कूनो लाई गई मादा चीता प्रेग्नेंट नहीं, DFO बोले- कोई टेस्ट नहीं हुआ, पता नहीं कैसे फैली अफवाह

17 सिंतबर को नामीबिया से देश में आठ चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल उद्यान लाए गए थे. इसी बीच खबर आई कि इनमें से एक फीमेल चीता गर्भवती है, लेकिन ये सच नहीं है. कूनो नेशनल पार्क के DFO ने बताया कि ना तो आशा नाम की चीता गर्भवती है और न ही कोई और मादा चीता ने गर्भधारण किया है. देश में चीता के प्रेग्नेंट होने की बात इस तरह फैली की खुद वन अधिकारी को सामने आकर सचाई बतानी पड़ी. DFO ने बताया कि कोई भी मादा चीता गर्भवती नहीं हुई है, न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी चीता का नाम ‘आशा’ रखा था.
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ प्रकाश कुमार वर्मा ने कहा कि श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय पार्क में इस वक़्त अफ्रीका से आए 8 चीते खुशहाली से जी खा रहे हैं, शिकार कर रहे हैं. उन्हें भारत के वातारण में एडजस्ट करने में कुछ महीनों का समय लगेगा. ऐसे में चीतों के बीच मिलन होना और किसी मादा चीता का गर्भवती हो जाना फिलहाल संभव ही नहीं है.
चीता के गर्भवती होने की बात झूठी
DFO ने कहा कि कुछ लोग बेवजह अफवाह उड़ा रहे हैं. चीता के गर्भवती होने की बात झूठी है. वहीं डीएफओ प्रकाश कुमार वर्मा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने यहां लाए गए किसी भी चीते का नामकरण किया है, इसकी कोई जानकारी हमारे पास नहीं है. यदि पीएम ने एक भी चीते का नामकरण किया होता तो वे बीते रोज मन की बात में लोगों से नाम के सुझाव क्यों मांगते.
रही बात एक मादा चीता के प्रेग्नेंट होने के खबरों की, तो वह भ्रामक हैं. न तो यहां किसी तरह का टेस्ट किया गया है. न ही नामीबिया से प्रेग्नेंसी रिपोर्ट दी गई है. इस तरह की अफवाह कैसे फैल रही है, यह समझ के परे हैं.
देश में अंतिम चीते की मौत 1947 में हुई थी
देश में अंतिम चीते की मौत 1947 में छत्तीसगढ़ में हो गई थी. बाद में सरकार की ओर 1952 में चीते को भारत में विलुप्त घोषित कर दिया गया था. देश में चीतों को बसाने के लिए अफ्रीकन चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया 2009 में शुरू हुआ था. चीतो के लाने के लिए भारत ने नामीबिया सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे.