P-8I: बाज जैसी नजर, समंदर से उड़ अब LAC पर मौत बन मंडरा रहा चीन के लिए ‘काल’

नई दिल्ली: चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत उसकी हर नापाक हरकत पर नजर बनाए हुए है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत ने बॉर्डर पर निगरानी को और भी बढ़ा दिया है। LAC पर चीन की हरकतों पर नजर रखने के लिए भारतीय सेना नौसैना के उपकरणों का इस्तेमाल कर रही है। भारतीय सेना के अनुरोध पर नौसैना ने चीन से लगती सीमा पर P-8I और सी गार्जियन ड्रोन्स तैनात किए हैं। आमतौर पर इनका इस्तेमाल नौसेना समुद्र में लंबी दूरी की निगरानी के लिए करती है। P-8I विमान और सी , दोनों अपने इलेक्ट्रो-ऑप्टिक और अन्य उन्नत सेंसर के साथ हाई-रिजॉल्यूशन इमेजरी के लाइव फीड प्रदान करने में सक्षम हैं। अमेरिकी सेना इसका इस्तेमाल करती है और इंडियन नेवी की ओर से भी इसका इस्तेमाल होता है। अब LAC पर इसकी मदद से चीन की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। चीन और भारत के बीच इस वक्त तनाव है और 9 दिसंबर की घटना के बाद उस पर यकीन बिल्कुल भी नहीं किया जा सकता है।

3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी के पश्चिमी (लद्दाख) और पूर्वी (सिक्किम, अरुणाचल) दोनों क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जा रहा है। गलवान के बाद भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में लगातार तीसरी सर्दियों में 50 हजार से अधिक सैनिकों की तैनाती की है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में 9 दिसंबर को झड़प के बाद इसमें और भी इजाफा हुआ है।

चीनी सैनिकों की हर मूवमेंट पर करीब से रखी जाएगी नजर


P-8I न केवल समुद्री निगरानी बल्कि जमीन और हवाई निगरानी में भी मदद करता है। दुश्मनों की जासूसी के साथ ही इसका उपयोग हमला करने के लिए भी किया जाता है। यह दुश्मन के जंगी जहाज और पनडुब्बी को पलक झपकते नष्ट कर देता है। इस विमान में हवा से दागी जाने वाली मिसाइलें और टॉरपीडोस को तैनात किया जाता है। यह 9 हजार किलोग्राम तक वजन उठाने में सक्षम है। इसकी कॉम्बैट रेंज 2 हजार किलोमीटर से अधिक है और यदि इसे एंटी-सबमरीन वारफेयर में शामिल किया जाता है तो यह 4 घंटे तक कॉम्बैट उड़ान भरने में सक्षम है। सी-गार्जियन ड्रोन अमेरिका समेत उसकी सहयोगी सेनाओं का अहम रक्षा उपकरण है। इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये ड्रोन लगातार 40 घंटे तक उड़ान भरते हुए दुश्मन की किसी भी हरकत पर नजर रखने में सक्षम है।

चीन के पहले वाले स्टैंड में नहीं आया है कोई बदलाव

डोकलाम के बाद भारत और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। पूर्वी लद्दाख में चीन अब भी पुराने वाले मोड में है और वह लगातार सैनिकों की तैनाती बढ़ा रहा है। पिछले 30 महीनों का उपयोग उसने सैनिकों की संख्या बढ़ाने और सीमा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया है। नौसेना के पास वर्तमान में 12 P-8I विमान हैं, जिन्हें अमेरिका से 3.2 बिलियन डॉलर में खरीदा गया है। जो पश्चिमी और पूर्वी समुद्री तटों पर ISR मिशन के लिए गोवा में INS हंसा और Arakkonam (तमिलनाडु) में INS राजली में तैनात हैं। नौसेना के पास सितंबर 2020 से अमेरिकी फर्म जनरल एटॉमिक्स से लीज पर लिए गए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन ड्रोन भी हैं।

इस खास ड्रोन का भी है इंतजार

दुनिया का सबसे अत्याधुनिक माना जाने वाला ड्रोन एमक्यू-9बी ड्रोन भारत को मिलने के बाद पड़ोसी देशों की नींद उड़ने वाली है।
भारत की अमेरिका से हथियारबंद एमक्यू-9बी ड्रोन हासिल करने की भी लंबे समय से योजना है। लेकिन 30 ड्रोन (नौसेना, भारतीय वायुसेना और सेना के लिए प्रत्येक के लिए 10) के लिए प्रस्तावित सौदे की उच्च लागत $ 3 बिलियन (24,000 करोड़ रुपये) है, जिसके कारण अधिग्रहण किए जाने वाले ड्रोन की संख्या पर पुनर्विचार हुआ है। पाकिस्तान हो या ड्रैगन दोनों देशों की नजर भारत के इस डील पर है। इस ड्रोन के आने के बाद इसका इस्तेमाल मुख्य रुप से चीन सीमा और हिंद महासागर वाले क्षेत्र में किया जाएगा।