झीरम घाटी याद है? चुनाव से पहले जरूर दम दिखाते हैं नक्सली, छत्तीसगढ़ में अटैक की क्रोनोलॉजी देखिए

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के अरनपुर में नक्सली हमले में 10 जवानों और एक ड्राइवर की मौत की घटना पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बात की और हर संभव मदद देने की बात कही। दंतेवाड़ा हमले पर गौर करें तो यहां छत्तीसगढ़ के नक्सलियों की एक क्रोनोलॉजी समझ में आती है। नक्सलियों के पिछले हमलों पर नजर डालें तो पता चलता है कि चुनावी साल में ही ये लोग ऐक्टिव होते हैं और अपनी धमक दिखाने की कोशिश करते हैं।जानकार बताते हैं कि मार्च से लेकर मई का महीने नक्सलियों के लिए मुफीद माना जाता है। गर्मी के दिनों में जंगल में दृश्यता बढ़ जाती है। इसी का फायदा लेते हुए नक्सली टीसीओसी चलाकर बड़े हमले को अंजाम देते हैं। 1. दंतेवाड़ा नक्सली हमले से ठीक एक दिन पहले मंगलवार को बीजापुर के गंगालूर में विधायक विक्रम मंडावी के काफिले को नक्सलियों ने निशाना बनाया, हालांकि किसी प्रकार की हानि नहीं हुई। बीजापुर विधायक के काफिले में पीछे आ रही नेलसनार जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप की गाड़ी के पहिए पर गोली लगी। 2. इसी साल फरवरी में नक्सलियों ने 3 बीजेपी नेताओं की हत्या की। पांच फरवरी को बीजापुर बीजेपी मंडल अध्यक्ष नीलकंठ कक्केम, 10 फरवरी को नारायणपुर बीजेपी उपाध्यक्ष सागर साहू और 11 फरवरी को इंद्रावती नदी के पार दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिले की सरहद पर बीजेपी नेता रामधर अलामी को नक्सलियों निशाना बनाया।3. 2019 में लोकसभा के चुनाव थे। 10 अप्रैल 2019 को दंतेवाड़ा विधायक भीमा मंडावी के काफिले को निशाना बनाया गया। यहां नक्सलियों ने एंबुश लगाकर आइईडी ब्लास्ट किया था। इसमें विधायक भीमा मंडावी समेत 5 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।4. बस्तर में इससे पहले नक्सलियों ने राजनेताओं पर भी हमले किए हैं। 25 मई 2013 में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर झीरम घाटी से गुजर रही थी तभी नक्सलियों ने जोरदार हमले किए। इस हमले में कांग्रेस के विद्याचरण शुक्ल, नंदकुमार पटेल, उदय मुदलियार, महेंद्र कर्मा जैसे कद्दावर नेताओं समेत 31 लोगों की मौत हुई थी।5. 20 अप्रैल 2012 को बीजापुर के बीजेपी विधायक महेश गागड़ा काफिले के साथ ग्राम सुराज अभियान से लौट रहे थे। तभी नक्सलियों ने उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की। उस दिन गागड़ा अपनी गाड़ी के बजाय दूसरी गाड़ी में सवार थे, जिसके चलते उनकी जान बच गई थी। इस नक्सली हमले में पुरुषोत्तम सिंह, एक जिला पंचायत सदस्य और अन्य लोग मारे गए थे।6. 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन वनमंत्री विक्रम उसेंडी पर हमला किया था। इस हमले में उसेंडी तो बच गए थे पर सुरक्षा में लगे दो जवानों को जान गंवानी पड़ी थी। 7. 2008 के विधानसभा चुनाव में दंतेवाड़ा में प्रचार करने गए बीजेपी नेता रमेश राठौर और सूर्यप्रताप सिंह को नक्सलियों ने निशाना बनाया था। दंतेवाड़ा में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष त्रिनाथ सिंह ठाकुर की गदापाल गांव के समीप हत्या कर दी थी।