कभी सड़कों पर बेचती थीं अचार, आज 4 कंपनियों की हैं मालकिन, इस तरह बनाया करोड़ों का कारोबार

नई दिल्ली: अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो फिर उसके लिए कोई मुकाम हासिल करना मुश्किल नहीं है। कड़ी मेहनत के दम पर बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। लगन और काम करने का जज्बा हो तो वह बुलंदियों को छुआ जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है कृष्णा यादव ने। दिल्ली के नजफगढ़ की रहने वाली कृष्णा यादव ने एक छोटे से कमरे से अपने कारोबार की शुरुआत की थी। वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं। इसके बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है। कृष्‍णा यादव को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से 2015 में नारी शक्ति सम्मान के लिए चुना गया था। उन्होंने एक छोटे से कमरे में अचार बनाना का काम शुरू किया था और आज 100 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। आज उनका टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो चुका है। कृष्णा यादव को यह मुकाम आसानी से नहीं मिला है। इसके लिए उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। आर्थिक तंगी का किया सामना कृष्णा यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर की रहने वाली हैं। साल 1995-96 उनका परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था और उनके बेरोजगार पति गोवर्धन यादव मानसिक परेशानी के गुजर रहे थे। कृष्णा यादव की दृढ़ता और साहस ही था कि जिसने उनके परिवार को इस कठिन दौर से उबरने की ताकत दी। उन्होंने अपने एक मित्र से 500 रुपये उधार लिए और परिवार के साथ दिल्ली आने का फैसला किया। दिल्ली में उन्हें जब कोई काम नहीं मिला तो उसके पति गोवर्धन यादव और उसने थोड़ी सी जमीन बटाई पर लेकर पर सब्जी उगानी शुरू की। इस तरह हुई शुरुआत कृष्णा ने अपने खेत की सब्जी से शुरू में अचार बनाने का काम शुरू किया था। इसके लिए उन्होंने शुरुआत में सिर्फ तीन हजार रुपये का निवेश किया था। इससे कृष्णा ने सौ किलो करौंदे का और 5 किलो मिर्च का अचार तैयार किया था। इसे बेच कर उन्हें शुरुआत में 5 हजार रुपये से ज्यादा मुनाफा हुआ था। इसके बाद कृष्णा ने अपने इसी कारोबार को बढ़ाने का फैसला किया। अपनी मार्केटिंग खुदकृष्णा ने देखा कि वह जब अचार दूसरों के मार्फत बेचती हैं तो मुनाफे का बड़ा हिस्सा वह ले लेता है। इसलिए उन्होंने अपने अचार की मार्केटिंग खुद करने का फेसला किया। वह सड़क पर खुद अचार बेचने लगीं और इसकी मार्केटिंग भी करने लगीं। आज कृष्णा यादव का कारोबार फैल चुका है। उन्होंने ‘श्री कृष्णा पिकल्स’ नाम की एक कंपनी भी बना ली है, जिसकी मालकिन वही हैं। कुछ समय पहले तक उनका टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से भी ऊपर पहुंच चुका था। यह भी अजूबा ही है कि कृष्णा यादव खुद कभी स्कूल नहीं जा पाई, लेकिन आज उन्हें दिल्ली के स्कूलों में खास तौर पर बच्चों को लेक्चर देने के लिए बुलाया जाता है।