और उसे नुकसान न के बराबर हुआ।कंपनी ने देश के प्रमुख शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने का काम किया और कम कीमत पर लोगों को हवाई यात्रा देने का सपना पूरा किया। इंडिगो के जरिए ही हवाई चप्पल पहने लोगों का भी प्लेन में बैठने का सपना पूरा हुआ। हवाई जहाज में घूमना एक मिडिल क्लास परिवार के लिए केवल सपना होता है। इंडिगो ने उनके इस सपने को पूरा किया। अभी कंपनी के पास 341 विमान हैं और वह रोजाना 1300 से ज्यादा फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। इंडिगो में करीब 25,000 लोग काम करते हैं। दुनिया भर के 60 शहरों में इसके 126 ऑफिस हैं। पिछले साल इंडिगो ने एयरबस को 500 विमानों का ऑर्डर दिया जो एविएशन इतिहास का सबसे बड़ा ऑर्डर है। इससे पहले भी कंपनी ने 480 विमानों का ऑर्डर दिया है। इस तरह अगले दशक तक उसे कुल करीब 1000 विमान मिलेंगे। दोनों फाउंडर्स के बीच विवादसाल 2020 में राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया के बीच विवाद पैदा हो गया था। गंगवाल ने कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के नियमों में बदलाव की मांग की थी। गंगवाल ने फरवरी 2022 में कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। गंगवाल का परिवार कंपनी में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की कोशिशों में लगा है। गंगवाल और उनकी पत्नी शोभा गंगवाल की इंटरग्लोब एविएशन में क्रमशः 13.23 फीसदी और 2.99 फीसदी हिस्सेदारी है। साथ ही उनके ट्रस्ट Chinkerpoo Family Trust की भी कंपनी में 13.5 फीसदी हिस्सेदारी है। राहुल भाटिया की इंटरग्लोब एविएशन में 38 फीसदी हिस्सेदारी है। ब्लूमबर्ग बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक उनकी नेटवर्थ 6.57 अरब डॉलर है।इंडिगो ने ऐसे समय देश के एविएशन सेक्टर में सफलता पाई जबकि कई दिग्गज कंपनियां धराशायी हो गई थीं। शराब कारोबारी विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलाइन शुरू की थी जो 2012 में दिवालिया हो गई। सहारा ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय ने भी एयरलाइन सेक्टर में कदम रखा था। उन्होंने एयर सहारा शुरू की थी। लेकिन कई साल तक नुकसान झेलने के बाद उन्होंने साल 2007 में इसे नरेश गोयल की जेट एयरवेज को बेच दिया। जेट एयरवेज ने भी 2019 में दम तोड़ दिया। स्पाइसजेट भी मुश्किलों में घिरी है जबकि गो फर्स्ट की उड़ानें फिलहाल बंद हैं। सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया की टाटा ग्रुप में घर वापसी हो चुकी है। लेकिन अब इंडिगो को भी मुश्किल हालात से जूझना पड़ रहा है।