कॉलर पर लिपस्टिक कैसे, हीरे की चोरी तो कभी… कई ‘आफताब’ के झूठ पकड़ रहा ये पॉलीग्राफ टेस्ट

नई दिल्ली: यह केस 80 के दशक की बॉलीवुड फिल्मों के सीन की तरह था। घबराई प्रेग्नेंट पत्नी को शक होता है कि उसका पति बेवफा है। वजह एक लाल निशान (शक लिपस्टिक का) था, जो उसने पति की शर्ट पर देखा था। पति के धोखा देने की चिंता उसे खाए जा रही थी। कपल मुंबई के हेलिक फॉरेंसिक लेबोरेट्री पहुंचता है। अपनी पत्नी का शक दूर करने के लिए पति लाई-डिटेक्टर टेस्ट (Lie Detector Test) को राजी होता है। हेलिक एडवाइजरी की सीईओ और फॉरेंसिक साइंटिस्ट रुक्मिणी कृष्णमूर्ति बताती हैं, ‘रिपोर्ट में झूठ जैसी कोई बात सामने नहीं आई। वह एक पेंट कंपनी में काम करता था और उसकी शर्ट पर लाल निशान दरअसल पेंट का था।’ लाई डिटेक्टर या पॉलीग्राफ टेस्ट हाल के दिनों में काफी चर्चा में है। श्रद्धा वालकर हत्याकांड का पूरा सच उगलवाने के लिए जांच एजेंसियों ने आरोपी आफताब अमीन पूनावाला का पॉलीग्राफ टेस्ट किया है। अब तक श्रद्धा के शव का सिर वाला हिस्सा और हथियार नहीं मिला है। जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि ट्रृथ मशीन कहे जाने वाले इस टेस्ट के नतीजों से कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं।

प्राइवेट जासूसी में भी काम करता है टेस्ट
ऐसा नहीं है कि इस टेस्ट का उपयोग केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियां ही अकेले करती हैं। देश की कई प्राइवेट जासूसी एजेंसियां और फॉरेंसिक लैब में पॉलीग्राफ टेस्ट किया जाता है। कुछ तो क्लाइंट की गोपनीयता को देखते हुए घर पर टेस्ट की पेशकश करती हैं। कीमत 15,000 रुपये से 2 लाख रुपये के बीच हो सकती है और हाल में इसकी डिमांड काफी बढ़ी है। एजेंसियों का कहना है कि वे कुछ साल पहले एक महीने में 2 टेस्ट करते थे लेकिन अब एक हफ्ते में 4-5 पॉलीग्राफ टेस्ट हो रहे हैं।

ये आज की ‘अग्निपरीक्षा’ है
कपल इसका इस्तेमाल अपने पार्टनर की चीटिंग पकड़ने के लिए कर रहे हैं। इसे आज के समय की अग्निपरीक्षा ही समझिए। इसके अलावा भी कई क्लाइंट होते हैं जो सच जानने के लिए टेस्ट करवाते हैं। एजेंसियों का कहना है कि उनके क्लाइंट में करोड़पति होते हैं जिन्हें अपने कर्मचारी पर चोरी का संदेह होता है या फिर रईस परिवार आते हैं जिनके घर की कोई कीमती चीज नहीं मिल रही होती है।

दिल्ली में डिटेक्टिव संजय सिंह कहते हैं कि लोगों के बीच आपसी और पेशेवर संबंधों में भरोसा घटा है और इस कारण डिमांड बढ़ी है। इंडियन डिटेक्टिव एजेंसी चलाने वाले सिंह कहते हैं, ‘यह टेस्ट हमें ऐसी सूचनाएं देता है जो हम अपनी पड़ताल से हासिल नहीं कर सकते हैं। कभी-कभार कपल्स के बीच, एक पार्टनर अपने विवाहेत्तर संबंध को लेकर झूठ बोलता है। पॉलीग्राफ इस पर असलियत सामने लाता है।’

7 साल में 200% बढ़ी डिमांड
दिल्ली में फॉरेंसिक लैब और एक डिटेक्टिव एजेंसी चलाने वाले वकील गौरव कौशिक का अनुमान है कि सात साल पहले की तुलना में डिमांड 200 फीसदी बढ़ गई है। उनकी एजेंसी इंटरनेशनल ट्रृथ डिटेक्शन ब्यूरो है। इनका सबसे सस्ता ऑफर 20,000 रुपये में 5 सवालों का टेस्ट है। वह कहते हैं, ‘हमने पाया है कि अफेयर के शक में आए 98 प्रतिशत मामलों में कपल्स ने अपना शक दूर करने के लिए इस टेस्ट को चुना। ज्यादातर मामलों में महिला को टेस्ट से गुजरना होता है।’

