Parliament: Manipur को लेकर संसद में गतिरोध जारी, हंगामे के बीच कई विधेयक हुए पेश

संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन भी हंगामा जबरदस्त तरीके से जारी रहा। हालांकि हंगामे के बीच ही संसद के दोनों सदनों में कामकाज जारी रहा। एक ओर जहां विपक्षी दल मणिपुर को लेकर प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते रहे और उनका हंगामा जारी रहा तो वहीं दूसरी ओर सरकार की तरफ से दोनों सदनों में कई विधेयक भी पेश किए गए हैं। साथ ही साथ पारित भी किए गए। लेकिन आज भी दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी रहा। इन सब के बीच विपक्षी दलों की ओर से केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जिसको लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा खबर यह भी है कि दिल्ली को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में पेश कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें: संसद हो या विधानसभाएं, हर जगह हो रहा हंगामा संसदीय लोकतंत्र पर सवाल खड़े कर रहा हैलोकसभा की कार्यवाही- कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ बुधवार को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जिस पर चर्चा के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकृति प्रदान की। सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई द्वारा पेश इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वह सभी दलों के नेताओं से बातचीत करके इस पर चर्चा की तिथि के बारे में अवगत कराएंगे। – लोकसभा ने बुधवार को मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान और चर्चा की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच ‘वन (संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2023’को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। सदन में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विधेयक को चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया। – सरकार ने बुधवार को कहा कि इस साल एक अप्रैल तक केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के पास कुल 19,233 शिकायतें और अपीलें लंबित थीं। कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि आयोग में सूचना आयुक्तों के चार स्थान रिक्त हैं। – सदन में हंगामे के बीच ही सरकार ने छह विधेयक भी पेश किये। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2023’ पेश किया। गृह राज्य मंत्री राय ने ‘जम्मू कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023’ भी प्रस्तुत किये। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने ‘संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ और जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने‘संविधान (जम्मू कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) विधेयक, 2023’ सदन में शोर-शराबे के बीच ही पेश किये। कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ‘खान और खनिज (विकास और नियमन) संशोधन विधेयक, 2023’ पेश किया। इसे भी पढ़ें: Parliament में दिल्ली अध्यादेश बिल को लाने की तैयारी, सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह विधेयक करेंगे पेशराज्यसभा की कार्यवाही- मणिपुर हिंसा पर कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा शुरू कराने की मांग को लेकर बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच राज्यसभा में तीखी नोकझोंक हुई। राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सदस्य अमी याग्निक एवं अन्य महिला नेताओं को चुनौती दी कि वे राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं बिहार में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार एवं बलात्कार की घटनाओं पर बोलने का साहस दिखाएं? अमी याग्निक ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्न पूछते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी से जानना चाहा कि वह और मंत्रिमंडल में उनकी महिला सहयोगी मणिपुर के मुद्दे पर कब बोलेंगी? इसके जवाब में स्मृति ने कहा कि वह इस बात पर घोर आपत्ति व्यक्त करती हैं। उन्होंने कहा कि न केवल महिला मंत्रियों बल्कि महिला राजनीतिक नेताओं को भी मणिपुर के साथ ही छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं बिहार में होने वाली घटनाओं पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए। – राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मणिपुर हिंसा पर सरकार के रवैये तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संसद के भीतर कोई बयान नहीं दिये जाने के विरोध में विपक्षी दलों के सदस्यों के सदन से बर्हिगमन करने की घोषणा की। खरगे ने भोजनावकाश के बाद सदन की बैठक फिर शुरू होने पर आसन की अनुमति से अपनी बात रखते हुए कहा, ‘‘‘इस सदन में हम (मणिपुर मुद्दे पर) जो चर्चा चाहते थे, उसके लिए हम प्रधानमंत्री के वक्तव्य की अपेक्षा कर रहे थे और अभी भी कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा चर्चा की मांग करते हुए चार-पांच दिन हो गये है तथा प्रधानमंत्री संसद भवन में (अपने कक्ष में) आते हैं और उनके द्वारा की गयी मांग को (टीवी पर) देखते हैं। – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में लगभग 30,000 रिक्तियां भरी जा चुकी हैं। राय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने शासन संबंधी कई सुधार किए हैं जिनमें भर्ती क्षेत्र भी शामिल है।