फफककर रो पड़े सोमाभाई, मां को अंतिम प्रणाम करते पीएम मोदी ने बड़े भाई को संभाला

अहमदाबाद: गांधीनगर के सेक्टर 30 स्थित श्मशान गृह में पीएम () की मां हीराबा (Hiraba) अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर हीराबा के चारों बेटे सोमाभाई मोदी, प्रहलाद मोदी, नरेंद्र मोदी और पंकज मोदी समेत परिवार के सभी करीबी सदस्य मौजूद रहे। हीराबा के अंतिम संस्कार के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां भावुक दिखे और उनकी आंखें नम थीं। तो वहीं उनके बड़े भाई मां के अंतिम संस्कार के मौके पर फफककर रो पड़े, पास में खड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सांत्वना दी। सोमाभाई मोदी (Somabhai Modi) अपने परिवार के साथ अहमदाबाद के रानिप में रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े भाई सोमाभाई मोदी, छोटे बेटे पंकज मोदी लगातार कई दिनों से यूएन मेहता अस्पताल में मौजूद थे।

ओल्ड एज होम चलाते हैं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के सबसे बड़े भाई का नाम सोमभाई मोदी है। सोमभाई (Somabhai Modi) स्वास्थ्य विभाग में काम करते थे। वे कई साल पहले सेवानिवृत हो चुके हैं। सोमभाई अहमदाबाद में एक ओल्ड एज होम चलाते हैं। सोमभाई काफी लो प्रोफाइल रहते हैं। वे पीएम मोदी से अपने संबंधों को सबसे सामने नहीं बताते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुजरात चुनावों के दौरान बड़े भाई से जाकर मुलाकात की थी। इसके बाद मीडिया से बातचीत में सोमभाई मोदी भावुक हो गए थे। यह पूछे जाने पर कि पीएम मोदी से मुलाकात में उन्होंने क्या कहा? सोमाभाई मोदी (Somabhai Modi) कहा था कि उन्होंने पीएम मोदी को खुद का ख्याल रखने के लिए कहा था।

परिवार की स्तंभ थीं हीराबा
प्रधानमंत्री के पिता दामोदरदास मोदी का 1989 में निधन हो गया था। उसके बाद से हीराबा पूरे परिवार के लिए एक स्तंभ थीं। उन्होंने पूरे परिवार को संभाला। परिवार में सबसे बड़े सोमभाई मोदी (Somabhai Modi) हो या फिर दूसरे भाई सभी के लिए हीराबा ही भावनात्मक तौर एकमात्र ऊर्जा का केंद्र थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की बात करें तो उन्होंने हर एक बड़े मौके पर मां हीराबा (Hiraba) का आशीर्वाद लिया और इसके बाद उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आगे निकले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या फिर उनके दूसरे बेटे हीराबा ने सभी को राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रभावना और ईमानदारी के लिए सदैव प्रेरित किया। हीराबा का जन्म पालनपुर में हुआ। इसके बाद वे विसनगर में बढ़ी हुई और आगे का जीवन उन्होंने वडनगर में बिताया, फिर वे अहमदाबाद और बाद में गांधीनगर में रहीं।