OBC वर्ग को मिलेगा न्याय, आरक्षण की विसंगतियां होंगी दूर, गहलोत ने दी सैद्धांतिक मंजूरी

राजस्थान में लंबे समय से ओबीसी आरक्षण की विसंगति को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच एक अच्छी खबर है. हाल में राजधानी जयपुर में हुए विशाल प्रदर्शन के बाद अब गहलोत सरकार हरकत में आई है. जानकारी मिली है कि सीएम अशोक गहलोत ने ओबीसी आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने के मामले में अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी है. इसकी जानकारी गोविंद सिंह डोटासरा ने दी. वहीं डोटासरा ने ओबीसी के मसले पर बनी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों से बात की और सकारात्मक नतीजा निकलने की उम्मीद जताई. डोटासरा ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वार्ता के दौरान उनके सामने रखी मांगों पर सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति जारी कर दी है जिसके बाद अब जल्द ही विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार की ओर से आदेश जारी किया जाएगा.
बता दें कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग को 21 फीसदी आरक्षण मिला हुआ है लेकिन साल 2018 में सरकार के कार्मिक विभाग ने ओबीसी की भर्तियों में भूतपूर्व सैनिक का कोटा निर्धारित कर दिया था जिसके बाद भूतपूर्व सैनिक इस पूरे कोटे का लाभ ले रहे हैं और ओबीसी अभ्यर्थियों को इससे आपत्ति है.
जल्द निकलेगा समाधान : डोटासरा
राजस्थान में ओबीसी वर्ग को 21 फीसदी आरक्षण का लाभ नहीं मिलने पर ओबीसी वर्ग से जुड़े हजारों युवा पिछले कई महीने से आंदोलनरत हैं. वहीं सरकार के पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने भी मोर्चा खोल रखा है. हाल में जयपुर में चौधरी और कई सामाजिक दलों के नेताओं की अगुवाई में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था.
वहीं डोटासरा ने रविवार को जानकारी देते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण की विसंगति को लेकर जो समिति बनी थी उसके पदाधिकारियों के साथ 3-4 दौर की बैठकें हो चुकी हैं जिसमें वह खुद भी शामिल रहे हैं और सरकार जल्द ही समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है.
ओबीसी वर्ग की क्या है मांग ?
ओबीसी वर्ग के आंदोलनरत युवाओं का कहना है कि सरकार भूतपूर्व सैनिकों के कोटे को आरक्षित वर्ग से काटना बंद करते हुए सरकारी भर्तियों में 2018 की पुरानी व्यवस्था लागू करे. वहीं इस आंदोलन के लिए बनी ओबीसी आरक्षण संघर्ष समिति राजस्थान के मुताबिक भूतपूर्व सैनिकों मैरिट कुल पदों पर बनाई जाती है जिसमें 36% बिना आरक्षित पदों में से कटौती की जाए.
वहीं ओबीसी के मूल आरक्षण कोटे को सुरक्षित रखा जाए. इसके अलावा रोस्टर व्यवस्था को प्रभारी रूप से लागू करने और ओबीसी को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने सहित मांगे शामिल हैं.