शरद पवार की अशुभ घड़ी, नए सिंबल और नाम के साथ कैसे चुनाव लड़ेंगे मराठा नेता?

बारामती : की 25 साल पुरानी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अब भतीजे के हाथों में चली गई है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद मराठा नेता के हाथ से पार्टी का चुनाव चिन्ह घड़ी भी छिन गई। नाम और घड़ी के साथ शरद पवार ने राज्य और केंद्र में अपनी धमक बनाए रखी थी। अब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस वरिष्ठ नेता पर नए नाम और नई पार्टी चिन्ह तलाशने का दबाव बन गया है। चुनाव आयोग ने नए नाम और सिंबल के लिए बुधवार तक की मोहलत दी है। जनता के बीच अचानक अपरिचित होने की आशंका से बचने के लिए शरद पवार अपनी नई पार्टी के नाम में राष्ट्रवादी और कांग्रेस शब्द रखेंगे। उनका नई पार्टी का चुनाव चिन्ह पहिया, उगता सूरज या ट्रैक्टर हो सकता है। 1999 में बनी एनसीपी मगर बड़े नेताओं ने छोड़ा साथमई 1999 में शरद पवार ने पी एन संगमा और तारिक अनवर जैसे कांग्रेस नेताओं के साथ नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी बनाई थी। दूसरे राज्यों में एनसीपी तो पैर नहीं पसार सकी, मगर महाराष्ट्र में शरद पवार ने पार्टी को काफी मजबूत कर लिया। 2012 में पी ए संगमा ने पार्टी छोड़ दी और तारिक अनवर भी 2018 में कांग्रेस में लौट गए। इसके बाद से शरद पवार ही एनसीपी के सर्वेसर्वा बन गए। 23 साल तक शरद पवार पार्टी को अपनी रणनीति के हिसाब तक चलाते रहे। जून 2023 में भूचाल आया और अजित पवार 41 विधायकों के साथ पार्टी तोड़ दी। वह महाराष्ट्र में बीजेपी के पार्टनर बन गए। चाचा-भतीजे की लड़ाई चुनाव आयोग तक पहुंची। निर्वाचन आयोग ने एनसीपी पार्टी और चुनाव चिन्ह घड़ी अजित पवार को सौंप दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले यह शरद पवार के लिए बड़ा झटका है। महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव गुट) और शरद पवार की पार्टी को नए सिंबल के साथ लोकसभा चुनाव में उतरना होगा। 27 फरवरी को महाराष्ट्र की छह सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव से पहले शरद पवार समर्थक 11 विधायकों को नई पार्टी और नए सिंबल का सहारा मिल जाएगा। संसद में भी सुप्रिया सुले समेत शरद समर्थक सांसदों को नई पार्टी की छतरी मिल जाएगी। सवाल यह है कि पांच महीने में शरद पवार अपनी पार्टी और सिंबल को जनता के बीच कैसे ले जाएंगे। जनता का मिजाज बेहतर भांपते हैं शरद , बारिश में भाषण को लोग नहीं भूलेमहाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में एनसीपी ने चार सीटें जीती थीं। 2019 के विधानसभा चुनाव में शरद पवार ने अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया। अक्टूबर 2019 में नवी मुंबई के एक कार्यक्रम में बारिश होने लगी, मगर शरद पवार डटे रहे। उनके इस भाषण का असर विधानसभा चुनाव के परिणामों में दिखा। एनसीपी को ब्रांड शरद के कारण 54 सीट पर जीत मिली थी, जो 2014 के 13 सीटें अधिक थीं। महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं। विधायकों की ताकत के सहारे ही एनसीपी ने बीजेपी को सरकार बनाने में पछाड़ भी दिया। शरद पवार ने ही एनसीपी महाविकास अघाड़ी का ताना-बाना बुना और उद्धव ठाकरे सीएम बने। उन्होंने महाराष्ट्र में बीजेपी के सामने बड़ी सियासी गोलबंदी खड़ी कर दी। मगर वक्त के साथ शिवसेना भी टूट गई और बाद में अजित पवार ने एनसीपी को ही अपने कब्जे में ले लिया। अभी शरद पवार के पास 11 विधायक और 4 सांसद हैं। अजित पवार के समर्थन में देश भर से 57 विधायक और सांसदों हैं।