सीट शेयरिंग तो कुछ भी नहीं, विपक्षी ‘इंडिया’ के लिए इससे भी बड़ी चुनौती तो ये है

विपक्ष के सबसे बड़े गठबंधन ‘I.N.D.I.A’ में सीटों के बंटवारे की बहुप्रतीक्षित बातचीत शुरू हो गई है, जिसमें हमेशा की तरह गलतफहमियां और अड़चनें झेलनी पड़ रही हैं। शुरुआत से ही स्पष्ट है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्ष का कैसा प्रदर्शन रह सकता है, यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि सीटों का बंटवारा कितना सटीक हो पाता है।सौदेबाजी का बाजार: जैसा कि अपेक्षित था, पश्चिम बंगाल में बातचीत की शुरुआत में ममता बनर्जी ने कांग्रेस को लोकसभा की दो सीटें ही ऑफर कीं। जबकि ममता इन दिनों ईडी अधिकारियों पर हमले के नए सनसीखेज मामले के बीच आरोपों का सामना कर रही हैं। उधर, केरल और जम्मू-कश्मीर में कड़ी बातचीत चल रही है। महाराष्ट्र में एमवीए ने कल दावा किया कि ‘हर सीट का फैसला हो गया है’। एनसीपी और शिवसेना में टूट के बाद अभी भी स्थिति अनिश्चित है और कांग्रेस को वहां जोर लगाने की जरूरत होगी।कांग्रेस की चुनौती: मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस सभी सीटों के लिए अपना होमवर्क कर रही है। उनकी चुनौती यह है कि वे अपने क्षेत्रीय नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए राजी करें – खासकर यूपी, बिहार, पंजाब और दिल्ली में, जहां क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत हैं। आम आदमी पार्टी (आप) कमजोर हो गई है और उनके कुछ मंत्री जेल में हैं, इसके बावजूद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कड़ा रुख अपनाएंगे।राहुल की यात्रा: कांग्रेस उन तीन राज्यों में भाजपा के खिलाफ सीधे लड़ रही है जहां वह दिसंबर के विधानसभा चुनावों में हार गई थी। पार्टी को उम्मीद है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा कुछ चुनावी फायदा दिलाएगी। लेकिन क्या पार्टी 2023 की हार में आंतरिक गुटबाजी का हाथ होना स्वीकार करेगी और 2024 में इसे सुलझाए पाएगी?मंदिर का मुद्दा: ‘इंडिया’ के लिए चुनौतीपूर्ण मुद्दों में यह भी शामिल होगा कि वे मतदाताओं को क्यों बताएंगे कि उनके घटक दल अयोध्या के कार्यक्रम में क्यों गए या नहीं गए, और क्या उन्हें आमंत्रित किया गया था या नहीं। ‘इंडिया’ के नेता अक्सर कहते हैं कि वे ‘भाजपा को करारा जवाब’ देने के लिए एक साथ हैं। लेकिन मतदाता भाजपा को जवाब से ज्यादा एक स्पष्ट संदेश चाहते हैं।