1 करोड़ का गहना चोरी हो गया…
ऐसे ग्राहक जो चोरी और कॉरपोरेट जासूसी के पीड़ित होते हैं, वे भी इन लैब्स की तरफ आते हैं। हेलिक की कृष्णमूर्ति याद करती हैं कि कैसे एक बॉलीवुड हस्ती की बहन का कुछ साल पहले एक कीमती आभूषण चोरी हो गया था। उसकी कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा थी। उनकी टीम ने सभी नौकरों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था और ज्वैलरी बरामद कर ली।

100 कर्मचारियों का हुआ टेस्ट
पिछले महीने मुंबई के एक कॉरपोरेट ने एक इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी चोरी रिपोर्ट की। वह पुलिस के पास नहीं जाना चाहते थे, तो उन्होंने हेलिक टीम को हायर किया। इसके बाद ऑफिस के अंदर जांच शुरू हुई। 100 से ज्यादा कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। पहले शक के दायरे में छह लोग घिरे और आखिरकार दोषी की पहचान कर ली गई।

एक दर्जन हीरे चोरी…
वकील कौशिक ने हाल ही में अपनी टीम सूरत भेजी थी। वहां एक ट्रेडर ने बताया था कि उसके एक दर्जन से ज्यादा हीरे गायब हैं। डिलिवरी करने वाले ट्रेडर के कर्मचारी का कहना था कि उसने अपना काम कर दिया जबकि कस्टमर ने दावा किया कि उसे तो पैकेज मिला ही नहीं। ट्रेडर को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उसके यहां कर्मचारी 20 साल से काम कर रहे थे। उस कर्मचारी का पॉलीग्राफ टेस्ट किया गया तो पता चला कि वह झूठ बोल रहा था। कौशिक ने कहा, ‘उसने धोखा दिया था। हम इस टेस्ट के कारण ही उसे पकड़ सके। ट्रेडर खुश हुए क्योंकि हमने जल्द ही डायमंड बरामद कर लिया था।’

फर्जी केस भी खुले
कभी-कभी पॉलीग्राफ टेस्ट फेक मामले का सच भी उजागर करता है। एक स्टूडेंट ने अपने टीचर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। पॉलीग्राफ में पता चला कि उसे पढ़ाई में नंबर कम मिले थे तो उसने बदला लेने के लिए पूरा खेल किया। ऐसे ही एक अन्य मामले में एक लड़की ने अपने कजिन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। एक संयुक्त परिवार टूटने के करीब पहुंच चुका था लेकिन पॉलीग्राफ में पता चला कि वह उससे ईर्ष्या करती थी। इस कारण उसने पूरी कहानी लिखी।

ऐसी कई सक्सेस स्टोरीज हैं फिर भी एक्सपर्ट नार्को एनालिसिस, लाई डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग को संदेह की नजर से देखते हैं। 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में इसे सबूत के तौर पर मानने से इनकार कर दिया था। यह सबूत जुटाने में जरिया जरूर बन सकता है। जैसे, आफताब के केस में देखिए। पॉलीग्राफ के दौरान आरोपी का बयान कोर्ट में नहीं रखा जा सकता है लेकिन अगर वह बताता है कि उसने शव कहां दफनाया है तो सबूत मिल सकता है। निजी इस्तेमाल के लिए भी क्लाइंट पॉलीग्राफ टेस्ट का इस्तेमाल कानूनी उद्देश्यों के लिए नहीं कर सकते हैं।

कई पाबंदियों के बाद भी भारत में पॉलीग्राफ पॉपुलर हो रहा है। आरुषि तलवार मर्डर केस और शीना बोरा मर्डर केस समेत कई सनसनीखेज आपराधिक मामलों में भी इसका इस्तेमाल हुआ है। ‘ट्रूथ मशीन’ की लेखिका जिनी कहती हैं कि ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब लोगों ने इस टेस्ट को फेल साबित कर दिया। फिर भी इसकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई है।