चीन के जासूसी जहाज पर क्या झूठ बोल रहा मालदीव? रक्षा विशेषज्ञ ने खोली मुइज्जू सरकार की पोल

माले: मालदीव की मुइज्जू सरकार ने दावा किया है कि माले आ रहा चीनी जासूसी जहाज उसकी जलीय सीमा में कोई भी अनुसंधान नहीं करेगा। मुइज्जू सरकार का यह बयान चीनी जासूसी जहाजों को लेकर भारत की बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। भारत ने चीनी जासूसी जहाज के मालदीव पहुंचने पर आपत्ति जताई थी। इससे पहले हिंद महासागर में जासूसी मिशनों को अंजाम देने वाले चीनी जहाज श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर रुकते थे। भारत की गंभीर आपत्तियों के बाद श्रीलंकाई सरकार ने चीनी जासूसी जहाजों के अपने देश की जलीय सीमा में घुसने और अपने बंदरगाहों पर ठहरने को लेकर 1 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में चीन को अब मालदीव के रूप में नया ठिकाना मिला है।ब्रह्मा चेलानी ने क्या बतायाभारत के प्रसिद्ध रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने बताया है कि मालदीव चीनी जासूसी जहाजों को लेकर जो दावा कर रहा है, वह खुद उसकी कोई पुष्टि नहीं कर सकता। मालदीव के पास ऐसी क्षमता नहीं है कि वह चीनी जासूसी जहाजों को अपनी जलीय सीमा में सर्वेक्षण या शोध करने से रोक सके। ऐसे में मालदीव के दावे पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “चीन भारत के समुद्री क्षेत्र में पनडुब्बी संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए आक्रामक रूप से हिंद महासागर के तल का मानचित्रण करने और भूकंपीय और बाथिमेट्रिक डेटा एकत्र करने में लगा हुआ है। मालदीव, अपने नए इस्लामवादी-झुकाव वाले चीन-समर्थक राष्ट्रपति के तहत ड्रैगन का समर्थक बन रहा है।”मालदीव के पास क्षमता का अभावउन्होंने आगे लिखा, “भारत के साथ 2019 के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण समझौते को समाप्त करने और उस आपदा-ग्रस्त द्वीपसमूह राष्ट्र में बचाव और राहत का काम करने वाले कई दर्जन गैर-लड़ाकू भारतीय सैन्य कर्मियों को निष्कासित करने का आदेश देने के बाद, मालदीव के राष्ट्रपति मुइज़ू एक चीनी जासूसी जहाज की मेजबानी करने के लिए सहमत हुए हैं। जिसका मिशन समुद्र के नीचे की स्थितियों पर डेटा एकत्र करना है। मुइज्जू सरकार का दावा है कि पीएलए से जुड़ा जहाज मालदीव के जल में समुद्र संबंधी अनुसंधान नहीं करेगा, यह हास्यास्पद है क्योंकि मालदीव के पास ऐसी गतिविधि का पता लगाने की शून्य क्षमता है।”