Prabhasakshi NewsRoom: Bilawal को Jaishankar की फटकार Pak Media में छाई, पाक विपक्ष बोला- सरकार ने देश की नाक कटाई

एससीओ बैठक में भाग लेने गोवा आये पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जिस तरह झाड़ लगाई है उसकी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। पाकिस्तान की सरकार और विपक्ष को पहले ही आशंका लग रही थी कि कहीं अनुभवहीन बिलावल भुट्टो एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में देश की नाक नहीं कटवा दें और आखिरकार आशंका सही साबित हुई। अपनी स्पष्टवादिता और मुंह पर खरी खरी सुनाने के लिए मशहूर जयशंकर ने बिलावल पर जरा भी रहम नहीं किया और साफ कह दिया कि पाकिस्तान से अब बात सिर्फ पीओके पर ही होगी और जम्मू-कश्मीर में जी-20 की बैठक होकर रहेगी। जयशंकर ने अनुच्छेद 370 को इतिहास की बात बताते हुए पाकिस्तान को सलाह भी दी है कि वह नींद से जागे और सच्चाई को स्वीकार करे। जयशंकर की बिलावल को यह लताड़ पाकिस्तानी मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई है। पाकिस्तानी मीडिया अपनी सरकार की विदेश नीति की पहले ही आलोचना कर रहा था और अब बिलावल को भारत में जिस तरह की डाँट पड़ी है उसको देखते हुए भी पाकिस्तान सरकार की आलोचना की जा रही है। यही नहीं पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर भी लोग बिलावल की खूब आलोचना कर रहे हैं और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की दाद दे रहे हैं। पाकिस्तानी विपक्षी नेता भी कह रहे हैं कि शहबाज शरीफ सरकार ने देश की नाक कटा दी है।हम आपको बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन की बैठक से इतर भारत और पाकिस्तान की कोई द्विपक्षीय मुलाकात तो नहीं हुई लेकिन एससीओ बैठक में दोनों ने एक-दूसरे पर परोक्ष रूप से निशाना साधा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी पर ‘‘आतंकवाद उद्योग का प्रवर्तक, आतंकवाद को उचित ठहराने वाला और आतंकवाद का प्रवक्ता” होने का आरोप लगाया। जयशंकर ने एससीओ बैठक में भाग लेने भारत आए पाकिस्तानी विदेश मंत्री को तब आड़े हाथों लिया जब इससे पहले बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत पर निशाना साधते हुए ‘‘कूटनीतिक फायदे के लिए आतंकवाद को हथियार’’ के तौर पर इस्तेमाल नहीं करने का आह्वान किया। इसके बाद एक संवाददाता सम्मेलन में जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर बिलावल के बयान से अनजाने में एक मानसिकता का खुलासा हुआ है। उन्होंने कहा कि बिलावल से एससीओ सदस्य राष्ट्र के एक विदेश मंत्री के अनुरूप व्यवहार किया गया।इसे भी पढ़ें: SCO में जयशंकर की स्पष्टवादिता ने कमाल कर दिया, China और Pakistan को मुँह पर साफ-साफ सुनाने में जरा भी नहीं हिचके Jaishankarपाकिस्तान के आतंकवाद से निपटने पर जयशंकर ने कहा कि उसकी विश्वसनीयता इस मामले में उसके विदेशी मुद्रा भंडार से भी तेज गति से गिर रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या इस समस्या से निपटने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत हो सकती है, जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद के शिकार लोग आतंकवाद पर चर्चा करने के लिए आतंकवाद के अपराधियों के साथ नहीं बैठते हैं।” जयशंकर ने कहा, ‘‘आतंकवाद के पीड़ित आतंकवाद के कृत्यों का मुकाबला करने के लिए अपना बचाव करते हैं। वे इसे अवैध ठहराते हैं। और यही हो रहा है। यहां आकर इन पाखंडी शब्दों का इस्तेमाल करना कि मानो हम एक ही नाव पर सवार हैं। मेरा मतलब है कि वे आतंकवादी कृत्य कर रहे हैं।’’ जयशंकर ने भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को पाकिस्तान के समर्थन का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा, ‘‘भारत का दृढ़ विश्वास है कि आतंकवाद को बिल्कुल उचित नहीं ठहराया जा सकता है। बिना किसी भेदभाव के आतंकवाद के सभी स्वरूपों और इसके वित्तपोषण को रोकना चाहिए।’’ सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे जयशंकर ने परोक्ष रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए कहा कि आतंकवाद की अनदेखी करना समूह के सुरक्षा हितों के लिए हानिकारक होगा और जब दुनिया कोविड-19 महामारी तथा उसके प्रभावों से निपटने में लगी थी, तब भी आतंकवाद की समस्या ज्यों की त्यों बनी रही।जयशंकर ने बिलावल, चीन, रूस, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के अपने समकक्षों की मौजूदगी में कहा, ‘‘हमें किसी भी व्यक्ति या देश को सरकार से इतर तत्वों के पीछे छिपने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद की अनदेखी करना समूह के सुरक्षा हितों के लिए नुकसानदेह होगा। हमारा दृढ़ विश्वास है कि आतंकवाद को कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता। सीमा पार आतंकवाद समेत इसके सभी स्वरूपों का खात्मा किया जाना चाहिए।’’ विदेश मंत्री ने कहा कि बिलावल एससीओ सदस्य देश के विदेश मंत्री के रूप में भारत आए और यह बहुपक्षीय कूटनीति का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “इसमें इससे ज्यादा कुछ मत देखिए।” गोवा में भारत द्वारा आयोजित एससीओ सम्मेलन में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद सहित सभी तरह के आतंकवाद को रोका जाना चाहिए। वहीं, बिलावल ने ‘‘अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन’’ का मुद्दा उठाया, जिसे कश्मीर के परोक्ष संदर्भ के रूप में देखा गया। हम आपको बता दें कि एससीओ मानदंड द्विपक्षीय मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं देते हैं और दोनों विदेश मंत्रियों ने किसी भी देश का नाम नहीं लिया तथा परोक्ष रूप से टिप्पणियां कीं। बिलावल ने कहा, ‘‘हमें अपनी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने और अपने लोगों के लिए एक नया भविष्य तैयार करने की दिशा में स्पष्ट होना चाहिए, जो संघर्ष को कायम रखने में नहीं, बल्कि संघर्ष के समाधान पर आधारित हो।’’ उन्होंने कोई खास संदर्भ नहीं दिया, न ही संदर्भ को स्पष्ट किया, लेकिन उनकी टिप्पणी को कश्मीर पर भारत की नीति के परोक्ष संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है।आतंकवाद से लड़ने के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए, बिलावल ने परोक्ष रूप से भारत पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कूटनीतिक फायदे के लिए आतंकवाद को हथियार बनाने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें सरकार से इतर तत्वों को सरकारी तत्वों के साथ जोड़ना बंद करना चाहिए।’’ पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने खतरे से निपटने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण की वकालत की और कहा कि यह सदस्य देशों की संयुक्त जिम्मेदारी है। उन्होंने आतंकी हमले में अपनी मां एवं पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के मारे जाने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं इस विषय पर बोलता हूं, तो मैं न केवल पाकिस्तान के विदेश मंत्री के रूप में बोलता हूं, जिसके लोगों ने हमलों में सबसे ज्यादा नुकसान उठाया है, मैं उस बेटे के रूप में भी बोलता हूं जिसकी मां की हत्या आतंकवादियों द्वारा कर दी गई थी।’’जहां तक दोनों देशों के संबंधों की बात है तो हम आपको बता दें कि अगस्त 2019 में भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में काफी गिरावट आई।