राहुल ने बताया ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से उनमें क्या बदला, शेयर की बच्ची से जुड़ी खास बात

मध्य प्रदेश में सातवें दिन मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा इंदौर जिले के सांवेर कस्बे से उज्जैन के लिए आगे बढ़ी. यात्रा के बीच राहुल गांधी ने इंदौर में कहा कि वह भारत जोड़ो यात्रा के दौरान खुद में कुछ बदलाव महसूस कर रहे हैं जिसमें खुद में अधिक धैर्य आना और दूसरों को सुनने की क्षमता शामिल है.
राहुल गांधी अपने महत्वाकांक्षी पैदल मार्च के तहत 2,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने के बाद रविवार को मध्य प्रदेश के इंदौर जिले पहुंचे हैं. दरअसल सोमवार को इंदौर में राहुल संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे, इस दौरान संतोषजनक क्षण के बारे में पुछे जाने पर कहा कि मैं समझता हूं कि इस यात्रा के चलते मेरा धैर्य काफी बढ़ गया है. राहुल ने कहा, दूसरी बात, अब मैं आठ घंटे में भी नहीं चिढ़ता, तब भी नहीं यदि कोई मुझे धक्का दे या खींचे. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, जबकि पहले मैं दो घंटे में भी चिढ़ जाता था.
सुनना और धैर्य हुआ बेहतर
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि यदि आप यात्रा में चल रहे हैं और दर्द का अनुभव करते हैं, तो आपको इसका सामना करना होगा, आप हार नहीं मान सकते. उन्होंने कहा कि तीसरा, दूसरों को सुनने की उनकी क्षमता भी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है. उन्होंने कहा, जैसे अगर कोई मेरे पास आता है तो मैं उसे ज्यादा धैर्य से सुनता हूं. ये सभी चीजें मेरे लिए काफी लाभदायक हैं. राहुल गांधी ने कहा कि जब उन्होंने पैदल मार्च शुरू किया, तो उन्हें एक पुरानी चोट के कारण उनके घुटनों में दर्द महसूस हुआ, जो पहले ठीक हो गई थी. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से काफी परेशानी हो रही थी, साथ ही डर था कि ऐसी हालत में वह चल भी पाएंगे या नहीं. हालांकि, धीरे-धीरे मैंने उस डर का सामना किया क्योंकि मुझे चलना था, इसके बारे में कोई सवाल ही नहीं था. ऐसे क्षण हमेशा अच्छे होते हैं कि कुछ चीज आपको परेशान कर रही है और आप खुद को उसके अनुसार ढाल लें.
एक छोटी बच्ची से प्रभावित हुए राहुल
दक्षिणी राज्यों में से एक में पदयात्रा के दौरान के एक अनुभव को याद करते हुए, गांधी ने कहा कि जब वह दर्द से परेशान हो गए क्योंकि लोग उन्हें धक्का दे रहे थे तो एक छोटी लड़की आयी और यात्रा में चलने लगी. उन्होंने कहा, वह मेरे पास आयी और मुझे एक चिट्ठी थमायी. वह शायद छह-सात साल की थी. जब वह चली गई तो मैंने वह चिट्ठी पढ़ी जिसमें लिखा था मत समझो कि आप अकेले चल रहे हो, मैं आपके साथ चल रही हूं. मैं पैदल यात्रा नहीं कर पा रही क्योंकि मेरे माता-पिता मुझे ऐसा करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, लेकिन मैं आपके साथ चल रही हूं.