NCP-शिवसेना के 40 विधायक करेंगे घरवापसी तो क्या हिल जाएगी महाराष्ट्र में शिंदे सरकार, आंकड़ों से समझिए

मुंबई: लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही महाराष्ट्र में घमासान मचा है। और से बागी हुए विधायक इस हार के बाद फिर से अपने पुराने नेता की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी दावा किया है कि महाराष्ट्र की शिवसेना, एनसीपी और की महायुति सरकार पर संकट मंडरा रहा है। कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा किया है कि शिवसेना (शिंदे गुट) और की एनसीपी के 40 विधायकों ने घरवापसी की इच्छा जताते हुए महाविकास अघाड़ी के नेताओं से संपर्क साधा है। इस बीच अजित पवार ने भी शरद पवार की तारीफ कर बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले ही 80 सीटों की मांग कर गठबंधन को असमंजस में डाल दिया है। इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार में भी कैबिनेट मंत्री बनाने की मांग की है। चर्चा है कि अगर मांगे पूरी नहीं हुईं तो वह विधानसभा चुनाव से पहले फिर शरद पवार के पास लौट सकते हैं। जानिए विधानसभा में क्या है राजनीतिक दलों का गणित जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से बगावत के बाद महाराष्ट्र में सरकार बनाई थी। शिंदे के पास 39 विधायक थे और उन्हें बीजेपी के 105 विधायकों का समर्थन हासिल था। इसके अलावा कई निर्दलीय और छोटे दल भी शिंदे सरकार का समर्थन कर रहे हैं। महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा की सीटें हैं। शिंदे सरकार बहुमत के लिए जरूरी 145 सदस्यों के ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल था। इसके बाद भी बीजेपी एनसीपी के अजित पवार पर डोरे डालती रही। जुलाई 2023 में अजित पवार 41 एनसीपी विधायकों के साथ महायुति में शामिल हुए। पिछले चुनाव में एनसीपी के 53 सदस्य पिछले विधानसभा चुनाव में जीतकर सदन में पहुंचे थे, जिनमें 11 शरद पवार के समर्थन में हैं। कुल मिलाकर शिंदे सरकार को 218 विधायकों का समर्थन हासिल है। उद्धव ठाकरे की सेना के पक्ष में 17 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी और निर्दलीयों को जोड़ दें तो विधानसभा में विपक्ष के पास 65 सीटें हैं। अगर 40 विधायकों ने घरवापसी की तो क्या होगा?जैसा कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने दावा किया है, अगर 40 विधायक महायुति से चले गए, फिर भी सरकार के पास 178 विधायकों के समर्थन होगा और शिंदे सरकार बची रहेगी। अगर अजित पवार अपने 41 विधायकों के साथ घरवापसी करते हैं तो भी शिंदे सरकार के पास 177 विधायक बने रहेंगे और सरकार चलती रहेगी। मगर शिवसेना (शिंदे) में बड़ी टूट हुई तो सरकार खतरे में पड़ जाएगी। एक्सपर्ट मानते हैं कि शिंदे गुट और अजित गुट के विधायकों की घरवापसी आसान नहीं है। शिवसेना (शिंदे) से बगावत करने वाले गुट को कम से कम 20 विधायकों की जरूरत होगी। ठीक उसी तरह अजित पवार से बगावत करने वालों को भी 21 विधायकों का गुट बनाना पड़ेगा। अगर दो तिहाई विधायकों से कम टूटकर घरवापसी करेंगे तो उनकी सदस्यता जा सकती है। बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। शिवसेना और एनसीपी में टूट के बाद उन्होंने ही असली और नकली शिवसेना के दावों पर फैसला सुनाया था।