गहने बेचकर मक्का पहुंचे, 12 किमी पैदल, चादर का टेंट… कहानी उनकी जिनके लिए हज बन गया आखिरी सफर

काहिरा: मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र धार्मिक अनुष्ठान मानी जाने वाली हज यात्रा पर इस बार गर्मी का कहर टूट पड़ा है। सऊदी अरब में हज 2024 के दौरान 1000 से ज्यादा तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। इनमें 98 भारतीय भी शामिल है। अधिकांश हजयात्रियों की मौत सऊदी अरब में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते हुई है। इस्लाम में सभी मुसलमानों के लिए जीवनकाल में एक बार हज करना फर्ज है। यही वजह है कि अमीर और गरीब सभी हज यात्रा पर जाते हैं। मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या मिस्र के तीर्थयात्रियों की है। मिस्र के कई तीर्थयात्री गरीब गांवों से पहुंचे थे, जिन्होंने अपनी जिंदगी की बचाकर रखी पूंजी इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का की यात्रा पर खर्च कर दी, लेकिन लौट कर वापस घर नहीं पहुंच सके। गहने बेंचकर पहुंची थी इफेंदियामिस्र की 70 वर्षीय इफेंदिया ने हज यात्रा पर जाने के लिए अपने गहने बेच दिए थे, लेकिन रस्में निभाते समय उनकी मौत हो गई। इफेंदिया के बेटे ने सैय्यद ने बीबीसी से बताया कि हज जाना उनकी मां का सबसे बड़ा सपना था। 5 बच्चों की मां इफेंदिया आधिकारिक हज वीजा की जगह पर्यटक वीजा पर मक्का गई थीं। मिस्र में आधिकारिक हज यात्रा के लिए 6000 डॉलर यानी लगभग 5 लाख भारतीय रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इफेंदिया की यात्रा एक दलाल ने कराई थी। उसने आधी रकम ही ली थी और फाइव स्टार सुविधा का वादा किया था, लेकिन हकीकत एकदम अलग थी।बस ने 12 किमी पहले उतार दियाइफेंदिया के सबसे बड़े बेटे तारिक ने बताया कि बस ने उनकी मां को माउंट अराफात से लगभग 12 किमी दूर उतार दिया और चली गई। उन्हें पूरा रास्ता पैदल ही चलना पड़ा। उन्होंने बताया कि जब भी मां से वीडियो कॉल पर बात की, वह अपने सिर पर पानी डालते नजर आईं। उनसे गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी। जब आखिरी बार तारिक की अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात हुई, वह बुरी तरह थकी लग रही थी। इफेंदिया की बेटी मनाल कहती हैं कि जब आखिरी बार मां ने उनके भाई से बात की तो उन्होंने कहा कि उनकी आत्मा शरीर से जा रही है। भरी हुई आंखों से मनाल ने कहा कि ‘काश मैं उस वक्त उनक साथ होती।’ नहीं मिली कोई सुविधासऊदी अरब में हज यात्रा के दौरान आमतौर पर यात्रियों को एयरकंडीशन वाले टेंट में ठहराया जाता है। एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए बसें लगाई होती हैं। सैय्यद कहते हैं कि इफेंदिया रजिस्टर्ड तीर्थयात्रियों में नहीं थीं। इसलिए उन्हें कोई सुविधा नहीं दी गई थी। उन्हें पूरी तरह से लावारिस छोड़ दिया गया था। सैय्यद ने बताया कि उनकी मां ने गर्मी से बचने के लिए चादर से तंबू बनाने की कोशिश की। मिस्र के अधिकारियों का कहना है कि मरने वाले तीर्थयात्रियों में से कई पंजीकृत नहीं हैं, जिससे आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या निर्धारित करना मुश्किल हो गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मृतकों की पहचान करने और उनके परिवारों से संपर्क करने में अधिक समय लग सकता है। वहीं, मिस्र के प्रधानमंत्री मुस्तफा मदबूली ने सऊदी अरब में गैरपंजीकृत तीर्थयात्रियों को भेजने में शामिल टूर कंपनियों की गतिविधि की जांच की बात कही है।