मानहानि कार्यवाही पर रोक संबंधी कंगना की याचिका देरी की रणनीति: जावेद अख्तर ने अदालत से कहा

गीतकार जावेद अख्तर ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि मानहानि शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगाने की अभिनेत्री कंगना रनौत की याचिका मामले में केवल देरी कराने की रणनीति है।
अख्तर ने उच्च न्यायालय से कंगना की याचिका को खारिज करने का आग्रह किया।
इस महीने की शुरुआत में, रनौत ने 2020 में उनके खिलाफ अख्तर द्वारा दायर की गई आपराधिक मानहानि शिकायत पर रोक लगाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उनके द्वारा अख्तर के खिलाफ दायर की गई शिकायत के साथ ही इस मामले की सुनवाई की जाए।
रनौत के खिलाफ मानहानि का मामला अंधेरी स्थित मजिस्ट्रेट अदालत में है। एक सत्र अदालत ने अख्तर के खिलाफ कंगना की शिकायत पर रोक लगा दी थी।
उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में रनौत ने कहा कि दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की जानी चाहिए।
अख्तर ने अपने वकील जय भारद्वाज के माध्यम से एक हलफनामा दायर किया जिसमें कहा गया कि रनौत ने मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित किसी भी आदेश को चुनौती नहीं दी है और बिना किसी आधार के मानहानि शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगाने का आग्रह किया है।
अख्तर ने कहा कि यह केवल कार्यवाही में देरी कराने का प्रयास है।
रनौत की याचिका मंगलवार को जब न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे के नेतृत्व वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई, तो इसने कहा कि ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई का काम एकल पीठ का है, न कि खंडपीठ का।
इसने उच्च न्यायालय रजिस्ट्री को इसे सत्यापित करने और याचिका को सुनवाई के लिए उचित पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया।
अख्तर ने दावा किया था कि रनौत ने जुलाई 2020 में एक समाचार चैनल के साथ अपने साक्षात्कार में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में उनका नाम लेकर उनकी बेदाग प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
रनौत ने 2021 में मजिस्ट्रेट की अदालत के समक्ष अख्तर के खिलाफ जवाबी शिकायत दर्ज कराई और आपराधिक धमकी तथा उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
अभिनेत्री ने दावा किया था कि 2016 में अख्तर के आवास पर मुलाकात के दौरान, गीतकार ने उन्हें आपराधिक धमकी दी और एक-एक सह-कलाकार से माफी मांगने को कहा।