अडानी-हिंडनबर्ग केस में SEBI की जांच अभी जारी रहेगी, सुप्रीम कोर्ट ने फिर दिया 14 अगस्त तक वक्त

अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से उठे विवाद के मामले में जांच कर रही मार्केट रेग्युलेटर सेबी को सुप्रीम कोर्ट ने और वक्त देते हुए मामले की सुनवाई एक महीने आगे बढ़ाते हुए 14 अगस्त को तय कर दी है। इस मामले में अब सेबी को 14 अगस्त तक जांच जारी रखने की अनुमति मिल गई है। इससे एक दिन पहले 10 जुलाई को सेबी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 43 पन्नों का एफिडेविट दायर किया था। इसके बाद आज मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने सेबी की जांच की स्थिति के बारे में जानकारी ली। सेबी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच जितना संभव है उतनी तेजी से जारी है।सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के दौरान वकील एमएल शर्मा ने कहा कि कोई पक्षकार अपने जवाब की कॉपी मुझे नहीं दे रहा। इस पर कोर्ट ने कहा कि सेबी के हलफनामे की सॉफ्ट कॉपी याचिकाकर्ताओं को दी जाए और साथ ही सॉफ्ट कॉपी कोर्ट में जमा कर इसे रिकॉर्ड पर अपलोड किया जाना सुनिश्चित किया जाए। इस पर तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया कि सबको सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी।मामले में एक याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने भी अपना जवाब दाखिल किया। प्रशांत भूषण ने कहा कि सेबी का जवाब सोमवार को दाखिल किया गया और मीडिया के बीच बांट दिया गया। उन्होंने कहा कि इसे देरी से फाइल किया गया है। इसके साथ ही प्रशांत भूषण ने सेबी पर अडानी-हिंडनबर्ग मामले की जांच को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष के लेन-देन और रिपोर्टिंग के नियमों में संशोधन भी किया गया है।गौरतलब है कि 10 जुलाई को सेबी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 43 पन्नों का एफिडेविट दायर किया गया था। इस हलफनामे में सेबी ने बताया कि वो 2016 से अडाणी ग्रुप की कंपनियों की कोई जांच नहीं कर रही है और ऐसे सभी दावे तथ्यात्मक रूप से निराधार हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने 2021 में लोकसभा में कहा था कि सरकार अडाणी ग्रुप की जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट को एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों के बारे में जानकारी देने के साथ ही रिपोर्ट पर उचित आदेश देने का आग्रह भी किया गया था।गौरतलब है कि नाथन एंडरसन के नेतृत्व वाली अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने बीते 24 जनवरी 2023 को एक रिपोर्ट जारी कर अडानी समूह से 88 सवाल पूछे थे। हिंडनबर्ग ने अडानी की कंपनियों को ओवरवैल्यूड बताने के साथ ही कई तरह के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके तुरंत बाद अडानी ग्रुप ने 413 पन्नों में हिंडनबर्ग के सवालों का जवाब देते हुए रिपोर्ट को फर्जी और भ्रामक बताया था। हालांकि, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई थी।हिंडनबर्ग रिपोर्ट सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। जिनपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च 2023 को अडानी-हिंडनबर्ग केस की जांच के लिए रिटायर्ड जज एएम सप्रे की अगुवाई में छह सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कमेटी के अन्य लोगों में जस्टिस जेपी देवधर, ओपी भट, एमवी कामथ, नंदन नीलेकणि और सोमशेखर सुंदरेसन शामिल हैं।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त इस एक्सपर्ट कमेटी ने मई 2023 में एक अंतरिम रिपोर्ट में कहा था कि उसने अरबपति गौतम अडानी की कंपनियों में हेर-फेर का कोई स्पष्ट पैटर्न नहीं पाया है और कोई नियामक विफलता नहीं हुई है। 15 मई को हुई इस सुनवाई के दौरान सेबी ने अडाणी-हिंडनबर्ग मामले में अपनी जांच पूरी करने के लिए 6 महीने का अतिरिक्त समय मांगा था।