नीतीश के खिलाफ RJD की नई राजनीति शुरू, लालू के तेवर और विज्ञापन बने तेजस्वी के हथियार

पटना: बिहार में आज यानी 28 जनवरी से एनडीए सरकार की नींव पड़ गई। लेकिन यहीं से राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति की नई शुरुआत होगी। राजनीति के मंझे खिलाड़ी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आक्रामक तेवर अब नीतीश की NDA सरकार को सदन से सड़क तक चुनौती देते नजर आएंगे। सड़क की लड़ाई की शुरुआत तो हो भी गई है। जदयू और भाजपा सरकार बनाने के सूत्र में उधर उलझे थे, उधर राजद जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की एक्सरसाइज कर रही थी। आज का अखबार राजद की इस नई राजनीति की शुरुआत की कहानी कह रहा है।राजद ने शुरू किया विज्ञापन वारराजद की तरफ से आज अखबारों में महागठबंधन सरकार के डेढ़ साल के अंदर किए गए तमाम विकास का श्रेय लेने वाला विज्ञापन छपवाया गया। इन अखबारों में तेजस्वी यादव अपने पूरे डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में हुए कार्यों पर अपना दावा ठोकते नजर आ रहे हैं। राजद की ओर से जारी विज्ञापन में कहा गया है कि महागठबंधन सरकार के कार्यों के असली हकदार तेजस्‍वी यादव हैं। जाति आधारित गणना, आरक्षण का कोटा बढ़ाने से लेकर 4 लाख से अधिक शिक्षकों की बहाली को राजद ने तेजस्‍वी यादव की उपलब्धि बताई है। बिहार में नौकरी के श्रेय पर RJD ठोका दावाअब तो राजद इस प्रचार प्रसार में भी लग गया है कि नीतीश कुमार ने अपने 16 वर्षों की सरकार में जितनी स्‍थाई सरकारी नौकरी नहीं दी, उससे ज्‍यादा 18 महीने में तेजस्‍वी यादव के प्रभाव वाली महागठबंधन सरकार ने दी। राजद यहीं नहीं रुका, जातीय सर्वे, 75 प्रतिशत आरक्षण, शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा, जीविका दीदी, पंचायत प्रतिनिधि, टोला सेवक, मरकज आदि का मानदेय बढ़ाना, पुल पुलिया,सड़क निर्माण का भी श्रेय लिया। हालांकि तेजस्वी यादव इसके पहले भी श्रेय लेने की होड़ में शामिल हो चुके थे। कई बार पोस्टरबाजी भी हुई थी। दरअसल तेजस्वी यादव की नजर विधानसभा चुनाव 2025 पर टिकी थी। ताकि जनता के बीच अपनी पहुंच बना सकें और अपने समर्थकों का विस्तार कर सकें।सदन में भी नीतीश पर हमला बोलने की तैयारी में राजदराजद की राजनीति यहीं खत्म नहीं हुई है। राजद के सूत्रों के अनुसार सदन के भीतर नीतीश सरकार को परास्त करने की तैयारी भी की जा रही है। सदन के सत्र में अविश्वास प्रस्ताव ला कर सरकार गिराने के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। कहा यह जा रहा है कि राजद के संपर्क में जो जदयू विधायक हैं उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अनुपस्थित कर सरकार गिराने के मैजिक आंकड़ा प्राप्त करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। हम के चार विधायकों को भी महागठबंधन से जोड़ने के लिए जीतनराम मांझी को सीएम पद तक का प्रलोभन दिया जा रहा है।