Prajatantra: चुनाव से पहले किसानों ने बढ़ाई BJP की टेंशन, केजरीवाल की क्या है रणनीति?

दिल्ली एक किले में तब्दील हो गई है। दो केंद्रीय मंत्रियों के साथ उनकी बैठक बेनतीजा रहने के बाद 200 से अधिक यूनियनों से जुड़े किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन किया है। लोकसभा चुनाव 2024 से कुछ महीने पहले विरोध मार्च के लिए राष्ट्रीय राजधानी और इसकी सीमाओं को मजबूत कर दिया गया है। ठीक तीन साल पहले, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के एक वर्ग ने नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल तक विरोध प्रदर्शन किया था। किसानों के दिल्ली कूच करने के बीच अंबाला के समीप शंभू में पंजाब से लगती सीमा पर लगाए अवरोधक तोड़ने की कोशिश करने वाले किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े। किसानों के प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली का लाल किला पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।  इसे भी पढ़ें: Prajatantra: NDA का कुनबा हो रहा मजबूत, नीतीश के बाद TDP और अकाली की भी होगी वापसी!अब एक बार फिर से क्योंएमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के अलावा, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों व कृषि मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफ करने, पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने, लखीमपुरी खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘‘न्याय’’, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 बहाल करने और पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने उनकी मांगों को लेकर केंद्र के साथ गतिरोध के संदर्भ में कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर कोई नयी समिति नहीं चाहते क्योंकि किसी भी समिति का मतलब इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालना होगा। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक में शामिल हुए केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन गई है और सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि शेष मुद्दों को एक समिति के गठन के माध्यम से सुलझाया जाए। इस साल लोकसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव से पहले किस नेता सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं इसी कड़ी में इस विरोध प्रदर्शन को भी देखा जा सकता हैभाजपा की टेंशनपिछले दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में शानदार सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी उत्साहित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के झाबुआ में एक रैली में आगामी चुनावों के लिए अपने ’24 में 400 पार’ आह्वान को दोहराया। लेकिन किसानों के विरोध ने बीजेपी को चिंता में डाल दिया होगा। विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत हिंदी पट्टी के सभी राज्यों से हैं। पंजाब लोकसभा में 13 सदस्य भेजता है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2019 में भाजपा को राज्य में 9.73 प्रतिशत वोट हासिल हुई थी और केवल दो सीटें मिली थी। यहां पार्टी इस बार अच्चे रिजल्ट की उम्मीद कर रही है लेकिन किसानों का विरोध प्रदर्शन मुश्किलें बढ़ा सकता है। इसकी वजह से भाजपा को हरियाणा में 2019 का चुनाव दोहराना मुश्किल हो सकता है जब उसने राज्य की सभी 10 लोकसभा सीटें जीती थीं। किसानों के विरोध प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश से भी भागीदारी देखी गई है, जो लोकसभा में 80 सदस्य भेजता है। भाजपा ने 2014 में 72 और 2019 के आम चुनाव में 62 सीटें जीती थीं। लेकिन पर्दर्शन से मामला बिगड़ सकता है। आप का समर्थनदिल्ली सरकार ने किसानों के मार्च के मद्देनजर बवाना स्टेडियम को अस्थायी जेल में तब्दील करने के केंद्र सरकार के अनुरोध को ठुकरा दिया है। दिल्ली सरकार ने अस्थायी जेल बनाने के लिए केंद्र के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि किसानों की मांग सही है, उन्हें गिरफ्तार करना गलत है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जवाब आदमी पार्टी पूरी तरीके से किसानों के साथ खड़ी है। इससे पहले भी जब 2021-22 में किसानों का प्रदर्शन हुआ था तब भी दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार उसके साथ मुस्तैदी से खड़ी रही थी। आम आदमी पार्टी को इसका फायदा पंजाब के विधानसभा चुनाव में मिला। पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार बनाने में कामयाब रही। किसानों के प्रदर्शन में पंजाब के किसान नेताओं की भूमिका अहम रही है। आम आदमी पार्टी इसे लगातार भागते रही है अब आम आदमी पार्टी की नजर हरियाणा पर है। ऐसे में हरियाणा के किसानों को साधने के लिए आम आदमी पार्टी कहीं ना कहीं किसानों के साथ एक बार फिर से खड़ी होती दिखाई दे रही है। इसे भी पढ़ें: Prajatantra: लालू की चाल में फंसे नीतीश! कांग्रेस विधायक हैदराबाद शिफ्ट, क्या बिहार में भी होगा खेल? विपक्ष ने क्या कहा?कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि बातचीत करके सरकार ने जो किसानों से समझौता किया था उन बातों की मांगो को सरकार बातचीत के जरिए समाधान करने का काम करे। किसानों की MSP की मांग जायज मांग है, उनके साथ बैठकर शांति पूर्ण तरीके से समझौता किया जाए। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि किसान ही आर्थिक गतिविधि को पैदा करते हैं। किराने की दुकान तब चलती है जब किसान की जेब में पैसा होता है… किसानों के साथ लगातार ये अन्याय होता रहा है। सबसे न्यूनतम मांग तो MSP की होनी चाहिए। कम से कम उन्हें सही भाव तो मिले। ये बहुत आवश्यक है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पूरा बॉर्डर सील कर दिया गया है जैसे ये कोई दुश्मन देशों का बॉर्डर हो… हरियाणा-पंजाब, दिल्ली से सटे राजस्थान और उत्तर प्रदेश से सटे दिल्ली के पड़ोसी जिलों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं वो भी तब जब बोर्ड पेपर सर पर हैं… दिल्ली के चारो तरफ के जिलो में मौखिक हिदायत दी गई है कि किसी किसान के ट्रैक्टर में 10 लीटर से ज्यादा डीज़ल ना डाला जाएगा… चौतरफा जुल्म का आलम है।