Mahakal Mahashivratri: महाकाल की एक झलक पाने को जुटे लाखों श्रद्धालु, सुबह नहीं होगी भस्म आरती

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धार्मिक नगरी उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। भस्म आरती के साथ ही मंदिर में सुबह से ही लाखों श्रद्धालुओं के आने का दौर चालू रहा, जो शनिवार दोपहर तक यानी 44 घंटे लगातार जारी रहेगा। प्रातः चलित भस्मारती में लगभग 40 हज़ार दर्शनार्थियों ने दर्शन किए। रात 10 बजे तक लगभग 7 लाख 35 हज़ार दर्शनार्थियों ने श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन किए। अभी भी दर्शनार्थियों के दर्शन हेतु आने का सिलसिला जारी है।

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर संदीप कुमार सोनी ने बताया कि शुक्रवार सुबह महाशिवरात्रि महापर्व पर भस्मारती के लिए श्री महाकालेश्वर भगवान जी के मंगल पट रोज की तुलना में डेढ़ घंटे पहले रात 2:30 बजे खोले गए, जिसके बाद भस्मारती उपरांत सुबह 7:30 से 08:15 दद्योदक आरती, 10:30 से 11:15 तक भोग आरती के पश्चात दोपहर 12 बजे से उज्जैन तहसील की ओर से बाबा महाकाल की शासकीय पूजा-अभिषेक किया गया।

सायं 4 बजे होल्कर व सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन व सायं पंचामृत पूजन के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर को नित्य संध्या आरती के समान महाशिवरात्रि पर्व पर भी गर्म मीठे दूध का भोग लगाया गया। सायं 7 बजे से 10 बजे तक कोटितीर्थ कुंड के तट पर विराजित श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन, सप्तधान्य अर्पण, पुष्प मुकुट श्रृंगार (सेहरा) के उपरान्त आरती की गई।

शुक्रवार रात्रि 11 बजे से पूरी रात और 9 मार्च को प्रात: 6 बजे तक भगवान श्री महाकालेश्वर का महाअभिषेक, पूजन, श्रृंगार चलेगा। इसमें एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ व विभिन्न मंत्रों के माध्यम से 11 ब्राह्मणों द्वारा देवादिदेव भगवान श्री महाकालेश्वर जी का अभिषेक किया जाएगा।

सुबह भस्म आरती नहीं, होंगे सेहरा दर्शन

शनिवार सुबह विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में भस्म आरती नहीं होगी, बल्कि इस दौरान बाबा महाकाल का सप्तधान सेहरा सजाया जाएगा। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया की प्रातः बाबा महाकाल का भस्म लेपन, विभिन्न प्रकार के पांच फलों के रसों से अभिषेक, पंचामृत पूजन (101 लीटर दूध, 31 किलो दही, 21 किलो खांडसारी , 21 शहद, 15 किलो घी) से अभिषेक, गंगाजल, गुलाब जल, भांग आदि के साथ केसर मिश्रित दूध से अभिषेक किया जाएगा। अभिषेक उपरांत भगवान को नवीन वस्त्र धारण कराए जाकर सप्तधान्य का मुखारविंद धारण कराया जाएगा। इसके बाद सप्तधान्य अर्पित किया जाएगा, जिसमें चावल, खडा मूंग, तिल, मसूर, गेहूं, जव, साल, खड़ा उडद सम्मिलित रहेंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर का श्रृंगार कर पुष्प मुकुट (सेहरा) बांधा जाएगा।

भगवान श्री महाकालेश्वर जी को चंद्र मुकुट, छत्र, त्रिपुंड व अन्य आभूषणों से श्रृंगारित किया जाएगा। भगवान पर न्योछावर नेग स्वरुप चांदी का सिक्का व बिल्वपत्र अर्पित किए जाएंगे। श्री महाकालेश्वर भगवान की सेहरा आरती की जाएगी व भगवान को विभिन्न मिष्ठान्न, फल, पञ्च मेवा आदि के भोग अर्पित किए जाएंगे। सेहरा दर्शन के उपरांत वर्ष में एक बार दिन में 12 बजे होने वाली भस्मारती होगी और इसके बाद भोग आरती होगी व शिवनवरात्रि का पारणा किया जाएगा। 9 मार्च को सायं पूजन, श्रृंगार, सायं आरती व शयन आरती के बाद भगवान श्री महाकालेश्वर जी के पट मंगल होंगे। इस दौरान श्री महाकालेश्वर भगवान के पट लगभग 44 घंटे खुले रहेंगे।