खालिस्‍तानी ही नहीं, दुनियाभर के आतंकियों का ठिकाना बन रहा जस्टिन ट्रूडो का कनाडा, दशकों पुराना है इतिहास

ओटावा: कनाडा की सरकार ना सिर्फ खालिस्तान आंदोलन को समर्थन देती दिख रही है बल्कि ग्लोबल जिहादी मूवमेंट का भी ये देश अड्डा बन रहा है। द प्रिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि कैसे खालिस्तान और से जुड़े लोगों को कनाडा में शरण मिल रही है। हाल ही में एक नए मामले ने इस ओर लोगों का ध्यान खींचा है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में बीते हफ्ते अभियोजकों ने 20 साल के मिसिसॉगा निवासी आनंदनाथ या अदनान नाम के युवक के खिलाफ मुकदमा शुरू किया, जो जिहादी सेल के हिटमैन के रूप में काम कर रहा था। आरोप है कि सुलेमान रजा और नकाश अब्बासी के साथ मिलकर आनंदनाथ इस्लामिक स्टेट को धन भेज रहा था। इस ऑपरेशन का पर्दफाश होने से रोकने के लिए उसने 2021 में अपने दोस्त नईम अकल की गोली मारकर हत्या भी कर दी थी। यह मामला दिखाता है कि संगठित अपराध से जुड़े खालिस्तान आतंकवादी कनाडा में अकेले नहीं हैं। देश में लगातार जिहादी समूहों को सुरक्षित आश्रय मिल रहा है।द प्रिंट की रिपोर्ट कहती है कि इस्लामी इमिग्रेशन की शुरुआत कनाडा में 1975 में हुई थी। इस साल की गर्मियों में मिस्र के एक प्रांतीय सिविल सेवक का बेटा अहमद सईद खादर इंजीनियरिंग की डिग्री और कनाडाई नागरिकता हासिल करने की उम्मीद में मॉन्ट्रियल पहुंचा। पत्रकार मिशेल शेफर्ड के अनुसार, विश्वविद्यालय में वह मुस्लिम स्टूडेंट एसोसिएशन में शामिल हो गए, जो 1963 में मुस्लिम ब्रदरहुड द्वारा स्थापित एक समूह था और इसकी पूरे उत्तरी अमेरिका में शाखाएं थीं। अहमद सईद ने ही आगे चलकर कनाडा में जिहादी आंदोलन की नींव रखी। खादर ने 1970 के दशक में ईरान और अफगानिस्तान में फैले धार्मिक आंदोलनों में करीबी भागीदारी की मांग की। 1982 में वह अपने परिवार के साथ बहरीन चले गए। तीन साल बाद वे पाकिस्तान चले गए, यहां वह अब्दुल्ला आजम और उनके सहयोगी ओसामा बिन लादेन के समर्थक बन गए।1995 में खादर गिरफ्तारसाल 1995 में पाकिस्तान में मिस्र के दूतावास पर बमबारी के बाद खादर को गिरफ्तार कर लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई। कनाडा की उस वक्त की प्रधान मंत्री जीन चेरेतिन की सरकार ने राजनयिक दबाव बनाया तो उनको उन्हें रिहा कर दिया गया और अफगानिस्तान भेज दिया गया। खादर बाद में 2003 में पाकिस्तानी सेना के साथ गोलीबारी में मारा गया। उसका बेटा उमर के भी आतंकवाद में शामिल होने के पर्याप्त सबूत सामने आए लेकिन पूछताछ के दौरान उसे प्रताड़ित करने में कनाडाई अधिकारियों की भूमिका के लिए प्रधान मंत्री की सरकार से 10.5 मिलियन डॉलर का मुआवजा भी मिला। अनुमान है कि करीब 180 कनाडाई नागरिकों ने इस्लामिक स्टेट के साथ काम किया था, जिनमें से लगभग 80 घर लौट आए हैं। विद्वान काइल मैथ्यूज का कहना है कि देश तथाकथित खिलाफत के लिए किए गए अपराधों के लिए नागरिकों पर मुकदमा चलाने में अनिच्छुक रहा है। अभी तक इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आनंदनाथ या अदनान कैसे इस्लामिक स्टेट की ओर कैसे आकर्षित हुआ। माना जाता है कि अब्बासी के स्वामित्व वाली इस फर्म का इस्तेमाल सीरिया में इस्लामिक स्टेट में कनाडाई लोगों को धन भेजने के लिए किया गया था। ये भी साफ नहीं है कि नाथ जो जन्म के समय ड्रुज था, कैसे इस्लाम में आया। राजनीतिक वैज्ञानिक लोर्ने डावसन ने टोरंटो जिहादियों के बारे में कहा है कि युवा लोग धर्मनिरपेक्ष या अधिकतम मध्यम धार्मिक पृष्ठभूमि से आए प्रतीत होते हैं। फिर भी वे सुसंगत धार्मिक बयानबाजी और उद्देश्य की भावना से एक साथ बंधे हुए थे। 9/11 के वर्षों पहले कनाडाई जासूस वार्ड एल्कॉक ने चेतावनी दी थी कि उनका देश एक ऐसे स्थान के रूप में जाना जा सकता है, जहां से आतंकवादी कृत्यों को वित्त पोषण और बढ़ावा मिलता है।