MP: पहली बार ई-बजट, विधायकों को मिलेंगे टैबलेट; कांग्रेस MLA बोले- हम तो चला ही नहीं पाते

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा में भी अब ई-बजट की तैयारी हो रही है, यानि कि पेपरलेस बजट. मध्य प्रदेश में सभी 230 विधायकों को अब टैबलेट दिया जाएगा.जिस पर सरकार करीब एक करोड़ रु से अधिक खर्च करेगी. इसके अलावा 64 विभागों की अलग से पुस्तिका नहीं छपेगी. मगर इस फैसले का कांग्रेस विधायक जमकर विरोध कर रहे है.इन विधायकों का कहना है की हमें ये चलाना नहीं आता. हम इतना बड़ा बजट कैसे पढ़ेंगे.मार्क कैसे करेंगे.
कांग्रेस विधायक सुनील सराफ ने टीवी 9 भारतवर्ष से कहा कि उन्होंने की मैं तो पहली बार इतने करीब से टैबलेट देख रहा हूं.ये चालू कैसे होता है मुझे तो ये भी नहीं पता. मेरे घर में बच्चे इसका इस्तेमाल करते है. पेपर की बात अलग है. सरकार सिर्फ टैबलेट का झुनझुना पकड़ा कर इससे दूर भाग रही है, ताकि विधायक इसे समझ ही नहीं पाएं.
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कांग्रेस के ही एक और विधायक अशोक का कहना है कि तकनीक अपनानी चाहिए, मगर आप टैब भी लेकर आते है और पुस्तिका भी लेकर आते हैं. आपके दिमाग में यह बात आई कि ऐसा प्रयोग करना चाहिए तो आपने कर दिया.उनका कहना है कि कई लोग तकनीकी को हैंडल नहीं कर पाते हैं.इसीलिए वह एक साथ सारे प्रयोग करने के पक्ष में नहीं हैं. एक दम से वे लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते.अब इसमें कौन सा फोल्डर कहां है ये बहुत परेशानी रहती है.आप बुकलेट भी देते तो ज़्यादा बेहतर होता.
’50 फीसदी विधायकों को टैबलेट चलाना नहीं आता’
कांग्रेस विधायक राकेश मावी का कहना है कि उनको टैबलेट चलाना नहीं आता, वह इसका सदन में विरोध करेंगे. उन्होंने तो इसे बेफिज़ूल खर्च तक बता दिया . उन्होंने कहा कि सरकार पहले अपने मंत्रियों से तो टैबलेट चलवा ले.उन्होंने दावा किया कि 50 फीसदी ऐसे विधायक है. जिन्हे ये चलाना नहीं आता है.सरकार बेफिज़ूल का खर्च करती है. इस पर करीब एक करोड़ रुपया खर्चा आ रहा है. वह इसके बिल्कुल भी पक्ष में नहीं हैं. वह इसका सदन में भी विरोध करेंगे.विधायक ने कहा कि हमारी अलमारी कागज़ों से भरी पड़ी है,फ्री टाइम में हम उन्हें पढ़ते भी है.टैबलेट का कोई मतलब नहीं है.उनको तो ये चलाना ही नहीं आता.
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पूर्व मुख्य मंत्री कमलनाथ के छिंदवाड़ा ज़िले से आने वाले विधायक सुनील उइके का कहना है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में चर्चा भी हुई की हमारे बहुत से विधायकों को इस तकनीक की जानकारी नहीं है .सरकार सदन से मुंह छिपाना चाहती है. सरकार टैबलेट के माध्यम से भागना चाहती है.सदन के भीतर पुरानी प्रथा ही रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले एक हफ्ते पहले हमें बजट मिल जाता था.मगर अब वो भी नहीं हुआ. वहीं बीजेपी का कहना है कि तकनीक की क्रांति तो राजीव गांधी ही लेकर आये थे. तब भी इनके नेता बैलगाड़ी पर बैठकर विरोध कर रहे थे.
‘टैबलेट का विरोध करने वालों पर 1-1 लाख के फोन’
कांग्रेस विधायकों के विरोध को लेकर मंत्री विश्वास सारंग का कहना है की उनको बड़ा आश्चर्य होता है कि कांग्रेस के नेता हर चीज़ का विरोध करते है .हर व्तक्ति का सीखने का सोचने का भाव होना चाहिए .पूरा गेहूं का उपार्जन sms के माध्यम से हो रहा है . सब्ज़ी से लेकर ढोल बजाने के बाद न्यौछावर भी ऑनलाइन पेमेंट से हो रही है. कहां हैं कांग्रेस के नेताय ये लोग किस युग में जी रहे है. क्या ये देश को 18 वीं सदी में ले जाना चाहते है.वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जो कांग्रेस विधायक इसका विरोध कर रहे है उनके पास एक एक लाख रु के मोबाइल फ़ोन हैं. सिर्फ़ विरोध करने का उनको बहाना चाहिए.