आदिवासी बच्ची को दिया ईसाई नाम, चर्च सभा में जाने से पिता ने किया इनकार; तोड़ दिया हाथ

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन में धर्मांतरण का मामला सामने आया है. जिले की सुल्तानपुर तहसील (Sultanpur)में एक आदिवासी बच्ची ने आरोप लगाया है कि गांव के क्रिस्चन पास्टर (पादरी) ने उसका हिंदू नाम व पहचान बदल कर ईसाई नाम दे दिया. वहीं बच्ची के परिजनों के मुताबिक, जब उन लोगों ने चर्च सभा में जाने से मना किया तो पिता को पीटा गया. उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया है.
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने मामले पर संज्ञान लिया है और बच्ची से घटना के बारे में जानकारी ली है. पुलिस ने पीड़ित परिवार का बयान लिया है और घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

मध्यप्रदेश के रायसेन ज़िले की सुल्तानपुर तहसील में प्रवास के दौरान एक आदिवासी बच्ची ने बताया कि गाँव के क्रिस्चन पास्टर ने उसका हिंदू नाम व पहचान बदल कर ईसाई नाम दे दिया उसके माता पिता व भाई ने बताया कि जब उन लोगों ने चर्च सभा में जाने से मना किया तो पिता को पीटा गया
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) January 7, 2023

बच्ची के परिजनों ने लगाए आरोप
वहीं, एक एक दूसरे मामले में एक अन्य आदिवासी व्यक्ति ने बताया था कि उसके भाई की बच्ची को गांव के ही व्यक्ति ने धर्मांतरण व यौन दुराचार के उद्देश्य से अगवा कर लिया है तथा वो पुलिस कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हैं. इस पर प्रियंका कानूनगो ने कहा है कि मैंने पुलिस अधिकारियों से लगातार सम्पर्क किया. पता चला है कि बालिका बरामद कर ली गई है. इस मामले में फ़र्ज़ी जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने की जानकारी भी लगी है. आरोपी की गिरफ़्तारी व शेष कार्यवाही जारी है. दोनों मामले मेरी निगरानी में हैं.
हिंदू संगठनों ने जताया था विरोध
बता दें कि हाल के महीनों में मध्य प्रदेश में धर्मांतरण के कई मामले सामने आए हैं. नवंबर में प्रदेश की राजधानी भोपाल में धर्मांतरण का मामला सामने आया था. मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने जमकर हंगामा किया था. बजरंग दल और संस्कृति बचाओ मंच सहित कई हिंदू संगठनों ने दावा किया था कि हिंदुओं को जीसस की प्रार्थना कराते कई लोगों को रंगे हाथ पकड़ा गया. आरोप था कि ईसाई संस्थाओं से जुड़े लोग शिव नगर क्षेत्र में रहने वाले हिंदुओं को जबरन ईसाई बना रहे थे. हिंदू संगठनों का कहना था कि उन्होंने मिशनरियों से जुड़े लोगों को रंगे हाथों पकड़ा था, वो हिंदुओं को यीशु की प्रार्थना करने के लिए लगातार मजबूर कर रहे थे.