जेडीयू के खोटे सिक्के नहीं हैं ललन सिंह, नीतीश कुमार के लिए बने प्रॉब्लम शूटर

पटनाः जिन सूचनाओं के साथ जेडीयू नेता के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हो जाने की सूचना मीडिया में आती रही अब उसमे दम नजर नहीं आता। पीएम नरेंद्र मोदी और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की हुई मुलाकात के बाद विभाग का बंटवारा जितनी जल्दी से हो गया, वह यह बताता है कि जदयू के भीतर ललन सिंह की स्थिति अब भी मजबूत है। यही वजह भी है कि ने अपने किसी अन्य साथी पर भरोसा नहीं करते विभागों के उलझन सुलझाने के लिए अपना दूत बना कर ललन सिंह को नरेंद्र मोदी के पास भेजा।विभागों के बंटवारे में भी बड़ी भूमिका दरअसल, बिहार में एनडीए की सरकार बने छह हो गए पर शपथ लिए 8 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा नहीं हो सका। राजनीतिक गलियारों में इस बात को ले कर कई तरह की चर्चा होने लगी। कुछ राजनीतिक पंडित यह कहने लगे कि यह सरकार चलने वाली नहीं है। कोई कह रहा था भाजपा किसी कीमत पर गृह विभाग लेगी। दूसरी ओर तबादला दर तबादला होते जा रहा था। विभाग विहीन मंत्री मुख्यमंत्री की तरफ निगाहें डाले बैठे थे। सरकारी काम काज पूरी तरह से ठप पड़ा था। शपथ लिए मंत्रियों को भी लगने लगा है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। तभी तो मुख्यमंत्री विभागों का बंटवारा नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन इन किंतु परंतु पर पूर्णविराम पर राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को श्रेय जाने लगा। पीएम नरेंद्र मोदी से ललन सिंह की हुई मुलाकात के बाद विभागों के बंटवारे से राज्य में एक सन्देश यह भी गया कि अभी भी नीतीश कुमार के प्रोब्लम शूटर ललन सिंह हैं।मंत्रिमंडल विस्तार भी शीघ्र! विभागों के बंटवारे को कुछ क्षणों में निदान निकलने वाले ललन सिंह के बारे में यह कहा जा रहा है कि वे मंत्रिपरिषद के विस्तार के भी सूत्र ले कर आए है। मंत्रिपरिषद के विस्तार को ले कर यह चर्चा थी कि भाजपा इस बार नए चेहरों को ज्यादा से ज्यादा मंत्री बनाना चाहते हैं। पर नीतीश कुमार अनुभवी भाजपा नेताओं को मंत्रिपरिषद में लाने की सलाह दे रहे थे। प्रदेश नेतृत्व यह मानने के लिए तैयार नही थी। ऐसे में नीतीश कुमार के दूत राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने सीधा रुख पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ किया। विभागों की पेच सुलझा कर आए ललन सिंह को ले कर यह चर्चा तेज हो गई है कि ये दिल्ली आलाकमान से मिलकर मंत्रिपरिषद के विस्तार के सूत्र भी ले कर आए हैं।अपनी मर्जी पर भी लगाई मुहर पीएम नरेंद्र मोदी के पास नीतीश कुमार के दूत बन कर जाने के बाद ललन सिंह की पार्टी विरोधी अफवाहों पर भी विराम लग गया। ललन सिंह को ले कर जीतने भी सवाल उठाए जा रहे थे उन सवालों का भी जवाब मिल गया। साथ ही इस बात पर भी मुहर लगी कि ललन सिंह ने मुंगेर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए ही पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। विराम तो इस अफवाह को भी मिल गया कि वे 16 विधायकों के जरिए वर्तमान एनडीए सरकार को सदन में गिराने का षड्यंत्र रचने वाले हैं।