चलती बस में गर्भवती ने बच्चे को दिया जन्म, पति बोला- मेरे घर आया नन्हा फरिश्ता

अक्सर देखा जाता है कि अस्पताल में एम्बुलेंस या फिर मरीजों की गाड़ियों की ही आवाजाही होती है, लेकिन जब कोई बस स्पीड में अस्पताल के अंदर घुसे तो सब सोच में पड़ जाते हैं. बस अंदर क्यों जा रही है. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आया है. जहां एक स्लीपर कोच बस जिला अस्पताल के अंदर पहुंच गई. दरअसल, सागर के रहने वाले दंपति दिल्ली से सागर जा रहे थे, उस दौरान गर्भवकी महिला यात्री बस में सवार थी. उसी दौरान महिला को डिलीवरी के लिए दर्द हुआ और बस में ही डिलीवरी हो गई.
वहीं, जैसे ही इस मामले की जानकारी बस ड्राइवर को लगी, उसने मानवता दिखाते हुए बस को जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर से वापस कर आनन-फानन में जिला अस्पताल के भीतर ले गया. जहां फौरन ही महिला को भर्ती कराया गया है. फिलहाल मां और बच्चा दोनों ही स्वस्थ्य हैं. वहीं, बस इतनी लंबी थी कि मोड़ने के लिए ड्राइवर को काफी मशक्कत भी करनी पड़ी. वहीं, पिता का कहना है कि मेरे घर आया नन्हा फरिश्ता.
क्या है मामला?
इस दौरान प्रसूता के पति बलराम का कहना है कि वे दोनों ही लोग दिल्ली में रहते थे. जहां वो मजदूरी का काम कर रहे थे. पत्नी की तबियत खराब हो गयी लेकिन दिल्ली में इलाज नहीं हो पा रहा था जिसके चलते वो दिल्ली से सागर वापस जा रहे थे, इसी बीच अचानक पत्नी को दर्द हुआ और बस में ही डिलीवरी हो गयी. बलराम ने बताया उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया है और ये उसका चौथा बच्चा है.
बस ड्राइवर की मानवीयता देखते हुए बलराम ने कहा ड्राइवर बहुत अच्छा इंसान है. उसने मेरे एक बार कहने पर ही एम्बुलेंस बुला दी. मुझे अस्पताल तक छोड़कर गया.
बस ड्राइवर बोला- बस को मोड़ कर लाया छतरपुर
वहीं, बस ड्राइवर धर्मवीर सिंह परमार ने बताया कि अचानक मुझे बताया गया जिसके तुरंत बाद ही मैंने बस बैक कर छतरपुर ले आया, जिसमें किसी की भी जान नहीं जानी चाहिए, इतना ही नहीं बस में अन्य लोग भी सवार थे. इसके बावजूद भी ड्राइवर बस को मोड़ कर छतरपुर ले आया क्योंकि चलाते वक्त ड्राइवर ही बस का मालिक होता है. फिलहाल, दोनों मां-बेटी स्वस्थ सुरक्षित हैं और जिला अस्पताल में भर्ती हैं.