परदेस में रोजी-रोटी की तलाश, अब लौट रही उनकी लाश! कुवैत में मारे गए भारतीयों के परिजनों का दर्द छलनी कर देगा सीना

नई दिल्ली : रोजी-रोटी की तलाश में वे परदेस गए थे। कोई परिवार के अच्छे भविष्य के लिए अपना देश छोड़ परदेस गया था तो कोई सिर के ऊपर एक अच्छी सी छत के सपने को पूरा करने के लिए अपनों से दूर होना चुना था। कोई 2 महीने बाद वतन लौटने और सपनों के घर की नींव रखने वाला था। किसी के रिश्ते की बात चल रही थी। किसी ने पिछले हफ्ते ही अपनी पहली सैलरी भेजी थी। कोई बमुश्किल एक हफ्ते पहले ही अपनी पहली नौकरी पर कुवैत पहुंचा था। घर में खुशियां थीं। तब शायद आस-पड़ोस में मिठाइयां भी बंटी होंगी। लेकिन वे अब नहीं लौटेंगे। अब उनकी लाश लौट रही हैं। उनके घरों में अब मातम है। इंडियन एयर फोर्स के एक विमान से कुवैत अग्निकांड में मारे गए भारतीयों के शवों को कोच्चि लाया जा चुका है। मरने वालों में ज्यादातर केरल के रहने वाले थे। इंग्लिश न्यूज वेबसाइट ‘न्यूज18’ ने कुवैत अग्निकांड में मारे गए भारतीयों के कुछ परिजनों और दोस्तों से बातचीत कर एक रिपोर्ट छापी है। हादसे में अपनों को खोने वालों के दर्द, मलाल और आंसू दिल चीर देने वाले हैं। सपनों के घर की नींव रखने वाले थे शमीर लेकिन…केरल के कोल्लम जिले के रहने वाले उमरुद्दीन शमीर कुवैत के मंगाफ में एक इमारत में लगी आग में मारे गए 45 भारतीयों में से एक थे। वह 2 महीने बाद कोल्लम लौटने वाले थे। अपने सपनों के घर की नींव रखने वाले थे। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। 33 साल के शमीर करीब पांच साल से कुवैत स्थित कंपनी एनबीटीसी में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे थे। ऐसा संदेह है कि घबराहट में और अपनी जान बचाने की कोशिश में शमीर ने इमारत से कूदने की कोशिश की, जिससे उसकी मौत हो गई। शमीर का का परिवार सदमे में है। रो रोकर बुरा हाल है। उनके एक रिश्तेदार ने बताया, ‘वह हर सुबह काम पर जाने से पहले फोन करता था। जब बुधवार को फोन नहीं आया तो उसकी पत्नी चिंतित हो गई। वहां से एक दोस्त ने हमें आग के बारे में बताने के लिए फोन किया। हम स्तब्ध हैं। हमें नहीं पता कि इस त्रासदी पर कैसे प्रतिक्रिया करनी है। हम राज्य सरकार और बचाव अभियान में शामिल लोगों के मार्गदर्शन पर भरोसा कर रहे हैं।’साबू की शादी के लिए देखे जा रहे थे रिश्ते कोट्टायम के स्टेफिन साबू (29 वर्ष) के घरवाले धूमधाम से उनका घर बसाने का सपना देख रहे थे। शादी के लिए एक अच्छा रिश्ता आया था। वे चाहते थे कि साबू जल्दी आए और रिश्ता पक्का हो जाए। लेकिन ये हो न सका। परिवार सदमे में है। एक परिजन ने रो-रोकर बयां किया, ‘हम उसकी शादी की योजना बना रहे थे, एक अच्छा विवाह प्रस्ताव आया था। हम उसे जल्द वापस आने के लिए कह रहे थे… हमने अपने घर का प्रकाश खो दिया है। हम अंधकार में हैं और मैं सभी से प्रार्थना करने का अनुरोध करता हूं।’