नरेंद्र मोदी जाने वाले थे पाकिस्तान, सुलझ जाता कश्मीर का मुद्दा लेकिन… पाक पत्रकार का बड़ा दावा

इस्लामाबाद : विभाजन के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच ज्यादातर संबंध तनावपूर्ण ही रहे हैं। कभी-कभी क्रिकेट ने दोनों देशों को जोड़ने का काम किया लेकिन हर सियासत खेल पर भारी पड़ी। नेताओं का एक-दूसरे देश जाना तो दूर की बात है, 2019 से हिंदुस्तान पाकिस्तान एक-दूसरे के साथ व्यापार भी नहीं कर रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार का दावा है कि 2020-21 में ऐसी परिस्थितियां बन रही थीं जिनसे हालात सामान्य हो सकते थे। उन्होंने तो यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान का दौरा करने वाले थे। हालांकि इन दावों में कितनी सच्चाई है, कहना मुश्किल है।

पाकिस्तानी पत्रकार जावेद चौधरी ने अपनी ऑडियो कॉलम में दावा किया, ‘फौज ने 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान आने के लिए मना लिया था। यह कारनामा जनरल फैज हमीद का था। वह एक अरब मुल्क में भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल से मिले थे जिसके बाद यह फैसला हुआ कि मोदी 9 अप्रैल 2021 को पाकिस्तान आएंगे। पीएम मोदी हिंगलाज माता के पुजारी हैं। वह सीधा हिंगलाज माता के मंदिर जाएंगे और वहां 10 दिन का व्रत रखेंगे। वापसी पर इमरान खान से मिलेंगे, उनका हाथ पकड़कर हवा में लहराएंगे और दोस्ती का ऐलान करेंगे।’

इमरान खान को किसने डराया?

‘जीरो पॉइंट’ नामक यूट्यूब चैनल पर ऑडियो कॉलम में जावेद चौधरी ने आगे कहा, ‘नरेंद्र मोदी यह ऐलान भी करेंगे कि हम व्यापार भी खोल रहे हैं। वे एक-दूसरे के मामलों में दखल नहीं देंगे और आतंकवाद में शामिल नहीं होंगे। कश्मीर का फैसला हम 20 साल बाद मिल-बैठकर करेंगे। यह फैसला हो गया था लेकिन आखिर वक्त पर शाह महमूद कुरैशी ने इमरान खान को डरा दिया। उन्होंने इमरान से कहा- आप पर मोहर लग जाएगी कि आपने कश्मीर का सौदा कर दिया। इमरान खान पीछे हट गए और यूं यह दौरा रद्द हो गया।’

उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे इमरान

इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उम्मीद थी भारत पाकिस्तान अब ‘दोस्त’ बनकर रहेंगे। इसका कारण था पूर्व क्रिकेटर की लोकप्रियता और स्वीकार्यता। लेकिन राजनीति में कदम रखने के बाद इमरान के तेवर ही बदल गए। वे शांति, भाईचारे और दोस्ती के बजाय कश्मीर राग अलापने लगे। वही खूबसूरत कश्मीर जो भारत का अभिन्न अंग है। पाक सेना को खुश करने के लिए इमरान जहर उगलते रहे। लेकिन धीरे-धीरे वक्त बदला और इमरान उसी सेना की नजरों में खटकने लगे। आज भारत की विदेश नीति की तारीफ करने वाले इमरान सत्ता से बाहर हैं और सेना पर हमलावर हैं।