मुंबई रेस कोर्स में थीम पार्क पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं: महाराष्ट्र सरकार ने अदालत से कहा

महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय को बताया कि उसने दक्षिण मुंबई में महालक्ष्मी रेस कोर्स में 120 एकड़ जमीन पर थीम पार्क के निर्माण पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है और स्पष्ट किया कि इस संबंध में केवल एक प्रस्ताव पर विचार किया गया है।
सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे महाधिवक्ता वीरेंद्र सर्राफ ने न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ के समक्ष कहा कि थीम पार्क के लिए इलाके में घुड़दौड़ ट्रैक के इस्तेमाल के खिलाफ दायर तीन याचिकाएं समय से पहले दाखिल की गईं।
रेस कोर्स में एक थीम पार्क विकसित करने के महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के प्रस्ताव/ निर्णय को चुनौती देते हुए पर्यावरणविद होने का दावा करने वाले व्यक्तियों द्वारा पिछले सप्ताह याचिकाएं दायर की गई थीं।
याचिकाओं में कहा गया है कि निर्णय ‘‘मनमाना, एकतरफा और स्पष्ट रूप से अवैध’’ था। उन्होंने कहा कि रेस कोर्स शहर के कुछ बचे हुए बड़े खुले स्थानों में से एक है और इसे थीम पार्क में परिवर्तित करना पर्यावरणीय आपदा होगी।
याचिकाकर्ताओं ने दिसंबर 2023 में हुई एक बैठक का हवाला दिया है, जिसमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीएमसी और पट्टे पर रेस कोर्स संचालित करने वाली रॉयल वेस्टर्न इंडिया टर्फ क्लब लिमिटेड (आरडब्ल्यूआईटीसी) के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया था। उन्होंने दावा किया कि इस बैठक में रेस कोर्स में एक थीम पार्क विकसित करने का निर्णय लिया गया।
महाधिवक्ता सर्राफ ने अदालत को बताया कि याचिकाएं समय से पहले दायर की गई हैं क्योंकि परियोजना पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सर्राफ ने कहा, ‘‘यह अभी भी प्रस्ताव के स्तर पर है…विचार के स्तर पर है। अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री एक बैठक करते हैं और अंतिम निर्णय ले लिया जाता है।’’याचिकाओं के अनुसार, रेस कोर्स संचालित करने वाली भूमि की पट्टेदार आरडब्ल्यूआईटीसी दिसंबर की बैठक में तय की गई शर्तों के अनुसार अपने पट्टे को बढ़ाने के लिए 30 जनवरी को एक बैठक करेगी। सर्राफ ने कहा कि सरकार ने आज तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है कि जमीन का क्या किया जाए।
बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि याचिकाएं काल्पनिक प्रकृति की हैं। उन्होंने दावा किया कि याचिकाएं जनहित याचिका की प्रकृति की हैं और इसलिए उस पीठ द्वारा सुनवाई की जानी चाहिए जिसे जनहित याचिकाओं की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया है।
इसके बाद पीठ ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्री विभाग को प्रशासनिक पक्ष से मामलों को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया ताकि उचित आदेश प्राप्त किया जा सके कि किस पीठ को याचिकाओं पर सुनवाई करनी चाहिए।
पीठ द्वारा आदेश पारित करने के बाद, याचिकाकर्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया। मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने कहा कि वह इस पर गौर करेंगे और उचित आदेश पारित करेंगे।