अभी चंद्रशेखर, पहले कई और; नीतीश के लिए अक्सर सिरदर्द बनते हैं RJD कोटे के मंत्री

पटना: बिहार के सीएम की किरकिरी उनके मंत्रिमंडल सहयोगी अक्सर कराते रहे हैं। पिछले पांच साल में ऐसे चार मंत्रियों को बाध्य होकर नीतीश कुमार को हटाना पड़ा। कभी आरजेडी के दबाव में तो कभी बीजेपी के कड़े विरोध के कारण। मंजू वर्मा का नाम बहुचर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में आया तो आरजेडी ने इसका विरोध किया। आखिरकार नीतीश कुमार ने उनसे इस्तीफा ले लिया। मेवालाल चौधरी (अब स्वर्गीय) तो 24 घंटा भी मंत्री पद का सुख नहीं भोग पाए। जिस दिन कार्यभार संभाला, उसी दिन उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उन्हें भी नीतीश ने शिक्षा मंत्री बनाया था। पिछले साल नीतीश ने जब महागठबंधन के साथ सरकार बनाई तो सुधाकर सिंह और कार्तिकेय सिंह को मंत्री बनाया गया। बीजेपी ने इतना हंगामा मचाया कि नीतीश की किरकिरी होने लगी। अंततः दोनों से सीएम ने इस्तीफा ले लिया। मौजूदा शिक्षा मंत्री को लेकर भी नीतीश कुमार की खूब फजीहत हो रही है। देखना है कि उनके साथ नीतीश क्या सलूक करते हैं।मेवालाल चौधरी 24 घंटे भी मंत्री नहीं रह पाए बिहार के शिक्षा मंत्री के रूप में मेवालाल चौधरी ने 19 नवंबर 2020 को विभाग का कार्यभार सुबह संभाला और देर रात उन्होंने इस्तीफा दे दिया। चौधरी पर आरोप था कि एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर (वीसी) रहते उन्होंने जो नियुक्ति की थी, उसमें पैसे का लेनदेन हुआ था। पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने तब यह भी आशंका जाहिर की थी कि मेवालाल की पत्नी पूर्व विधायक नीता चौधरी की हुई संदिग्ध मौत के तार नियुक्ति घोटाले से जुड़े हो सकते हैं। मेवालाल चौधरी के इस्तीफे पर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी अड़ गए थे। आज भले वे अपने मंत्रियों पर लग रहे आरोपों पर खामोश हों, लेकिन उस वक्त उनकी मुखरता सबने देखी थी।सुधाकर सिंह और कार्तिकेय को हटाना पड़ा थामहागठबंधन की सरकार बनी तो नीतीश ने आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह को कृषि मंत्री बनाया। सुधाकर सिंह पर करोड़ों रुपये के चावल घोटाले का तब केस दर्ज था। सुधाकर सिंह बक्सर के रामगढ़ से आरजेडी के विधायक हैं। सुधाकर सिंह के खिलाफ दो राइस मिलों के माध्यम से सरकार के 5 करोड़ 31 लाख एक हजार 286 रुपये के घोटाले का मामला दर्ज था। बिहार राज्य खाद्य निगम के डीएम ने 27 नवंबर 2013 को सुधाकर सिंह पर रामगढ़ थाने में केस दर्ज कराया था। उन पर गबन का केस तब सीजेएम कोर्ट में चल रहा था। नीतीश ने जिन्हें कानून मंत्री बनाया, वे भी दागी निकले। कार्तिकेय सिंह को नीतीश मंत्रिमंडल में कानून मंत्री बनाया गया था। कार्तिकेय कुमार सिंह के खिलाफ किडनैपिंग का केस चल रहा था। आश्चर्य यह कि जिस दिन कार्तिकेय सिंह को अदालत में सरेंडर करना था, उसी दिन उन्होंने कानून मंत्री के पद की शपथ ली। कार्तिकेय का नाम साल 2014 में बिहटा थाना क्षेत्र में बिल्डर राजू सिंह के अपहरण में आया था। उस मामले में अनंत सिंह के साथ कार्तिकेय सिंह को भी आरोपी बनाया गया था।कारतूस बरामद होने पर हटाई गई थी मंजू वर्मानीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में 2018 में समाज कल्याण मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहीं मंजू वर्मा से भारी विरोध के बाद नीतीश कुमार ने इस्तीफा ले लिया था। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में सीबीआई ने उनके घर छापा मारा था। छापे में उनके बेगूसराय के चेरिया बरियारपुर स्थित घर से 50 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। मंजू वर्मा की इसी मामले में गिरफ्तारी हुई थी। बाद में जेडीयू ने मंजू वर्मा को पार्टी से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था। मंजू वर्मा कई दिनों तक फरार भी रही थीं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस प्रधान के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी। मंजू वर्मा ने 8 अगस्त 2018 को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के पास से मिले थे कारतूसबिहार के मौजूदा शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर अभी एसीएस केके पाठक से विवाद को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि इसके पहले भी रामचरित मानस पर अपने बयान को लेकर वे काफी चर्चा में रहे हैं। वे मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं। आरोप है कि उन्हें 20 फरवरी 2022 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से गिरफ्तार किया गया था। वे अपने सामान के साथ 10 कारतूस भी रखे हुए थे। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों में 23 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले हलफनामे में दर्ज किए हैं, जिनमें 17 के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं।रिपोर्ट- ओमप्रकाश अश्क