माथे पर कोई शिकन नहीं, किए पर न कोई पछतावा, पॉलिग्राफ टेस्ट के बाद ऐसे दिखा श्रद्धा का हत्यारा आफताब

नई दिल्ली: श्रद्धा वालकर की जघन्य हत्या करने वाले के चेहरे पर अफसोस की एक शिकन नहीं दिख रही है। वह ऐसे फुल कॉन्फिडेंस में दिख रहा था जैसे कितना महान काम करके आया हो। ऐसा हम नहीं मंगलवार रात पॉलिग्राफ टेस्ट के बाद सामने आया वीडियो बता रहा है। दिल्ली के रोहणी स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से बाहर निकला आफताब एक अधिकारी से बात करता हुआ दिख रहा था। उस समय उसके बॉडी लैंग्वेज से साफ पता चल रहा था जैसे उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। वहीं इस केस में कोर्ट ने आफताब की पुलिस रिमांड को 5 दिन के लिए बढ़ा दिया है।

क्या है पॉलीग्राफ टेस्ट ?
पॉलीग्राफ टेस्ट को लाइव डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। इसमें खास किस्म की मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। टेस्ट करने वाले शख्स के ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट और पल्स रेट की जांच की जाती है। यदि पूछे जा रहे सवाल के दौरान गतिविधि बदलती है, तो झूठ बोलने का पता चलता है।

केस की सीबीआई जांच से कोर्ट का इनकार
श्रद्धा मर्डर केस की सीबीआई जांच की मांग को दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया। इस बारे में दाखिल जनहित याचिक को कोर्ट ने ‘प्रचार हित याचिका’ बताया और याचिकाकर्ता पर हर्जाना लगाते हुए इसे ठुकरा दिया। कोर्ट ने कहा कि मृतका के माता-पिता को पुलिस जांच से शिकायत नहीं है। आप कौन होते हैं। कोर्ट ने कहा कि वो कोई मॉनिटरिंग एजेंसी नहीं है जो पुलिस जांच की निगरानी करे। चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने कहा कि याचिका में एक भी सही आधार नहीं है। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील संजय लाओ ने कहा कि मामले में 80 फीसदी जांच पूरी हो गई है, सीनियर पुलिस अधिकारियों की टीम के साथ 200 पुलिसकर्मी जांच में लगे हुए हैं।

किस आधार पर मामले को ट्रांसफर करने की मांग कर रहे हैं?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील सवाल किया कि वह किस आधार पर मामले को ट्रांसफर करने की मांग कर रहे हैं और उन्हें मामले में यह मांग उठाने का क्या अधिकार है। बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील जोगिंदर तुली से कहा कि हमें एक ठोस वजह बताएं। पीड़िता के माता-पिता ने कोई शिकायत नहीं की है। आप अजनबी हैं। एक खास कारण से आपने यह याचिका दायर की है। जवाब में याचिकाकर्ता जोशिनी तुली के वकील ने कहा कि जिन जगहों से शव के टुकड़े बरामद हुए हैं, वहां मीडिया और लोगों की मौजूदगी की वजह से सबूतों से छेड़छाड़ हुई। इस पर बेंच ने कहा कि वह निगरानी एजेंसी नहीं है। अदालत पुलिस की ओर से की जा रही जांच की निगरानी नहीं करेगी।

‘पुलिस अपनी जांच कर रहे हैं, हम जांच की निगरानी नहीं करते’
कोर्ट ने उनसे कहा कि आप एक दर्शक हैं। पुलिस अपनी जांच कर रही है। हम जांच की निगरानी नहीं करते। हमें पुलिस की जांच पर संदेह क्यों करना चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर केंद्र का रुख पूछा। जवाब में अडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता सकती कि जांच कैसे की जाए या कैसे की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उन्हें यकीन है कि अगर पुलिस को इस तरीके से जांच करने दी गई तो मामले में दोषी बरी हो जाएगा। इस पर बेंच ने उनसे सवाल किया कि आप जज हैं? याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच के हर कदम पर मीडिया को हर जानकारी बताई, जिसकी इजाजत कानून में नहीं है।

पुलिस कमिश्नर ने किया रिव्यू
दूसरी ओर, इस मामले में पहली बार दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा मंगलवार दोपहर बाद हौज खास स्थित साउथ दिल्ली के डीसीपी ऑफिस पहुंचे। जहां उन्होंने इस केस से संबंधित रिव्यू किया। इसके अलावा जिले में होने वाले अन्य क्राइम के बारे में भी जानकारी ली। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस लगातार छतरपुर इलाके में स्थित तालाब की तलहटी और जंगलों में सबूत तलाशने के लिए खाक छान रही है। पुलिस तालाब से पानी निकालने का प्रयास कर रही है। लेकिन तालाब में पानी बहुत अधिक भरा हुआ है।

पुलिस का कहना है कि वह तालाब की तलहटी में छिपे सबूतों को तलाशने के लिए गोताखोरों को भी उतारने की सोच रही है। लेकिन तालाब का पानी इतना गंदा है कि गोताखोर शायद ही ज्यादा मदद कर पाएंगे। आफताब ने तालाब का स्कैच बनाकर बताया है कि उसने श्रद्धा का काटा गया सिर और अन्य हिस्से इसी तालाब में फेंके थे। पुलिस गुरुग्राम और महरौली के जंगलों में भी लगातार सबूत तलाश रही है। अभी तक जहां-जहां से भी पुलिस को हड्डियों और अन्य चीज के नमूने मिले हैं, उन सभी नमूनों को उसने सीबीआई की सीएफएसएल को सौंप दिए हैं। जहां इनका श्रद्धा के पिता और भाई के नमूनों से डीएनए मैचिंग शुरू कर दिया गया है।

आफताब के घर के बाथरूम और किचन की टाइलों को तोड़कर जुडाए सबूत
पुलिस की एक टीम ने छतरपुर इलाके में किराए पर लिए आफताब के घर की भी जांच की थी, जिसमें सीएफएसएल टीम ने घर के बाथरूम और किचन की टाइलों को तोड़कर वहां से कुछ सैंपल उठाए। इन्हें खून के नमूने बताया जा रहा है। बताया जाता है कि पुलिस को एक जबड़ा भी मिला है। जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि क्या यह श्रद्धा का है। मंगलवार को पुलिस को आफताब की चार दिन की रिमांड और मिल गई है। इसके बाद 14 दिन पूरे होने पर आरोपी को जेल भेजना होगा। इस दौरान पुलिस को तमाम सबूत जुटाने का हरसंभव प्रयास करना होगा। वरना, बाद में आरोपी को जमानत मिलने का भी मजबूत आधार मिल सकता है।