वो सफेद चेहरे के पीछे छिपा रही थी ‘काला क्राइम’… ‘व्हाइट विडो’ ने क्यों 29 लोगों को मौत के घाट उतार दिया?

गोरा चिट्टा चेहरा, होठों पर मुस्कान और एक मासूमियत जिसको देखकर पुलिस भी धोखा खा गई। अगर पुलिस ने ये धोखा न खाया होता तो शायद कई जानें बच गई होतीं, लेकिन वो थी ही इतनी शातिर कि अपने सारे काले कारनामों को बड़ी आसानी से खूबसूरत चेहरे के पीछे ढक लिया। बड़े-बड़े अपराधियों से उनके अपराध उगलवाने वाली ब्रिटेन की पुलिस इस महिला के घर से वापस लौट गई। वो भी तब जब कि ये पहले ही 26 लोगों को दे चुकी थी खौफनाक मौत। कहानी व्हाइट विडो के काले कारनामों कीउसका नाम समांथा ल्यूथवेट था। कॉलेज से ही वो बेहद खूबसूरत थी। नॉर्थ आयरलैंड में पैदा हुई और इग्लैंड में पली-बढ़ी। थोड़ी बड़ी हुई तो माता-पिता का तलाक हो गया। उस वक्त समांथा कॉलेज में थी। ये बात है साल 2005 की। इराक में लड़ाई चल रही थी। पूरे देश में लड़ाई के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे और समांथा भी इन्हीं विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने लगी। इन्हीं प्रोटेस्ट के दौरान उसकी मुलाकात जर्मेन लिंडसे नाम के एक लड़के से हुई। जर्मेन ब्रिटेन का अश्वेत नागरिक था और वो इरान पर हुए हमले का विरोध कर रहा था। समांथा ने इस्लाम धर्म किया था कबूलजर्मेन ने इस्लाम धर्म अपना लिया था। समांथा को भी शुरू से ही इस्लाम धर्म को पसंद करती थी और फिर जर्मेन के साथ वो भी इस्लामिक धर्म को मानने लगी। जर्मेन के अंदर ब्रिटेन और अमेरिका को लेकर काफी नाराजगी थी। उसने सोमालिया के एक आतंकी संगठन अल शबाब में शामिल होने का फैसला किया। इसी साल इस आतंकी सगंठन ने लंदन की एक ट्रेन में आत्मघाती हमला किया। इस हमले में समांथा के पति जर्मेन की मौत हो गई। दरअसल जर्मेन उन आत्मघाती हमलावरों में शामिल था जिन्होंने लंदन को टारगेट किया था। लंदन में ट्रेन पर आत्मघाती हमले में 26 लोग मारे गएयहां एक अंडरग्राउंड ट्रेन और एक बस को निशाना बनाया गया था। इस हमले में ब्रिटेन के 26 लोगों की मौत हो गई। जांच शुरू हुई। जर्मेन का नाम जुड़ा जांच समांथा तक भी पहुंची। यहां तक कि खबरे सामने आई कि हमालावरों के दस्ते को बुर्का पहने एक महिला ही लीड कर रही थी। महिला की कमान पर ही ट्रेन में हमले हुए थे। वो महिला अरबी भाषा में आत्मघाती हमलावरों को इंस्ट्रक्शन दे रही थी। पुलिस जांच के लिए समांथा के घर तक पहुंची, लेकिन समांथा ने इस हमले की कोई भी जानकारी होने साफ इनकार कर दिया। पुलिस के पास कोई ठोस सबूत भी नहीं थे। समांथा को गिरफ्तार नहीं किया गया। समांथा ने करवाया था लंदन ट्रेन हमलाइसके बाद समांथा केन्या फरार हो गई। केन्या में रहकर वो आतंकी संगठनों के साथ मिलकर दहशत फैलाने लगी। ब्रिटेन से लेकर अफ्रीकी देशों तक वो व्हाइट विडो के नाम से मशहूर हो गई। दरअसल ट्रेन में 26 लोगों के कत्ल की साजिश इसी व्हाइट विडो ने रची थी। समांथा ही वो महिला थी जो बुर्का पहनकर हमालावरों के दस्ते को लीड कर रही थी, लेकिन अपने मासूम चेहरे की वजह से पुलिस से बचने में कामयाब हो गई थी। ये एक बड़ी चूक थी। समांथा और उसके संगठन के लोग दिन ब दिन खतरनाक होते जा रहे थे। वो अलग-अलग नामों से आतंकवाद फैला रही थी। फर्जी पासपोर्ट, फर्जी फोन नंबर्स और फर्जी नाम होने की वजह से पुलिस भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पा रही थी। 2012 में मोम्बासा में भी व्हाइट विडो ने करवाया हमलासाल 2012 में केन्या मोम्बासा में एक आतंकी हमला हुआ। इस हमले में फुटबॉल फैन्स को निशाना बनाया गया। इस हमले में 3 लोगों की मौत हो गई जबकि कई घायल हो गए। ये हमला भी इसी व्हाइट विडो ने करवाया था। इस हमले के बाद समांथा के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ, लेकिन वो कभी भी गिरफ्तार नहीं हो पाई। इसके बाद भी कई आतंकी संगठनों के साथ समांथा के रिश्ते सामने आए, लेकिन वो अब तक पकड़ नहीं आ पाई। हालांकि साल 2014 में एक समांथा के मारे जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन किसी भी एजेंसी ने इस खबर को कनफर्म नहीं किया। माना जाता है कि ये व्हाइट विडो आज भी सोमालिया में छुप कर रह रही है और कट्टर इस्लामिक संगठनों के साथ इसके रिश्ते हैं। व्हाइट विडो के नाम से नेटफिलिक्स में आई थी डॉक्यूमेंट्रीद व्हाइट विडो के नाम से नेटफिलिक्स पर एक डॉक्यूमेंटरी भी आई थी। इस फिल्म में समांथा के बारे में काफी कुछ बताया गया था। दरअसल मीडिया ने ही समांथा को उसके सफेद रंग की वजह से व्हाइट विडो का नाम दिया था। ब्रिटेन और अफ्रीकी मीडिया में अक्सर व्हाइट विडो के दहशत की कहानियां छायी रहती हैं।