Moradabad Police Firing : महिला के शव में नहीं मिली गोली, अब ऐसे बढ़ेगी जांच! DGP ने कहा…

उत्तराखंड के काशीपुर में पचास हजार रुपए के इनामी बदमाश के चक्कर में हुए गोलीकांड में मरने वाली महिला के शव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पुलिस के हवाले कर दी गई. पता चला है कि महिला के बदन में गोली नहीं मिली है. बदन में अगर गोली फंसी हुई मिल जाती तो फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स तुरंत ताड़ लेते कि, महिला की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई, जैसा की पीड़ित परिवार आरोप लगा रहा है, या फिर महिला किसी आम हथियार (गैर-पुलिस बोर का हथियार) से चली गोली लगने से मारी गई. यह जानाकारी मिलने के बाद अब पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. आइए जानते हैं कि जब पोस्टमॉर्टम के दौरान महिला के बदन से गोली बरामद नहीं हुई है, तो अब आगे जांच किस आधार पर बढ़ेगी?
दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड डीसीपी एलएन राव, जोकि दिल्ली हाईकोर्ट के अब वरिष्ठ क्रिमिनल लॉयर भी हैं, के मुताबिक- जब बदन में (महिला के मृत शरीर में) पोस्टमॉर्टम के दौरान गोली नहीं मिली है. तो इसकी पहली और प्रमुख संभावना यही नजर आती है कि, गोली करीब से मारी गई या लगी होगी. जो महिला के बदन से पार हो गई. ऐसे में अब जांच करने वाली पुलिस की जिम्मेदारी है कि वो, मौके पर जाकर उस चल चुकी बुलेट (गोली के) के खोखे को तलाशे. हालांकि, यह काम अब बेहद मुश्किल है. क्योंकि घटना को बीते 3 दिन बीत चुके हैं. ऐसे में हो सकता है कि मौके पर किसी ने, गोली के उस खोखे को जाने-अनजाने हटा दिया हो. जो गोली महिला की मौत की वजह बनी थी.
मौके पर गोली चलाई ही नहीं-पुलिस
अगर ऐसे में गोली का खोखा मिल जाता है तब तो बहुत ही बेहतर होगा. और यह उस पुलिस टीम के लिए भी मददगार होगा, जिसकी गोली से महिला की मौत होने का आरोप लग रहा है. जबकि पुलिस कह रही है कि उसने मौके पर गोली चलाई ही नहीं है. एल एन राव आगे कहते हैं, “अगर मौके से गोली का खोखा नहीं भी मिलता है तब भी, फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स अनुभव से पता लगा पाने में सक्षम होते हैं कि, गोली पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किसी वैपन (हथियार) की है या फिर आमजन द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले हथियार की. ऐसे में एक रास्ता यह भी है कि बैलिस्टक एक्सपर्ट और पोस्टमॉर्टम करने वाली टीम मिलकर, पता लगा सकते हैं कि गोली पुलिस के हथियार से चली या किसी सिविलियन के हथियार से. इसके अलावा कुछ ऐसी भी जांच होती हैं जो बारूद को भी पहचानने में सक्षम होती हैं. यह जरूरी नहीं है कि अगर मौके से गोली का खोखा नहीं मिला तो, किस गोली से मौत हुई? यह पता ही न चल सके.”
नहीं मिला शव पर चोट का कोई अन्य निशान
उत्तराखंड पुलिस सूत्रों के मुताबिक मामला संवेदनशील होने के चलते पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई है. ताकि कोर्ट में केस के ट्रायल पर पहुंचने के दौरान आरोपी मुरादाबाद पुलिस टीम के लिए एक कोई नई सिरदर्दी खड़ी न हो जाए. पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया के दौरान मृतका गुरजीत कौर के शव पर चोट का कोई अन्य निशान नहीं मिला है. हां, गोली उसके बदन में घुसने के बाद फेफड़े को चीरती हुई निकली है, इसकी पुष्टि हो गई है. यह तभी संभव है जब गोली किसी के बदन में बेहद करीब से लगी हो. इस बारे में कुमाऊं रेंज के डीआईजी नीलेश आनंद भरणे, “जांच जारी है अभी कुछ ठोस कह पाना मुश्किल है.” कहकर सवाल का जवाब देने से इनकार कर देते हैं. उधर कहा जाता है कि शुक्रवार को दोपहर के वक्त राज्य के हुक्मरानों की एक बैठक, लंबे समय तक हुई. जिसमें उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार भी मौजूद रहे.
बवाल मोल लेने को राजी नहीं अधिकारी
ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि, जिस बैठक में पुलिस महानिदेशक खुद मौजूद रहे हों, उसमें काशीपुर में हुए इस सनसनीखेज कांड पर चर्चा न हुआ हो. हालांकि, इस मुद्दे पर राज्य पुलिस महानिदेशालय का कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को राजी नहीं है. यह दूसरी बात है कि राज्य पुलिस महानिदेशालय के ही, उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो, “बैठक में मुरादाबाद पुलिस द्वारा काशीपुर में जो कुछ बवाल कराया गया, उसकी जांच अभी तक कहां तक पहुंची हैं? इस पर भी मंत्रणा हुई.” राज्य पुलिस के ही उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, “यह मसला दो राज्यों की पुलिस से जुडा है. वो भी ऐसा मामला है जिसमें किसी शख्स की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी हो. इसलिए भी कोई अधिकारी बोलकर बैठे-बिठाए बवाल मोल लेने को राजी नहीं है.”
चश्मदीदों के बयानों से मिली काफी जानकारियां
उधर शुक्रवार देर रात इस सनसनीखेज गोलीकांड के बारे में टीवी9 भारतवर्ष ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक से भी संक्षिप्त की. डीजीपी उत्तराखंड आईपीएस अशोक कुमार ने कहा,”जांच अभी जारी है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से हासिल साक्ष्य, चश्मदीदों के बयानों से काफी कुछ जानकारियां मिली हैं. जो जांच को तेजी से आगे बढ़ाने में मददगार होंगी. जल्दी ही हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की तैयारी में हैं. सब्जेक्ट संवेदनशील है. गोली मौके पर चली है. इसकी पुष्टि हो चुकी है. कड़ी से कड़ी जोड़कर जांच पूरी करने में मैने कई टीमें लगा रखी हैं.”