मेरी तरह कोई नहीं, सब 90-100 बनाकर ही खुश हो जाते हैं, वीरेंद्र सहवाग की खरी-खरी

नई दिल्ली: संन्यास के नौ साल बाद भी वीरेंद्र सहवाग का कोई विकल्प टीम इंडिया को नहीं मिल पाया है। आज भी उनकी बेखौफ बल्लेबाजी की तारीफों के पुल बांधे जाते हैं। पूर्व इंडियन ओपनर ने अपने अनोखे, तेजतर्रार और निडर रवैये से टेस्ट क्रिकेट में तब क्रांति ला दी थी, जब बाजबॉल जैसा कोई शब्द भी वर्ल्ड क्रिकेट ने नहीं जाना था। वीरू ने टेस्ट क्रिकेट में कई यादगार पारियां खेली हैं। दो तिहरे शतक, कई दोहरे शतक कुल मिलाकर उनके खेलने का तरीका ही बेजोड़ था।आज भी जब कोई युवा बल्लेबाज विस्फोटक बैटिंग करने लगता है तो उसकी तुलना सहवाग से की जाती है। बीच-बीच में कोई न कोई पूर्व क्रिकेटर ‘ही रिमाइंड्स मी ऑफ सहवाग’ मुहावरा लेकर आ जाता है। मौजूदा भारतीय क्रिकेटर्स में दो प्लेयर्स यानी पृथ्वी शॉ और ऋषभ पंत की ही सबसे ज्यादा सहवाग से तुलना होती है। हालांकि, खुद सहवाग का मानना है कि मौजूदा भारतीय सेट-अप में कोई भी प्लेयर ऐसा नहीं है जिसकी बल्लेबाजी शैली उनसे मिलती-जुलती हो। News18 के एक कार्यक्रम में सहवाग ने कहा, ‘मैं टेनिस बॉल क्रिकेट खेलता था, जहां मेरी मानसिकता बाउंड्री मारकर रन बनाने की होती थी। मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक ही टेम्पलेट के साथ खेलता था और गिनती करता था कि मुझे शतक बनाने के लिए कितनी बाउंड्रीज की और जरूरत है। अगर मैं 90 पर हूं और शतक बनाने के लिए 10 गेंद लेता हूं तो विपक्षी के पास मुझे आउट करने के लिए 10 गेंदें होती हैं, यही वजह है कि मैं बाउंड्री के लिए जाता था और मुझे ट्रिपल फिगर-मार्क तक पहुंचने से रोकने के लिए उन्हें केवल दो गेंद दी।’ सहवाग ने आगे कहा कि, ‘मुझे नहीं लगता कि भारतीय टीम में मेरी तरह बल्लेबाजी करने वाला कोई खिलाड़ी है। मेरे दिमाग में जो दो खिलाड़ी आए हैं, वे पृथ्वी शॉ और ऋषभ पंत हैं। टेस्ट क्रिकेट में मैं जिस तरह की बल्लेबाजी करता था, ऋषभ पंत उसके थोड़ा करीब हैं, लेकिन वह 90-100 से संतुष्ट है और मैं 200, 250 और 300 का स्कोर करता था और फिर संतुष्ट होता था।’