किचन भारत में तो बाथरूम म्यांमार में, बॉर्डर पर फेंसिंग लगी तो परमिट से 16 किलोमीटर तक एंट्री का क्या होगा?

नई दिल्ली : 1643 किलोमीटर दूरी में फैली भारत-म्यांमार सीमा पर कटीली बाड़ लगाए जाने के भारत के फैसले से मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के लोगों में अलग-अलग तरह की शंकाएं जन्म ले रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यांमार सीमा से लगते कितने ही भारतीय सीमांत इलाके ऐसे हैं जहां केवल खेत ही नहीं बल्कि कुछ घर भी दो देशों में बंटे हुए हैं। इन घरों की रसोई भारत में है तो बाथरूम म्यांमार में। ऐसे में पूरे बॉर्डर पर फेंसिंग लग जाने से सीमांत गांवों में रहने वाले लोगों का क्या होगा? सीमा की चौकसी करने वाली असम राइफल्स के सूत्रों का कहना है कि हाईकमान से जैसे आदेश आएंगे हम उनका अक्षरशः पालन करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा भी है कि सीमा पर हाइब्रिड सर्विलांस सिस्टम के जरिए फेंसिंग की जाएगी। कुल सीमा में से मणिपुर के मोरेह में 10 किलोमीटर के हिस्से में बाड़ लगाई भी जा चुकी है।16 किलोमीटर की आवाजाही का क्या होगा?एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले साल मणिपुर में हुई हिंसा के मामले में यह बात सामने आई थी कि यहां अशांति फैलाने में विदेशी ताकतों का हाथ है। इसमें म्यांमार से इस तरफ आने वाले उग्रवादियों और सशस्त्र गुटों को भी जिम्मेदार ठहराया गया था। साथ ही अवैध प्रवासियों के मामले में इलाके में नार्को टेररिज्म फैलाने का भी आरोप है। कुछ लोगों का कहना है कि भारत सरकार का यह फैसला सही है। इससे देश की सुरक्षा और बढ़ेगी तो वहीं विपक्ष में उतर रहे लोगों का कहना है कि एक्ट ईस्ट नीति के तहत मई 2018 में दोनों देशों के बीच मुक्त आवाजाही समझौते (FMR) मामले में सहमति पत्र पर साइन किए गए थे। जिसमें दोनों देशों के बॉर्डर इलाके में रहने वाले लोग 16-16 किलोमीटर तक आ-जा सकते हैं। इसके लिए उन्हें किसी तरह के पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं है। बस एक साधारण परमिट के से आवाजाही हो सकती है। लेकिन मसला यह है कि जब सीमा पर फेंसिंग हो जाएगी तो फिर 16 किलोमीटर की आवाजाही रूक जाएगी। साथ ही उन लोगों का क्या होगा, जिनके घर, खेत, बिजनेस और परिवार के लोग दोनों देशों में हैं। क्या फेंसिंग लगाना आसान होगा?भारत-म्यांमार जमीनी सीमा देश के चार राज्यों अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर से लगती है। सबसे ज्यादा 520 किलोमीटर का इलाका अरुणाचल प्रदेश, 510 किलोमीटर मिजोरम, 398 किलोमीटर मणिपुर और 215 किलोमीटर का इलाका नगालैंड से मिलता है। इन इलाकों में कई जगह पहाड़ और घना जंगली इलाका है। यहां कटीले तार लगाना अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया बताया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर दुर्गम इलाकों में फेंसिंग लगा भी दी गई तो फिर यहां रेगुलर बेस पर पट्रोलिंग भी करनी होगी। अगर गश्ती दल ने यहां 24 घंटे सातों दिन पट्रोलिंग शुरू नहीं की तो फेंसिंग लगाने का कोई बड़ा लाभ सामने नहीं आएगा।