ईरान के राष्ट्रपति 20 साल बाद चीन पहुंचे, अमेरिका के दो दुश्मन भारत के खिलाफ तो नहीं पका रहे खिचड़ी?

तेहरान: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी मंगलवार को तीन दिवसीय चीन यात्रा पर गए हैं। चीन पहुंच कर उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब दोनों देशों पर कई मुद्दों को लेकर पश्चिम का दबाव है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 20 साल बाद यह किसी ईरानी राष्ट्रपति की यात्रा है। इब्राहिम रईसी की यह यात्रा दोनों देशों के लिए ही महत्व नहीं रखती, बल्कि सीधे तौर पर भारत को भी प्रभावित करती है। ऐसे में जरूरी है कि भारत इस पर अपनी निगाह टिकाए रखे।हालांकि दोनों नेताओं की मुलाकात कोई नई नहीं है। सितंबर 2022 में शंघाई सहयोग संगठन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात हुई थी। चीन के मीडिया का कहना है कि रईसी के 2021 में राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों ने 25 साल के रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए और मंगलवार को भी दोनों नेताओं ने कई द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दे पर सहमति जताई। रईसी ईरान के केंद्रीय बैंक के नए गवर्नर और अपने छह मंत्रियों के साथ चीन पहुंचे हैं।दोनों देशों के अमेरिका से तनावदोनों देश ऐसे समय में करीब आ रहे हैं, जब भारत के बड़े सहयोगी अमेरिका के साथ इनके रिश्ते हाल के दिनों में तनावपूर्ण हुए हैं। रूस-यूक्रेन के युद्ध में ईरान ने पुतिन को ड्रोन दिया है, जिसके कारण उसे पश्चिनी देशों की आलोचना का शिकार होना पड़ा। वहीं अगर चीन की बात करें तो फरवरी की शुरुआत में अमेरिका के आसमान में एक चीनी गुब्बारा देखा गया। अमेरिका ने चीन पर सीधे जासूसी का आरोप लगाया और गुब्बारे को मार गिराया। अब चीन का कहना है कि अमेरिका के जासूसी गुब्बारे उसके आसमान में हैं।भारत को क्या है खतरा?भारत से अगर रिश्तों की बात करें तो ईरान से संबंध मित्रतापूर्ण रहे हैं। ईरान हमेशा भारत के साथ रहा है। चीन ने भारत को जब हिंद महासागर में घेरने के लिए पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह बनाया, तो ईरान ही था जिसने चाबहार बंदरगाह का भारत को एक्सेस दिया। लेकिन यह यात्रा भारत के लिए चिंता की बात भी हो सकती है। क्योंकि ईरान हर हाल में अमेरिका को घेरना चाहता है, जिसके लिए उसे चीन और रूस की जरूरत होगी। चीन जिस ओर जाएगा, पाकिस्तान भी उसके पीछे-पीछे चल पड़ेगा। पाकिस्तान, चीन और रूस इन तीनों देशों में चीन और पाकिस्तान से भारत के तनावपूर्ण रिश्तों के बारे में पूरी दुनिया जनती है। जिस अमेरिका को ईरान घेरना चाहता है, उससे भारत के अच्छे संबंध हैं। ऐसे में डर इस बात है कि चीन और पाकिस्तान के साथ मिल कर न चाहते हुए भी ईरान भारत विरोधी ब्लॉक न बना दे।अरबों डॉलर का निवेश कर सकता है चीनलंदन के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS) में राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन के प्रोफेसर अदीब-मोगद्दम का कहना है कि हम विश्व राजनीति के एक महत्वपूर्ण पुनर्गठन के बीच में हैं। इस तरह के नए गठबंधन बन रहे हैं और जो बने हैं वह मजबूत हो रहे हैं। ईरान और चीन की करीबी भी इसी तरह के गठबंधन में से एक है। दोनों के बीच होने वाले समझौतों की बात करें तो चीन ईरान के तेल और गैस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर सकता है। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारी साझेदार है।