ओह गजब! असली बाहुबली तो यह है, दांतों से पूरी ट्रेन ही खींच लाता है

नई दिल्ली: फोटो खींचने के लिए कैमरामैन तैयार खड़े थे, वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू हो गई थी। नजरें एकटक रेल की पटरियों पर खड़ी भारी भरकम ट्रेन पर थी। सभी सोच रहे थे कि क्या ट्रेन अपनी जगह से टस से मस होगी या नहीं। अगले ही कुछ पलों में इतिहास बन गया। हाड़-मांस के साधारण से दिखने वाले एक शख्स ने बड़े से बड़े ‘खली’ को अपने करतब से हैरान कर दिया था। जी हां, वो तारीख थी 18 अक्टूबर 2003 और भारतीय मूल के वेलू राधाकृष्णन ने अपने दांतों से 260 टन वजनी ट्रेन को खींच दिया था। अगले दिन अखबार का पहला पन्ना वेलू का गुणगान कर रहा था। दुनिया हैरान थी कि यह अजूबा इंसान कौन है और कैसे उसके दांतों में इतनी पावर आ गई कि ट्रेन को हिला सके? यह सच्ची घटना इंसान की एकाग्रता और अभ्यास का जीता जागता उदाहरण है।

दांतों से सबसे भारी ट्रेन खींचने का रेकॉर्ड
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दांतों से सबसे भारी ट्रेन खींचने का कीर्तिमान लिखा गया। उस दिन की तस्वीरें फ्रेम कराई गईं। वेलू राधाकृष्णन ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि दुनियावाले हैरान रह गए। बड़े से बड़ा सूमो पहलवान इस भारतवंशी की बहादुरी के आगे बौना पड़ गया। वेलू रेल की पटरियों पर बैठे और चंद कदमों पर खड़ी ट्रेन को दांतों से खींच लिया। देखने वाले भी कह उठे, ‘स्टील के दांत हैं क्या भाई!’ वेलू राधाकृष्णन मलेशिया के नागरिक हैं और दुनिया उन्हें ‘किंग टूथ’ के नाम से जानती है। हां, यह भी जान लीजिए कि जिस ट्रेन को उन्होंने खींचा था उसमें केवल इंजन नहीं था, बल्कि सात कोच भी जुड़े हुए थे।

  • कुआलालंपुर रेलवे स्टेशन पर दांत से खींचीं दो ट्रेनें
  • 4.2 मीटर (13 फीट 9 इंच) की दूरी तक 260.8 टन का वजन खींचा
  • 18 अक्टूबर 2003 का यह कारनामा गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज

आमतौर पर लोग अमरूद या ईख काट लेते हैं तो अपने दांतों की मजबूती का बखान करते नहीं थकते। कुछ लोग दांतों से कसकर बंधी गांठ खोल लेते हैं। कुछ ऐसे बहादुर भी हैं जो दांतों से बैग या मोबाइल दबाकर चल पड़ते हैं लेकिन दांतों में रस्सी फंसाकर ट्रेन खींचने वाले इतिहास लिखते हैं। वेलू ने दो केटीएम कम्यूटर ट्रेनों को अपने दांतों से खींचा था। कुआलालंपुर रेलवे स्टेशन पर रेल की पटरियों के बीच बैठकर उन्होंने 4.2 मीटर की दूरी तक 260.8 टन वजनी ट्रेनों को हिलाया था।

4.2 मीटर खींची ट्रेन
बाकायदा प्लेटफॉर्म पर दूरी नापने के लिए मीटर लगाया गया था। जैसे ही वेलू राधाकृष्णन ने ताकत लगाई और ट्रेन के जाम पहिये खुले तो दूरी नापी जाने लगी कि ट्रेन अपनी जगह से कितनी दूरी चली। वेलू दांतों में फंसी स्टील की रस्सी पर फोकस करते हुए जोर लगा रहे थे, पटरी के दोनों ओर प्लेटफॉर्म पर खड़े लोग तालियां बजा रहे थे। जांच दल ने ट्रेन की पहले की स्थिति और बाद की स्थिति को रिकॉर्ड किया। सब कुछ कैमरे के सामने हो रहा था। वेलू ने 4.2 मीटर तक ट्रेन को खींचा था। कुछ ही देर बाद वेलू ने हाथ उठाकर लोगों का अभिवादन किया।

फिर तोड़ा अपना ही रेकॉर्ड
मलेशिया में राजा गीगी के नाम से पुकारे जाने वाले वेलू यहीं तक नहीं रुके। देश के 50वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या यानी 30 अगस्त 2007 को वेलू राधाकृष्णन ने अपना ही रेकॉर्ड तोड़ दिया। इस बार ओल्ड कुआलालंपुर रेलवे स्टेशन पर उन्होंने यह स्टंट किया। गर्दन की नसें तनीं, चेहरे की भाव-भंगिमा बदली और वेलू ने 297.1 टन वजनी ट्रेन को हिला दिया। ट्रेन को उन्होंने 2.8 मीटर तक दांतों से खींचा।

  • इस बार 297.1 टन वजनी ट्रेन खींची
  • 30 अगस्त 2007 को अपना ही रेकॉर्ड तोड़ा
  • इस बार 2.8 मीटर तक दांतों से ले गए ट्रेन

टूथपेस्ट कौन सा करते हैं?
मलेशिया के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री मैक्सिमस ओंकिली भी रेलवे स्टेशन पर यह कारनामा देख रहे थे। बाद में उन्होंने मीडिया से कहा, ‘मुझे नहीं पता कि वह (वेलू) कौन सा टूथपेस्ट करते हैं लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि कई कंपनियां अब उनसे अपने प्रोडक्ट का प्रचार करने के लिए दौड़ पड़ेंगी।’

वेलू खाते क्या हैं?
अक्सर लोगों में यह भ्रांति रहती है कि साग-सब्जी खाने वाले ताकतवर नहीं होते हैं। ट्रेन को दांतों से खींचने वाले भारतवंशी की पावर का राज जानने में आपकी भी दिलचस्पी होगी। आप शायद हैरान रह जाएंगे कि वेलू राधाकृष्णन शुद्ध शाकाहारी हैं। जब मीडिया ने राधाकृष्णन से पूछा कि आपने यह कैसे कर लिया तो उन्होंने इसका श्रेय ‘ध्यान यानी मेडिटेशन’ को दिया। उन्होंने 14 साल की उम्र में अपने भारतीय गुरु से ध्यान की ताकत को सीखा-समझा था। गुरु ने उन्हें अपनी पावर को शरीर के एक अंग पर केंद्रित करने के गुर सिखाए थे। ट्रेन खींचने से पहले वह अपनी आंखें बंद करते और लंबी सांस लेते। कुछ पल में वह अपने शरीर को बैलेंस कर लेते।

रूटीन की बात करें तो वेलू रोज सुबह 4.30 बजे उठ जाते हैं और कम से कम 25 किमी तक दौड़ लगाते हैं। उसके बाद 250 किग्रा तक के वजन उठाकर एक्सरसाइज करते हैं। इस दौरान वह जबड़े का अभ्यास करना नहीं भूलते।

वेलू यूं ही ‘अजूबे इंसान’ नहीं बने हैं, इसके पीछे उनकी घोर तपस्या छिपी है। इस बात को समझते हुए आप कार-जीप खींचने की भी कोशिश मत कीजिएगा, दांत टूट सकते हैं।