नीतीश कुमार 50 लोगों की मौत पर हंस रहे हैं… नाश निश्चित है, प्रशांत किशोर का तीखा हमला

सीतामढ़ी: जन सुराग यात्रा के दौरान शिवहर पहुंचे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ( Prashant Kishor ) ने कहा कि उन्हें अफसोस है कि उन्होंने वर्ष 2014-15 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( Nitish Kumar ) की मदद की। पीके ने कहा कि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कुछ यात्रियों की मौत पर रेल मंत्री रहे नीतीश कुमार ने पद से इस्तीफा दे दिया था। वही नीतीश कुमार कोरोना महामारी के दौरान जब बिहार के लाखों लोग भूख से बिलबिला रहे थे, पैदल अपने घर लौट रहे थे, उस वक्त वो अपने घर से नहीं निकले थे। इतना ही नहीं, छपरा में जहरीली शराब से हो रही मौत पर भी नीतीश कुमार ने अपनी संवेदना जताने तक का काम नहीं किया। पीके ने कहा कि नीतीश कुमार आज 50 लोगों की मृत्यु पर हंस रहे हैं और कह रहे हैं, जो पिएगा वो मरेगा ही। ऐसे अहंकारी और असंवेदनशील व्यक्ति का नाश निश्चित है।

शराबबंदी से हर वर्ष 20 हजार करोड़ का नुकसान

प्रशांत किशोर ने कहा कि शराबबंदी से हर वर्ष 20 हजार करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई नीतीश कुमार डीजल और पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाकर कर रहे हैं। यह 20 हजार करोड़ रुपये शराब माफिया, पुलिस और प्रशासन ने बैठे भ्रष्ट तंत्र की जेब में जा रहा है। शराब की होम डिलेवरी हो रही है। जो पीने वाले हैं, वो पी ही रहे हैं। शराबबंदी से कोई सामाजिक बदलाव संभव नहीं है। दुनिया में इसका उदाहरण या प्रमाण नहीं है।

प्रशांत किशोर ने महात्मा गांधी का हवाला देकर शराबबंदी का समर्थन करने वालों को चुनौती दी है। पीके ने कहा कि महात्मा गांधी ने कभी भी यह नहीं कहा कि सरकार के द्वारा शराबबंदी किया जाना चाहिए। नीतीश कुमार उम्र के इस पड़ाव पर झुंझलाहट में रहते हैं। सामाजिक और राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं। इतना ही नहीं, प्रशांत किशोर ने जेडीयू और राजद के विलय के सवाल पर बोला कि मुख्यमंत्री आरजेडी के साथ कभी कंफर्टेबल नहीं रह सकते। परिस्थिति ऐसी बन गई है कि उनको राजद के साथ रहना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की यह उनकी मजबूरी है और कुछ नहीं।