ओडिशा के बेरहामपुर में कबाड़ से बनाई गई 105 KG वजनी महात्मा गांधी की प्रतिमा, जानें खासियत

उड़ीशा के बेरहामपुर में कबाड़ से महात्मा गांधी की छह फीट ऊंची प्रतिमा बनाई गई है. खास बात यह है कि कबाड़ से बनाई गई महात्मा गांधी की छह फीट ऊंची प्रतिमा रविवार को यहां के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के परिसर में स्थापित की गई. प्रतिमा का वजन करीब 105 किलोग्राम है और गांधी जयंती के अवसर पर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि के तौर पर स्थापित की गई.
संस्थान के प्रधानाचार्य रजत कुमार पाणिग्रही ने बताया कि प्रतिमा को 1600 बिजली के पंखों की बेयरिंग, कार सीट बेल्ट और लोहे की छड़ सहित विभिन्न कबाड़ वस्तुओं से बनाया गया है. उन्होंने बताया कि फिटर और वेल्डर इकाई के 30 विद्यार्थियों और कुछ शिक्षकों ने मिलकर करीब 30 दिनों में यह प्रतिमा बनाई है. उन्होंने बताया कि प्रतिमा के शरीर और परिधान को पंखे के बेयरिंग से बनाया गया है, जूतों को सीट बेल्ट से और चश्मा लोहे की छड़ से बनाया गया है. पाणिग्रही ने बताया, हमारे विद्यार्थियों ने कबाड़ की वस्तु विद्युत कार्यशाला और ऑटोमोबाइल गैराज से प्राप्त की. इन प्रतिष्ठानों के मालिकों ने ये वस्तुएं दान में दीं.
यह हम लोगों के लिए खुशी की बात है
बता दें कि आज महात्मा गांधी की 153वीं जयंती है. ऐसे में भारत सहित पूरे विश्व में राष्ट्रपिता को याद किया गया. प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी की सामाधि के ऊपर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धाजलि दी. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि बापू भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंतन के स्रोत हैं. उनके पदचिह्नों पर चलने से लोगों को शक्ति और शांति मिलती है. उन्होंने कहा कि यह गांधी जयंती हम सभी के लिए बहुत ही खास है, क्यों पूरा देश अभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. यह हम लोगों के लिए खुशी की बात है कि हम सभी हमेशा बापू के आदर्शों पर खरे उतरे हैं.
पदचिह्नों पर चल नहीं पाएंगे
वहीं, राहुल गांधी ने महात्मा गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर राहुल गांधी ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग महात्मा गांधी की विरासत को हथियाना की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए कि वे विरासत को हथिया तो सकते हैं, पर पदचिह्नों पर चल नहीं पाएंगे. राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक खादी ग्रामोद्योग केंद्र का दौरा करने के बाद ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाली विचारधारा ने पिछले आठ वर्षों में असमानता, विभाजन और कड़ी मेहनत से हासिल की गई आजादी का क्षरण किया है.