महाराष्ट्र: कृषि मंत्री के किसानों पर दिए बयान ने बढ़ाई शिंदे सरकार की मुश्किलें, विपक्षी दलों ने मांगा इस्तीफा

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार के बयान पर बवाल हो गया है। शिंदे सरकार के मंत्री ने कहा है कि किसानों का आत्महत्या करना कोई नई बात नहीं है और ऐसी घटनाएं कई वर्षों से हो रही हैं। उनके इस बयान को लेकर विपक्षी पार्टियों जोरदार हमला बोला है। विपक्षी दल अब्दुल सत्तार की इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। अपनी इस मांग को लेकर विपक्षी पार्टियों ने मंगलवार को विधान भवन के बाहर प्रदर्शन भी किया। वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार को किसान विरोधी बताया है।मुंबई: किसानों पर बयान को लेकर महाराष्ट्र के कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी पार्टियों ने विधान भवन में प्रदर्शन किया। pic.twitter.com/hyWZumW07P— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 14, 2023

इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हो या महाराष्ट्र सरकार दोनों ही किसान विरोधी हैं। राज्य सरकार किसानों की मदद नहीं कर रही है, हम चाहते हैं कि किसानों की मांगों को पूरा किया जाए और पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाए, अन्यथा हम पूरे राज्य में “कुर्सी छोड़ो आंदोलन” करेंगे।Be it the Central govt or the Maharashtra govt both are anti-farmer. The state govt is not helping farmers, we want the demands of farmers to be fulfilled & old pension scheme to be implemented, else we will hold “Kursi Choro Andolan” throughout the State: Nana Patole, President… https://t.co/UU8FpOLBaV pic.twitter.com/SEHf1SnHJm— ANI (@ANI) March 14, 2023

बता दें कि कृषि मंत्री अब्दुल सत्तार ने रविवार को औरंगाबाद जिले में अपने निर्वाचन क्षेत्र सिल्लोड में किसानों के आत्महत्या करने के विषय में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि किसानों का आत्महत्या करना कोई नई बात नहीं है और ऐसी घटनाएं कई वर्षों से हो रही हैं।अब्दुल सत्तार ने कहा, ‘‘ किसानों के आत्महत्या करने का मामला कोई नया नहीं है। ऐसी घटनाएं कई वर्षों से हो रही हैं। मेरा मानना है कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र सहित महाराष्ट्र में कहीं भी किसानों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। ’’पुलिस के मुताबिक तीन से 12 मार्च के बीच सिल्लोड में कम से कम दो किसान आत्महत्या कर चुके हैं। हालांकि, सूत्रों ने दावा किया है कि इसी अवधि के दौरान मराठवाड़ा क्षेत्र के औरंगाबाद जिले में कम से कम छह किसानों ने आत्महत्या की है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कर्ज की समस्या होने के कारण किसानों ने आत्महत्या की है।