साजन ने पिछले हफ्ते भेजी थी पहली सैलरीमरने वालों में कोल्लम के पुनालुर के रहने वाले साजन का भी नाम है। एमटेक करने के बाद वह अदूर के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रफेसर की नौकरी करते थे लेकिन कुवैत जाने के लिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वह एनबीटीसी में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे और पिछले हफ्ते ही अपनी पहली सैलरी घर भेजी थी। उनके पिता जॉर्ज के ऊपर वज्रपात हो गया है। जवान बेटा जो खोया है। वह कहते हैं, ‘वह हमें अपने दिन और वहां काम करने के अपने अनुभव के बारे में बताने के लिए फोन करता था क्योंकि यह उसकी विदेश में पहली नौकरी थी। अब हम क्या करें?’18 साल से कुवैत में कमा रहे थे, अब बेटियों के सिर से उठा पिता का सायाकोल्लम के ही एक और निवासी 48 वर्षीय लुकोस वीओ ने कुवैत में 18 साल से ज्यादा समय बिताया और एक दशक तक एनबीटीसी में काम किया। अपने सात भाई-बहनों में से एक, वे एक फोरमैन सुपरवाइजर के रूप में काम करते थे और केरल की अपनी यात्राओं के दौरान, वे अपनी पंचायत में सामाजिक, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेते थे। उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें से एक ने हाल ही में अपनी बारहवीं की परीक्षा पास की है, जबकि छोटी बेटी कक्षा 5 में पढ़ रही है। अब उनके सिर से पिता का साया उठा चुका है।लुकोस के फैमिली फ्रेंड शाजी लुकोस बताते हैं, ‘वह एक मृदु स्वभाव के धार्मिक व्यक्ति थे, जो लोगों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना जानते थे। उन्हें लोग काफी पसंद करते थे और वह संकट में फंसे किसी भी व्यक्ति की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। मैंने उन्हें उनके बचपन से देखा है, और उन्होंने अपने परिवार को घर पर एक आरामदायक जीवन देने के लिए कड़ी मेहनत की।’ एक हफ्ते पहले ही पहली नौकरी शुरू करने कुवैत पहुंचे थे श्रीहरि प्रदीपकोल्लम से 90 किलोमीटर दूर कोट्टायम में एक युवा मैकेनिकल इंजीनियर श्रीहरि प्रदीप 6 जून को अपनी पहली नौकरी शुरू करने के लिए कुवैत पहुंचे थे। उन्हें एनबीटीसी में नौकरी मिल गई थी। उनके पिता प्रदीप भी पिछले करीब एक दशक से कुवैत में ही नौकरी कर रहे थे। श्रीहरि प्रदीप सिर्फ 5 दिन पहले ही उस मनहूस अपार्टमेंट की छठी मंजिल में शिफ्ट हुए थे। उनके पिता प्रदीप नजदीक में ही दो इमारतों की दूरी पर एक फ्लैट में रहते थे। जैसे ही उन्हें आग के बारे में पता चला, वह बचाव के लिए गए, लेकिन बचाव कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। अस्पताल में उनके शव की पहचान करने में कुछ समय लगा। कोट्टायम में श्रीहरि प्रदीप के एक पड़ोसी ने बताया, ‘श्रीहरि की पहचान अंततः उसकी कलाई पर बने टैटू के निशान से हुई और बाद में प्रदीप ने इसकी पुष्टि की।’इमारत में आग से 45 भारतीयों समेत 49 की मौतकुवैत के मंगाफ इलाके की एक इमारत में गुरुवार सुबह करीब 4 बजे रसोईघर में आग लग गई, जबकि उस समय आवास में रहने वाले ज्यादातर लोग सो रहे थे। इस आग में 49 विदेशी नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें 45 भारतीय थे। मरने वालों में ज्यादातर केरल के हैं। भारत सरकार ने विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को कुवैत भेजा है जो वहां घायलों के उपचार की व्यवस्था कर सकें और