Maharashtra: पूरी हुई अजित पवार की मुराद, संभालेंगे वित्त विभाग! NCP को दिए जाएंगे ये अहम मंत्रालय

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना-एनसीपी की गठबंधन सरकार को लेकर बड़ी खबर आ रही है। जानकारी के मुताबिक मंत्रालय बंटवारे को लेकर आम सहमति बन गई है। मिल रही जानकारी के मुताबिक एनसीपी के खाते में वित्त मंत्रालय गया है। फिलहाल वित्त मंत्रालय को देवेंद्र फडणवीस संभाल रहे थे। लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी अजित पवार के पास रहेगी। वित्त मंत्रालय के अलावा एनसीपी को योजना, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारी समितियां, महिला और बाल विकास, कृषि, राहत और पुनर्वास तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय दी जाएगी। इसको लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से हरी झंडी दे दी गई है। इसकी पुष्टि अजित पवार ने की है।  इसे भी पढ़ें: ‘सत्ता के लिए बालासाहेब के आदर्शों को कुचला गया’, शिंदे ने उद्धव पर निशाना साधते हुए पूछा- असली गद्दार कौन पहले सहकारिता और वित्त मंत्रालय को लेकर खींचतान चल रहा था। एनसीपी दोनों मंत्रालय अपने हिस्से में चाहती थी। हालांकि एकनाथ शिंदे इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। लेकिन ऐसा लगता है कि मंत्रालय में विभागों के बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है। शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गठबंधन में राकांपा विधायकों के शामिल होने से मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था। महाराष्ट्र सरकार में हाल ही में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा) के विधायकों को विभाग बांटने की अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने बृहस्पतिवार को अपने कैबिनेट सहयोगी देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी।  इसे भी पढ़ें: ‘Maharashtra में कांग्रेस करेगी विपक्ष का नेतृत्व’, पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से बढ़ सकती है शरद पवार-उद्धव ठाकरे की टेंशनअमित शाह से भी हुई थी मुलाकातराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल ने बुधवार रात को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना-भाजपा गठबंधन में नये शामिल हुए राकांपा के मंत्रियों को विभाग आवंटन को लेकर चल रहे मंथन के बीच यह मुलाकात हुई थी। अजित पवार और राकांपा के आठ अन्य विधायक शरद पवार की अगुवाई वाली पार्टी से अलग होकर दो जुलाई को अचानक से शपथ लेकर राज्य सरकार में शामिल हो गये थे। पटेल ने कहा कि शाह और अन्य भाजपा नेताओं के साथ यह एक ‘शिष्टाचार भेंट’ थी क्योंकि वह और अजित पवार महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने के बाद से औपचारिक रूप से इन वरिष्ठ नेताओं से नहीं मिले थे।