आप तक बस गुठली पहुंचेगी, इस बार मौसम ने चूस लिया मशहूर मलिहाबादी आम!

लखनऊः देश के सबसे बड़े आम उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में इस बार मौसम ने खूब कलाबाजियां दिखाईं। तापमान में बार-बार उतार-चढ़ाव ने आम का स्वाद फीका कर दिया है। बताया जा रहा है कि मौसम की आंख-मिचौली से आम की पैदावार में भारी गिरावट आने वाली है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर साल फसल के नुकसान की जो औसत दर 10 फीसदी हुआ करती थी, वह इस साल बढ़कर 30 से 40 प्रतिशत तक जा सकती है। मलिहाबाद जैसे कुछ स्थानों पर आम के किसानों ने बताया है कि मौसम की वजह से उनकी फसल 80 फीसदी तक प्रभावित हुई है।मेरठ के सरदार वल्लभ भाई पटेल केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (एसवीबीपीयू) में कृषि वैज्ञानिक प्रफेसर आरएस सेंगर ने बताया कि आम की फसल पर फरवरी में लगातार हुए तापमान में बदलाव ने कहर ढाया है। फरवरी-मार्च में तापमान में अचानक वृद्धि से परागण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया प्रभावित हुई। इससे मधुमक्खियों, तितलियों और अन्य कीड़ों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा। दूसरा, अप्रैल महीने में तापमान सामान्य से नीचे चला गया, जिससे फलों का विकास और रुक गया। उन्होंने बताया कि आम के प्राकृतिक रूप से पकने को यह निश्चित तौर पर प्रभावित करता है।सिंगापुर से इंग्लैंड तक होता है निर्यातऔसतन, भारत में सालाना 23 लाख हेक्टेयर जमीन पर 279 लाख टन आम का उत्पादन होता है, जो दुनिया के कुल आम उत्पादन का लगभग 55% है। यूपी में देश के आम का 23% हिस्सा उत्पादित होता है। इसकी मात्रा 48 लाख टन से भी ज्यादा है। लखनऊ, सहारनपुर और मेरठ राज्य यूपी में प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्र हैं। पिछले कुछ सालों में राज्य से आम की किस्मों को सिंगापुर, मलेशिया, इंग्लैंड और दुबई में भी निर्यात किया गया है।भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के हॉर्टिकलचर विभाग में सहायक महानिदेशक डॉ. वीबी पटेल इसके लिए बेमौसम बारिश के पैटर्न को जिम्मेदार ठहराते हैं, जिसकी वजह से भारी मात्रा में आम के फल अनफर्टिलाइज हो गए। उन्होंने बताया कि आम के फर्टिलाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण Stigmatic fluid और pollen बेमौसम बारिश की वजह से धुल गए। इससे आमों के आकार और उनके उत्पादन पर काफी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अभी तक तो हमारे पास कोई सटीक आंकड़ा नहीं है लेकिन नुकसान काफी बड़ा है।40 से 50 फीसदी फसल खराबआम की खेती के लिए जाने जाने वाले लगभग सभी क्षेत्रों को हाल के दिनों में नुकसान उठाना पड़ा है। इनमें लखनऊ, प्रतापगढ़, मलिहाबाद, बुलंदशहर और बाराबंकी शामिल हैं। अमरोहा के किसान नदीम सिद्दीकी ने बताया कि बारिश तो फिर भी ठीक है। तूफान भी ठीक है लेकिन ओलावृष्टि आमों के लिए जानलेवा होती है। ओले तब पड़ने लगे थे, जब फूल आने बंद हो गए थे और फल लगना शुरू हुआ था। इससे ही कम से कम 40-50% फसल खराब हो गई थी। सिद्दीकी ने कहा कि मैं सरकार से अपील करता हूं कि आम को भी फसल बीमा योजना में शामिल किया जाए।आम का उत्पादन करने वाले किसानों ने बताया कि मलिहाबाद में कम से कम 19 मार्च तक बंपर फसल हुई थी। हालांकि, 21 मार्च और 22 मार्च को हुई अप्रत्याशित बारिश ने आम के ‘बौर’ (फूलों के गुच्छे या गुच्छे) को फल बनने से पहले ही नष्ट कर दिया। मलिहाबाद में आम उत्पादकों की सोसाइटी बनाने वाले उपेंद्र सिंह ने कहा कि मार्च में अनियमित मौसम ने 70% फूलों को नष्ट कर दिया था। बाकी बचे 30% 26-27 अप्रैल को तूफान और बारिश के कारण खराब हो गए। मार्च और अप्रैल के महीनों में अच्छी तरह से बढ़ने के लिए आमों को 27 से 35 सेल्सियस के बीच तापमान की आवश्यकता होती है। इससे कम या ज्यादा तापमान फल को नुकसान पहुंचाता है। बादल, ज्यादा नमी और तेज हवाएं भी इसके लिए खतरनाक हैं। मलिहाबाद के एक किसान विजय सिंह मल्ल ने कहा कि तापमान में बदलाव ने इस बार ऐसे कीड़ों की भी संख्या बढ़ाई, जिन्होंने बड़ी मात्रा में फसल को नष्ट किया।