रंजीत डॉन, पेपर लीक के धंधे का ‘पितामह’… एग्जाम सेंटर ही खरीद चुटकी में पैदा कर देता डॉक्टर-इंजीनियर और बैंक पीओ

पटना: बिहार से नीट परीक्षा 2024 पेपर लीक कांड के तार आ जुड़े हैं… वो भी इनडायरेक्ट नहीं बल्कि डायरेक्ट। वो भी कहीं इधर उधर नहीं बल्कि सीधे नालंदा से। एक तो ये सीएम नीतीश का गृह जिला है, ऊपर से पेपरलीक कांड का कलियुगी पितामह माने जाने वाले का ( Bihar) गढ़। आज की प्रतियोगी परीक्षा दे रहे ज्यादातर छात्रों को पता भी नहीं होगा कि कौन है ये रंजीत डॉन ? कैसे बना वो पेपरलीक कांड का पितामह? जान लीजिए कि ये पेपरलीक कांड का वो चैंपियन रहा, वो सीधे एग्जाम सेंटर ही खरीद लेता था। और तो और नौकर तक को उसने डॉक्टर बना दिया था। डॉक्टर तो छोड़िए इंजीनियर और बैंक पीओ बनाना तो उसकी चुटकी का खेल था। पढ़िए उसकी कहानी…पेपर लीक का कलियुगी पितामह रंजीन डॉनवो तारीख थी 26 नवंबर 2003, सीबीआई ने दिल्ली से एक शख्स को गिरफ्तार किया। उसका नाम था सुमन सिंह। आरोप था कि उसने अप्रैल 2003 में हुई सीबीएसई मेडिकल परीक्षा के पेपर लीक किए थे। सीबीआई ने जब गहराई से पूछताछ शुरू की और सुमन कुमार सिंह के कनेक्शनों को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि इसके दो और नाम भी हैं… रंजीत सिंह उर्फ रंजीत डॉन। जो एग्जाम सेंटर ही खरीद लेता था!रंजीत डॉन पर CAT परीक्षा के पेपर लीक का भी आरोप था। जांच आगे बढ़ी तो यह पूरा मामला एक बड़े परीक्षा पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़ा निकला। इसका मास्टरमाइंड-किंगपिन और कोई नहीं बल्कि रंजीत डॉन ही था। रंजीत डॉन बिहार के नालंदा जिले के हिलसा प्रखंड के खद्दी लोधीपुर गांव का रहने वाला था। उसने 1994 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला लिया था, लेकिन वहां उसके खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्र देने के आरोप लगे थे। वहां से वो निकाल दिया गया लेकिन इसके बाद उसने वो कर दिया जिसने कभी सोचा तक नहीं था। सीबीआई की जांच में पता चला कि रंजीत डॉन एक बड़े सिंडिकेट का सरगना था जो देश भर में परीक्षाओं के पेपर लीक करने का काम करता था। चर्चा तो यहां तक थी कि अपने गैरकानूनी मकसद को पूरा करने के लिए रंजीत डॉन एग्जाम सेंटर तक को ही खरीद लेता था। ऐसे हुआ था सबसे बड़ा खुलासासीबीआई ने 10 दिसंबर 2003 को रंजीत डॉन समेत 18 लोगों के खिलाफ़ केस दर्ज किया था। यह मामला केस नंबर RC- 24A/2003 के तहत आईपीसी की धारा 409 और प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। इस मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। यह मामला राष्ट्रीय स्तर का था, इसलिए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान पता चला कि इस सिंडिकेट में कई बड़े और प्रभावशाली लोग शामिल थे। रंजीत डॉन इस सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार था और उसने कई परीक्षाओं के पेपर लीक कराकर लाखों-करोड़ों रुपए कमाए थे।मां को तोहफे में दी थी हीरो-हिरोइन वाली वैनिटी वैनसाल 2003-04 में वैनिटी वैन बड़ी बात हुआ करती थी। अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, सलमान खान, माधुरी दीक्षित, तब्बू, अजय देवगन, अक्षय कुमार सरीखे बड़े ऐक्टर एक्ट्रेस वैनिटी वैन यूज करते थे। उस दौर में रंजीत डॉन ने अपने अपनी मां को तोहफे में वैनिटी वैन गिफ्ट किया था। रंजीत डॉन की मां जब वैनिटी वैन में सवार होकर पटना के मलाही पकड़ी वाले घर से हिलासा जाती थीं तो वह आसपास के लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता था। आम चर्चाओं में लोग कहते कि रंजीत डॉन की घर में मेहमानों को जिस कप में चाय परोसी जाती वह उसकी कीमत हजारों में होती।दवाई कंपनी बनाकर काले धन को सफेद करता रंजीत डॉनरंजीत डॉन ने पेपर लीक से होने वाली करोड़ों की कमाई को सफेद करने के लिए कागजों पर कई दवाई कंपनी रजिस्टर्ड करा रखी थी। ये दवाई कंपनियां हिमाचल प्रदेश के अड्रेस पर रजिस्टर्ड थी। लेकिन जांच में पता चला था कि ज्यादातर कंपनी कागजों पर थी और इसमें हर फाइनेंशियल ईयर में भारी नुकसान दिखाया जाता, ताकि इसी बहाने पेपर लीक की काली कमाई को सफेद किया जा सकता।अभी कहां है रंजीत डॉनसीबीआई का दर्ज किया गया केस अभी भी अदालत में विचाराधीन है। रंजीत डॉन समेत सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं। लेकिन जिस वक्त ये कांड हुआ था, उस वक्त ऐसी परीक्षाओं के पेपर लीक के बारे में सोचना भी मुश्किल था। अब NEET Exam 2024 पेपर लीक कांड में फिर से नालंदा बदनाम हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि उस वक्त रंजीत डॉन था और इस दफे संजीव मुखिया।