मानस गार्डन वेलफेयर सोसायटी ने लगाया मेडिकल कैंप, दिमाग को दुरुस्त रखने के लिए दी ये सलाह

हमने अपनी जीवनचर्या बिगाड़ ली है. खुद को समय देना बंद कर दिया है. कुछ भी, कभी भी खाते-पीते हैं और योग-व्यायाम के नाम पर शून्य हो चुके हैं. ऊपर से बीमारी देखकर गूगल करते हैं और दवा व डाइट उसी के अनुसार कर लिए हैं. इसलिए यदि आप गूगल देखकर अपनी सेहत का ख्याल रख रहे हैं तो सावधान, नहीं तो आपको आने वाले दिनों में बड़ी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है. उक्त बातें मेडिकल कैंप में आए लखनऊ के मशहूर डायबिटीज विशेषज्ञ केएल मिश्र ने कही. उन्होंने सबको बेहतर जीवन जीने के लिए आहार-विहार पर ध्यान रखने की बात कही.
राजधानी के मानस गार्डन में आए चिकित्सकों ने पहले बड़े ध्यान से सबको देखा. उचित उपचार किए, लेकिन उनके मन में एक टीस थी कि आखिर लोग बीमार क्यों हो रहे हैं? अब से 25-30 साल पहले लोग इतना ज्यादा बीमार नहीं होते थे. इसी मुद्दे पर उपस्थित सभी डॉक्टरों ने अपने विचार व्यक्त किए. सबसे पहले बोलते हुए डॉ. मिश्र ने खान-पान पर ज्यादा जोर दिया. उन्होंने कहा कि हर शख्स को अपनी थाली में सलाद को बड़ा स्थान देना पड़ेगा. साथ ही अंकुरित अनाज को भी अच्छी जगह देनी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि हमें अरहर (तुवर) की दाल से रात में तौबा करनी पड़ेगी, नहीं तो यह कई बीमारियों की जड़ हो जाएगी.
बाल रोग विशेषज्ञ ने रखे अपने विचार
वहीं जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नृपेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों को छह माह के बाद ही अन्न खिलाना चाहिए. साथ ही यह ख्याल रखना होगा कि उन्हें किसी भी हालत में नमक न दिया जाए. डॉ. नृपेंद्र सिंह के अनुसार, बच्चों के शरीर में छह माह के बाद ही टेस्ट सेल बनने शुरू होते हैं, वो भी मीठे वाला. इसलिए बच्चों को एक साल के बाद ही नमकीन भोजन दिया जाता है. साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों का ग्रोथ चूंकि छह माह में दोगुना हो जाता है, इसलिए हर माह माता-पिता को किसी अच्छे जानकार चिकित्सक को दिखा लेना चाहिए.
अच्छा डॉक्टर केवल वजन मापकर बच्चे के विकास की रफ्तार जान लेगा. इसके अलावा उन्होंने बच्चों में होने वाले बुखार को लेकर भी फैली भ्रांतियों को खत्म किया. उन्होंने कहा कि यदि बच्चे को 100 डिग्री से ज्यादा बुखार है तो तत्काल उसके सभी कपड़े उतार दिए जाएं और उसे नार्मल पानी से पोंछ दिया जाए. यदि बच्चे का बुखार 15 मिनट में नहीं उतरा तो उसे झटके की बीमारी हो सकती है, जो बच्चे में पांच साल से लेकर 19 साल तक दिखाई पड़ सकती है.
घुटने का प्रत्यारोपण कराकर पा सकते हैं आराम
कैंप में आए दिग्गज आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सौरभ सिंह ने गठिया और जोड़ रोग पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि अब लोग घुटने का प्रत्यारोपण कराकर इस बीमारी से निजात पा सकते हैं, लेकिन लोग सही बात बताते नहीं हैं और बीमारी के साथ रहने लगते हैं. उन्होंने कहा कि क्वालिटी लाइफ स्टाइल के लिए नी-रीप्लेसमेंट (घुटना प्रत्यारोपण) उचित सलाह है. साथ ही उन्होंने बताया कि हमें अपने खान-पान पर उचित ध्यान देना पड़ेगा.
लोगों में विटामिन-डी की कमी देखने को मिल रही
आजकल हमारा क्लाइमेट ऐसा है कि आठ महीने धूप होती है. उसके बाद भी लोगों में विटामिन-डी की कमी देखने को मिल रही है. इसलिए यदि शरीर में कहीं भी ज्यादा दर्द हो तो जरूर किसी चिकित्सक की सलाह लें. वो निश्चित तौर पर आपके विटामिन डिफिशिएंसी जांच करा लेगा और आप किसी बड़ी परेशानी से बच जाएंगे. उन्होंने कहा कि इसी कारण अक्सर लोग पीठ दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और अकड़न से परेशान रहते हैं.
छह से सात घंटे की स्वस्थ नींद जरूर लें
वहीं न्यूरो साइक्रेटिस्ट डॉ. विजित जायसवाल ने बढ़ते डिप्रेशन पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि स्वस्थ मनुष्य को छह से सात घंटे की स्वस्थ नींद जरूर लेनी चाहिए. इसके लिए ज़रूरी है कि सोने से आधे घंटे पहले टीवी, मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से खुद को दूर कर लें. साथ ही उन्होंने कहा कि सामान्य स्थितियों में चिंता और तनाव जिंदगी के आम हिस्से के रूप में जाना जाता है, लेकिन अगर यह बार-बार और लंबे समय तक रहता है तो इससे दिनचर्या की सामान्य गतिविधियां प्रभावित होती हैं.
मानसिक रोग का शिकार हो सकता है व्यक्ति
लंबे समय तक यह समस्या रहने से व्यक्ति मानसिक रोग का शिकार हो सकता है. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चिंता, भय और तनाव की स्थिति में मस्तिष्क की तंत्रिका गतिविधि प्रभावित होती है, जिसकी वजह से मानसिक विकार, अवसाद और अल्जाइमर रोग होने की संभावना रहती है. इसलिए आप खुद को कभी रिटायर न समझिए. एक्टिव रहें और सूडोकू, योग, ध्यान जैसी एक्टिविटी में व्यस्त रहें.